बिजनेस स्टैंडर्ड - अनिश्चितता भरे दौर में मिले वित्तीय योजना को नया ठौर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, August 15, 2020 09:33 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

अनिश्चितता भरे दौर में मिले वित्तीय योजना को नया ठौर

संजय कुमार सिंह /  05 02, 2020

साल की शुरुआत में ज्यादातर पेशेवरों ने सोचा भी नहीं होगा कि वित्त वर्ष 2020-21 का आगाज लॉकडाउन के बीच होगा और शुरू होते ही वेतन कटने या नौकरी छिन जाने की आशंका गहराने लगेंगी। इतना तनाव शायद काफी नहीं था तो कुछ हफ्तों में ही इक्विटी निवेश की कीमत में 25 से 30 फीसदी की सेंध लग गई होगी। जिन्होंने ज्यादा जोखिम वाले मिड और स्मॉल कैप शेयरों में दांव लगाया होगा उन्हें नुकसान भी उतना ही ज्यादा हुआ होगा। इस समय डेट बाजार में भी ब्याज दरों पर बहुत दबाव है, इसलिए सावधि जमा (एफडी) और डेट म्युचुअल फंडों से भी शानदार प्रतिफल मिलने के आसार नहीं हैं। इतना ही नहीं, कंपनियों द्वारा भुगतान से मुकरे जाने का जो खतरा पैदा हो गया है, उसके कारण क्रेडिट का जोखिम भी बढ़ गया है। एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने पिछले महीने बिल्डरों को 'हालात से समझौता' करने का मंत्र दिया। यही मंत्र ज्यादा कार्मिक पेशेवरों को भी अपनाना पड़ सकता है। निश्चित रूप से यह सामान्य समय नहीं है, इसलिए लीक से हटकर कुछ कदम उठाने होंगे।

फिर तय करें लक्ष्य
सबसे पहले यह जांचें कि आप उतना पैसा बचा पाए हैं या नहीं और उतना निवेश किया है या नहीं, जितने की योजना आपने पिछले साल बनाई थी। हर किसी का लक्ष्य अपने हाथ में आने वाले वेतन का कम से कम 30 फीसदी बचाना और निवेश करना होना चाहिए। लेकिन अगर वेतन में कटौती या नौकरी जाने का खतरा है तो आपको इस मोर्चे पर समझौता करना होगा। इसलिए मजबूरी आ जाए तो मन मारकर ही सही निवेश रोक दीजिए। बेशक यह आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन यह समय भी सामान्य नहीं है।
बहरहाल इस समय मौके भी अच्छे मिल रहे हैं। लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप सूचकांक इस समय साल भर पहले के मुकाबले 21 से 32 फीसदी तक नीचे चल रहे हैं। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और फिड््यूशरीज के संस्थापक अविनाश लूथरिया ने कहा, 'इस गिरावट का मतलब है कि आप अपने लक्ष्यों से पीछे छूट गए हैं। आपको या तो तेज रफ्तार से पैसा बचाना और निवेश करना होगा या अपने लक्ष्यों को कुछ साल आगे खिसकाना होगा।'
जिन लोगों के वेतन में कटौती हुई है या नौकरी चली गई है, उनके लिए निकट भविष्य में ज्यादा निवेश करना मुश्किल हो सकता है। कुछ विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। उदाहरण के लिए अगर आपके बच्चे ने विदेशी कॉलेज में पढऩे की योजना बनाई है और आप भी पहले पूरा खर्च उठाने के बारे में सोच रहे थे तो अब आप उसे छात्रवृत्ति का मौका तलाशने या ऋण लेने के बारे में सोचने की सलाह दे सकते हैं। इक्विटी में भारी गिरावट का यह भी मतलब है कि आपका शेयरों में आवंटन पहले से निर्धारित स्तर से नीचे आ गया होगा। डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में पैसिव निवेश एवं योजनाओं के प्रमुख अनिल घेलानी की सलाह है, 'यह खाई पाटने की कोशिश करें क्योंकि मूल परिसंपत्ति आवंटन पर कायम रहना अहम है।'
इस लक्ष्य को कैसे हासिल करें, इस बारे में कैपिटल क्वॉशंट के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी सौष्ठव चक्रवर्ती सीधी सरल सी राय देते हैं। उन्होंने कहा, 'अपना एसआईपी जारी रखें। लेकिन आपके पास जो अतिरिक्त पैसा आता है, उसे शेयरों में लगाएं।' उप-परिसंपत्ति स्तर पर भी आपके आवंटन में फेरबदल की जरूरत पड़ सकती है। चक्रवर्ती ने कहा, 'जब बाजारों में सुधार आएगा तो इसकी अगुआई लार्ज-कैप करेंगे। मिड और स्मॉल कैप में अपने निवेश को कम करें और लार्ज-कैप ऐक्टिव या इंडेक्स फंडों में पैसा लगाएं।'

