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निजी बिजली क्षेत्र चाहता है कि टले कोयला नीलामी

श्रेया जय / नई दिल्ली 05 04, 2020

निजी क्षेत्र की ताप बिजली उत्पादकों ने शक्ति कोयला नीलामी के तीसरे दौर में हिस्सेदारी को लेकर चिंता और अनिच्छा दिखाई है, जो अगले सप्ताह होनी है। कंपनियों ने नकदी संकट का हवाला देते हुए सरकार से मांग की है कि बोली की प्रतिभूति राशि और प्रॉसेसिंग शुल्क  वापस किए जाएं. जो उन्होंने जमा किए हैं।

नए दौर की कोयला नीलामी उन दबाव वाली बिजली परियोजनाओं के लिए है, जिन्होंने अपनी बिजली बेचने के लिए बिजली खरीद समझौता (पीपीए) किया है, लेकिन उनके पास कोल लिंकेज नहीं है। शक्ति या स्कीम फार हार्नेसिंग ऐंड अलोकेटिंग कोल ट्रांसपरेंसी इन इंडिया योजना 2018 में शुरू की गई थी, जिसका मसकद उन दबाव वाली बिजली परियोजनाओं को कोयला मुहैया कराना था, जिन्हें कोयले की आपूर्ति नहीं हो रही है।

इसके पहले पिछले 2 साल में हुई दो दौर की बोलियों में करीब 9,389 मेगावॉट बिजली क्षमता के लिए शक्ति योजना के तहत कोयला आवंटित किया गया था। फरवरी में पिछली बोली के दौरान निजी बिजली कंपनियों ने आरोप लगाया था कि कोल इंडिया कोयले की जरूरी मात्रा से कम आवंटन की पेशकश कर रही है।

निजी बिजली इकाइयों ने अब शिकायत की है कि नीलामी का वक्त गलत है। प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला एवं बिजली मंत्रालय को लिखे एक पत्र में एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स (एपीपी) ने कहा है, 'यह समझ से परे है कि कोयले की नीलामी में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है, जब कोविड-19 महामारी के कारण अभूतपूर्व स्थिति बनी हुई है और इससे बिजली उत्पादकों पर दबाव और बढ़ गया है। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से मिलने वाला राजस्व पूरी तरह बंद हो गया है और उनमें से तमाम बिजली उत्पादकों को उत्पादन कम करने के लिए नोटिस भेज रहे हैं।' एपीपी निजी बिजली उत्पादकों की प्रतिनिधि संस्था है।

भारत में 22 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद से बिजली की मांग 30 प्रतिशत कम हुई है। वहीं कुछ राज्य ऐसी इकाइयों से बिजली उत्पादन घटा रहे हैं, जहां उत्पादन लागत ज्यादा पड़ती है। इसकी वजह से बिजली इकाइयों के पास कोयले का स्टॉक जमा हो गया है और कोल इंडिया के पास 30 दिन या इससे ज्यादा के लिए अतिरिक्त कोयला है। साथ ही सरकारी बिजली वितरण कंपनियों का पिछला बकाया 90,000 करोड़ रुपये हो गया है, जो उन्हें उत्पादन कंपनियों को देना है। निजी इकाइयों का बकाया करीब 23,000 करोड़ रुपये है।

निजी कारोबारियों ने केंद्र से कहा है कि नीलामी की अवधि एक माह या कारोबार सामान्य होने तक के लिए टाली जाए। यह भी कहा गया है, 'बोली लगाने वाले जिन लोगों ने बोली की सिक्योरिटी और प्रॉसेसिंग शुल्क पहले ही जमा कर दिया है, उन्हें वह राशि वापस की जा सकती है, जिससे इस धन का इस्तेमाल उनके रोजाना के परिचालन में हो सके।' इस अनुरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कोल इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोल इंडिया नीलामी नहीं करा रही है और उसकी भूमिका सिर्फ कोयला उपलब्ध कराने तक सीमित है।

उन्होंने कहा, 'कोल इंडिया की भूमिका स्रोत के मुताबिक कोयले की मात्रा उपलब्ध कराने तक है, जिसके लिए बिजली वित्त निगम नीलामी करवाता है।'

बहरहाल सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह नीलामी इस क्षेत्र की मांग के मुताबिक कराई जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,  'शुुरुआती दौर में कारोबारियों ने आरोप लगाया था कि कोल इंडिया कम कोयले की पेशकश कर रहा है। अब हमने शक्ति नीलामी व अन्य कोल लिंकेज की नीलामी नियमित रूप से कराने का फैसला किया है। ऐसे अप्रत्याशित दौर में सरकार सभी क्षेत्रों को कोयला मुहैया करा रही है।'

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