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विश्व प्रेस दिवस पर कोविड के बीच खबरनवीसों की कहानियां

मेघना चड्ढा /  May 03, 2020

इतिहास कोविड-19 को तस्वीरों, अपने अनुभव बयां करने के लिए बीमारी से बच जाने वाले लोगों के ब्योरों और दुनिया भर में पत्रकारों की खबरों के जरिये याद रखेगा, जिनमें से कुछ महामारी की खबरें देने के लिए अपनी जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। कोरोनावायरस दुनिया के हर हिस्से में फैल रहा है। ऐसे में करोड़ों लोगों को खबरें देने के काम की वजह से मीडिया लगातार चौकस बना हुआ है जबकि मीडियाकर्मियों के संक्रमित होने का जोखिम है। पत्रकारिता में हमेशा और विशेष रूप से संकट के दौरान जमीन से खबरें देना जरूरी होता है।  टाइम्स ऑफ इंडिया, मुंबई के फोटो पत्रकार एलएल सनत कुमार ने कहा, 'मैं जब हॉटस्पॉट में जाता हूं तो एक सामान्य फेस मास्क, एक जोड़ी दस्ताने, एक जैकेट और प्रार्थना मेरा सुरक्षा कवच होते हैं।'

दूरदर्शन के एक वरिष्ठ संवाददाता तपस भट्टाचार्य ने कहा, 'ऐसे समय में सभी प्रभावित हो रहे हैं और पत्रकार भी कोई अपवाद नहीं है। निश्चित रूप से खबर कवर करते समय डर होता है। हमारी खबरें भी बदल गई हैं। अब हम व्यवस्था की खामियां खोजने के बजाय यह खबरें दे रहे हैं कि कैसे कोरोना योद्धा काम कर रहे हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि लोगों में डर और घबराहट पैदा न हो। ऐसे समय में सच्चाई दिखाना जरूरी है मगर जिम्मेदार रहना भी वक्त की दरकार है।'

पत्रकार सैम डेनियल कहते हैं, 'अब जमीनी खबरें देना बड़ा मुश्किल काम है।' उन्होंने कहा, 'भले ही सूचनाएं उपलब्ध हों, लेकिन कोई भी कार्यालय में बैठकर ही खबरें देने वाला पत्रकार नहीं बनना चाहता है।' उन्होंने कहा, 'ऐसे संकट में पत्रकार के लिए जमीन पर होना जरूरी है। मगर भारत में संवाददाता अपने जुनून की वजह से या तो अपनी सुरक्षा से समझौता कर रहे हैं या प्रेस रिलीज और मंत्रियों के भाषणों पर निर्भर हैं मगर उन्हें उनसे सवाल पूछने का मौका नहीं मिल रहा है। किसी खबर की जांच-पड़़ताल करना ज्यादा मुश्किल हो रहा है। उदाहरण के लिए तमिलनाडु में स्वास्थ्य मंत्री या अधिकारियों से दूर से ही ऑनलाइन सवाल पूछने की कोई व्यवस्था नहीं है।'