कौन सी कर व्यवस्था बेहतर
इस बार के बजट में एक नई वैकल्पिक व्यक्तिगत कर प्रणाली शुरू की गई है। इसमें कर की दरें कम रखी गई हैं, लेकिन पुरानी व्यवस्था में मिलने वाली कई कर कटौती और छूट खत्म कर दी गई हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के 13 अप्रैल के परिपत्र के मुताबिक वेतनभोगी कर्मचारियों को अप्रैल में ही यह घोषणा करनी होगी कि वे कौन सी व्यवस्था चुनेंगे ताकि उनके नियोक्ता उसी हिसाब से स्रोत पर कर कटौती शुरू कर सकें। आपने जो व्यवस्था एक बार चुन ली, उसे कर कटौती के उद्देश्यों से आप नियोक्ता से बदलवा नहीं पाएंगे। लेकिन कर रिटर्न भरते समय उसे बदलने का विकल्प आपको मिलेगा।
क्लियर टैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता ने कहा, 'मान लीजिए कोई व्यक्ति पुरानी कर व्यवस्था चुनता है और कर बचाने वाले वे सभी निवेश करता है, जिनकी योजना उसने पहले से बना रखी है। साल के अंत में कर सलाहकार से बात करने पर उसे पता चलता है कि कौन सी व्यवस्था उसके लिए बेहतर रहेगी। अगर वह अपने कर बचत के विकल्प (जैसे पीपीएफ, ईएलएसएस, स्वास्थ्य बीमा और अन्य) सोच-समझकर चुनता है तो उसे नई कर प्रणाली चुनने पर भी कोई नुकसान नहीं होगा।

ज्यादा नकदी रखें
कोरोना संकट की वजह से आपको सबसे पहले जो आदत बदलनी होगी, वह नकदी के बारे में है। अब आपको ज्यादा से ज्यादा नकदी अपने पास रखनी होगी। लूथरा कहते हैं, 'मान लीजिए कि हफ्ते के आखिरी दिनों में आपको सेहत संबंधी किसी दिक्कत से ही जूझना पड़े तो क्या करेंगे? ऐसे समय के लिए आपके पास नकदी होनी चाहिए और वह नकदी आपके जीवनसाथी की पहुंच में भी होनी चाहिए।'

पर्याप्त जीवन बीमा खरीदें
अगर आपने कमाना शुरू कर दिया है तो तत्काल टर्म इंश्योरेंस खरीदने के बारे में विचार करें। आपको यह बात समझनी चाहिए कि भविष्य में आप पर भी कुछ लोग निर्भर होंगे और आप पर जिम्मेदारियां होंगी। जब आप कम उम्र में टर्म इंश्योरेंस खरीदते हैं तो इसका प्रीमियम भी कम ही देना पड़ता है। साथ ही बीमा की पूरी अवधि के दौरान प्रीमियम में कोई बदलाव नहीं होता है।
अब सबसे अहम और पेचीदा सवाल यह उठता है कि किसी व्यक्ति के लिए कितना टर्म इंश्योरेंस पर्याप्त है? इस बारे में पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के मुख्य कारोबार अधिकारी (जीवन बीमा) संतोष अग्रवाल आसान गणित समझाते हैं। उनका कहना है, 'जिन लोगों की उम्र 40 साल से कम है, उन्हें अपने हाथ में आने वाले वेतन की 15 से 20 गुना राशि के बराबर बीमा लेना चाहिए। जिनकी उम्र 40 साल से अधिक है, उन्हें 10 गुना राशि के बराबर बीमा लेना चाहिए। आपका वेतन आयु के हिसाब से बढ़ता है, इसलिए 40 साल की आयु के बाद 10 गुना बीमा पर्याप्त होगा। जिन युवाओं के पर्याप्त राशि का बीमा नहीं लिया है और उनकी शादी हो चुकी है, बच्चे हो गए हैं या आवास ऋण का बोझ जिनके ऊपर आ गया है, उन्हें अपनी बीमा राशि में भी उसी हिसाब से इजाफा करना चाहिए।
टर्म बीमा खरीदते समय विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम (एमपीडब्ल्यूए) का विकल्प अपनाना चाहिए। अग्रवाल इसकी वजह समझाते हैं, 'माना कि बीमाधारक की मृत्यु के समय उस पर बड़ा ऋण बकाया है। यदि इस विकल्प को चुन लिया होगा तो ऋणदाता उस व्यक्ति के जीवनसाथी को मिलने वाली जीवन बीमा राशि उससे ले नहीं सकेगा।'

समूह बीमा पर न रहें निर्भर
कोविड संकट सामने आने पर सभी की समझ में आ गया है कि समुचित स्वास्थ्य बीमा खरीदना कितना जरूरी है। मणिपाल सिग्ना हेल्थ इश्योरेंस के एमडी और सीईओ प्रसून सिकदर कहते हैं, 'अगर आपके पास केवल ग्रुप हेल्थ पॉलिसी है तो खुद अपने पूरे परिवार के लिए एक अलग कवर खरीदें।' याद रखें कि नौकरी नहीं रहेगी तो ग्रुप कवर भी नहीं रहेगा। कम से कम उम्र में उतना कवर लेने की कोशिश करें, जितना आप वहन कर सकते हैं। लूथरिया ने कहा, 'ज्यादातर लोग मानते हैं कि वे उम्र बढऩे के साथ कवर बढ़ा लेंगे। लेकिन हो सकता है कि जब आप बूढ़े हो जाएं तो कंपनियां कवर बढ़ाने से ही इनकार कर दें।' किसी एक व्यक्ति के लिए 10 लाख रुपये और किसी छोटे परिवार के लिए 20 लाख रुपये के कवर को अच्छी शुरुआत कहा जा सकता है। सिकदर का सुझाव है कि हर किसी को अपनी बीमित राशि बढ़ाने के लिए सुपर टॉप-अप का विकल्प चुनना चाहिए क्योंकि यह ज्यादा सस्ता विकल्प है।
Keyword: FD, Debt Mutual Funds, Investment, Lockdown, Covid-19, Pandemic, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, इक्विटी निवेश, मिड कैप शेयर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के लाभांश से खजाने पर कम होगा बोझ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.