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राइट्स इश्यू का रिटर्न रहा है मिश्रित

समी मोडक / मुंबई May 01, 2020

साल 2019 से राइट्स इश्यू में भाग लेने वाले निवेशकों के लिए इसके नतीजे मिश्रित रहे हैं। पिछले 16 महीने में देसी बाजारों में 15 कंपनियों ने राइट्स इश्यू के जरिए 56,000 करोड़ रुपये की नई इक्विटी पूंजी जुटाई। इन 15 कंपनियों में सिर्फ छह के शेयर की कीमतें उनके इश्यू प्राइस से अभी ऊपर है।

मौजूदा शेयरधारकों को नए शेयरों की पेशकश कर रकम जुटाने की सहूलियत सूचीबद्ध कंपनियों को मिली हुई है, जो राइट्स इश्यू की व्यवस्था के तहत होती है। नए शेयर मोटे तौर पर मौजूदा बाजार भाव के मुकाबले छूट पर दिए जाते हैं ताकि निवेशकों को इसे लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

पिछले साल मई में भारती एयरटेल के राइट्स इश्यू में भागीदारी करने वाले निवेशकों की रकम दोगुनी हो गई है। दूसरी ओर प्रतिस्पर्धी वोडाफोन आइडिया का शेयर अभी इश्यू प्राइस से 66 फीसदी नीचे है। दोनों दूरसंचार कंपनियों ने अपने-अपने राइट्स इश्यू के जरिए करीब 25,000-25,000 करोड़ रुपये जुटाए। पीरामल एंटरप्राइजेज और टाटा स्पंज आयरन (अब टाटा स्टील लॉन्ग प्रॉडक्ट्स) अभी अपने राइट्स इश्यू से क्रमश: 24 व 53 फीसदी नीचे है।

15 कंपनियों ने अपने शेयर बाजार भाव के मुकाबले ठीक-ठाक छूट पर पेश किए थे, लेकिन इस साल बाजार में आई गिरावट ने निवेशकों और प्रवर्तकों के लिए रिटर्न का मामला खराब कर दिया।

राइट्स इश्यू अन्य प्रतिभूतियों मसलन क्यूआईपी, इंस्टिट््यूशनल प्लेसमेंट प्रोग्राम (आईआईपी) की तरह लोकप्रिय नहीं है। हालांकि इसका इस्तेमाल कंपनियां तब करती हैं जब प्रवर्तक समूह अपनी शेयरधारिता बनाए रकने का इरादा जताता है। साथ ही प्रवर्तकों को भी रकम झोंकनी होती है और यह निवेशकों को सकारात्मक संकेत देने में मदद करता है।

बाजार के विशेषज्ञों ने कहा कि निवेशकों को किसी कंपनी के राइट्स इश्यू में निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी की संभावना पर नजर डालनी चाहिए। अगर मौजूदा निवेशक राइट्स इश्यू में भाग नहींं लेना चाहता है तो वह किसी अन्य को शेयर देने वाला विकल्प चुन सकता है।

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