भारत में 80 से अधिक पत्रकार कोरोना संक्रमित हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले मुंबई के हैं, जहां संवाददाताओं, कैमरामैन और फोटो पत्रकारों समेत 53 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। हालांकि करीब 31 की दूसरी बार जांच नेगेटिव आई है। एसोसिएटेड प्रेस के फोटो पत्रकार रफीक मकबूल ने कहा, 'जब मेरे पास कॉल आई और यह बताया गया कि मेरी जांच पॉजिटिव आई है, उस समय मैं मुंबई से 130 किलोमीटर दूर था। मैं वहां से लौटेते समय चिंतित था। मेरे दिमाग में बहुत से सवाल उठ रहे थे और मैं अपने परिवार के बारे में सोच रहा था।' मकबूल ने कहा, 'घर पहुंचने के बाद मेरी पत्नी ने कहा कि मैं घर में रहूं। लेकिन हमने महसूस किया कि परिवार की सुरक्षा के लिए मेरा उनसे दूर रहना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। इसलिए मेरी पत्नी ने मेरे बैग में सामान रख दिया और मैं अपनी बेटी से मिलकर एक सप्ताह के लिए क्वारंटीन के लिए होटल रवाना हो गया।' मकबूल कहते हैं कि वह अफगानिस्तान में युद्ध, श्रीलंका में सुनामी या कश्मीर में हिंसा को कवर करने जैसे अत्यधिक जोखिम वाली जिम्मेदारियों में भी हिचके नहीं थे। मकबूल कहते हैं, 'जब अपने आसपास के घटनाक्रम के बारे में सोचते हैं तो आप अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर डरते हैं। आप सोचते हैं कि मैं फिर से ऐसी स्टोरी कभी कवर नहीं करूंगा।' उन्हें अपने अनुभव को बयां करने के लिए शब्द भी नहीं मिल पाते हैं। वह कहते हैं, 'अगर हमें अस्पतालों के अंदर की तस्वीरें लेने की मंजूरी मिल जाए और हम मरीजों एवं डॉक्टरों की पीड़ा को तस्वीरों में कैद करे करें तो मैं कल से यह काम छोड़ दूं।'

दिल्ली में दीप्रिंट की फोटो पत्रकार मनीषा मंडल राजस्थान के भीलवाड़ा में कोविड-19 के मामलों को कवर करने गई थी। वहां से लौटने के बाद उन्हेंं उनके उनके हॉस्टल के अधिकारियों ने प्रवेश नहीं करने दिया। बाद में बड़ी बहस के बाद उन्हें भीतर आने की मंजूरी दी गई। उन्हें दो दिन तक एक कमरे में बंद कर दिया गया। उनके कमरे में दो सप्ताह के क्वारंटीन के बाद उन्हें राष्ट्रीय राजधानी से बाहर जाने की मंजूरी नहीं दी गई है।

मंडल ने कहा, 'मेरा मानना है कि हम आवश्यक सेवाओं के क्रम में सबसे नीचे हैं।' उन्होंने कहा, 'अगर आप संक्रमित हैं तो आपके मन में हमेशा गलती की भावना रहेगी।'

यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मार्च को जनता कफ्र्यू के संबोधन के दौरान मीडिया को आवश्यक सेवाएं घोषित किया था। केंद्र ने 31 मार्च को उच्चतम न्यायालय से यह निर्देश जारी करने को कहा था कि कोई भी मीडिया संस्थान सरकार द्वारा मुहैया कराई गई व्यवस्था से तथ्यों की पुष्टि के बिना कोरोनावायरस कोई चीज मुद्रित, प्रकाशित या प्रसारित नहीं करेगा। हालांकि उच्चतम न्यायालय के आग्रह को ठुकरा दिया। मगर मीडिया से जिम्मेदारीपूर्वक काम करने का आग्रह किया। मंडल ने कहा, 'हालांकि हम आवश्यक सेवाओं का हिस्सा हैं, मगर हमारे साथ समाज बहिष्कृत जैसा व्यवहार हो रहा है। लोग सोचते हैं कि आप संक्रमित हैं और उन्हें भी संक्रमित कर देंगे।' हर साल 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस से पहले संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, 'पत्रकार कोविड-19 को लेकर भ्रामक सूचनाओं के लिए एंटीडॉट मुहैया कराते हैं।'

जागरण न्यू मीडिया में चीफ सब-एडीटर उर्वशी कपूर ने कहा, 'तथ्यों को जांचने वाले एक पत्रकार के रूप में लोगों से समन्वय से लेकर दावे की जांच तक बहुत सा काम जमीनी स्तर पर करना पड़ता है। इसका यह मतलब नहीं है कि इनमें से बहुत सी चीजें घर से नहीं की जा सकती हैं मगर हम इस नए सामान्य के लिए मानसिक रूप से कभी तैयार नहीं थे।'

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