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एफएमसीजी की सुस्त होगी रफ्तार

विवेट सुजन पिंटो / मुंबई May 01, 2020

देश के करीब 4.3 लाख करोड़ रुपये के एफएमसीजी बाजार की रफ्तार को इस साल कोरोनावायरस का झटका लग सकता है। इस वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण आपूर्ति शृंखला में व्यवधान पैदा हो गया है और ग्राहकों के वर्ताव में बदलाव दिख रहा है। इससे एफएमसीजी बाजार को तगड़ा झटका लग सकता है।

बाजार अनुसंधान एजेंसी नीलसन के आकलन के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2020 के लिए एफएमसीजी क्षेत्र की वृद्धि 5 से 6 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान है जो जनवरी में जारी उसके अनुमान के मुकाबले लगभग आधी है। उस समय नीलसन के कहा था पूरे वर्ष 2020 के लिए एफएमसीजी की वृद्धि 9 से 10 फीसदी के दायरे में रहेगी जो 2019 में दर्ज 9.2 फीसदी की वृद्धि के लगभग बराबर है। एफएमसीजी की वृद्धि दर 2017 में 13.5 फीसदी रही थी और 2018 में भी इतनी ही वृद्धि दर्ज की गई थी।

कोरोवायरस वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिए भारत में देशव्यापी लॉकडाउन के कारण पैदा हुए आर्थिक व्यवधान और संभवत: चरणबद्ध तरीके से इसे हटाए जाने के मद्देनजर अपने अनुमान में संशोधन किया है। देश में कोविड-19 के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और ऐसे में संक्रमण वाले क्षेत्रों में फिलहाल कोई ढील नहीं दी जा सकती है।

नीलसन के अध्यक्ष (दक्षिण एशिया) प्रसून बसु ने कहा, 'इसका मतलब साफ है कि एफएमसीजी खपत के लिहाज से अप्रैल से जून की अवधि सबसे खराब रहेगी।' हालांकि उनका मानना है कि साल की दूसरी छमाही के दौरान कुछ सुधार दिख सकता है लेकिन वह पूरे वर्ष 2020 के लिए सकल वृद्धि को रफ्तार देने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

नीलसन के अनुसार, मार्च तिमाही में एफएमसीजी की वृद्धि 5.3 फीसदी थी जिसमें ई-कॉमर्स को शामिल नहीं किया गया है। यदि ई-कॉमर्स को भी शामिल कर लिया जाए तो मार्च तिमाही के लिए वृद्धि बढ़कर 6.3 फीसदी हो जाएगी जो इस बाजार अनुसंधान फर्म के पिछले आकलन के अनुरूप है।

हालांकि नीलसन के साथ-साथ बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी से मार्च की अवधि में कोरोवायरस का पूरा प्रभाव नहीं दिखता है क्योंकि लॉकडाउन की शुरुआत मध्य मार्च में हुई थी। बसु ने कहा कि हालांकि जनवरी और फरवरी के दौरान एफएमसीजी की वृद्धि 6.4 फीसदी रही थी लेकिन मार्च में वह घटकर 3.3 फीसदी रह गई। वैश्विक एवं घरेलू एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि कैलेंडर वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही के दौरान कोरोवायरस और लॉकडाउन का पूरा प्रभाव दिखेगा। इन कंपनियों में यूनिलीवर, प्रॉक्टर ऐंड गैंबल, नेस्ले, कोका कोला, पेप्सिको, गोदरेज कंज्यूमर (जीसीपीएल) और मैरिको शामिल हैं। कुछ सीईओ का कहना है कि दूसरी छमाही में सुधार काफी हद तक इस महामारी के नियंत्रण पर निर्भर करेगा।

जीसीपीएल के प्रंबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी विवेक गंभीर ने कहा, 'यह दो छमाही की कहानी हो सकती है जो इस बात पर निर्भर करेगी कि यह संकट कितने समय तक बरकरार रहता है।'

गंभीर ने कहा, 'योजना के लिहाज से जीसीपीएल में हम मान रहे हैं कि इस वायरस का वास्तविक प्रभाव वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) की अवधि में दिखेगा और उसका कुछ प्रभाव दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में भी रहेगा। लेकिन यदि संकट में कमी आती है तो आप देखेंगे कि दूसरी छमाही (वित्त वर्ष 2021 की) पहली के मुकाबले काफी अलग होगी।'

नीलसन का कहना है कि मार्च तिमाही में जिन श्रेणियों को सबसे अधिक झटका लगेगा उनमें होम और पर्सनल केयर शामिल हैं। बाजार अनुसंधान फर्म ने कहा कि गैर-फूड श्रेणी होने के कारण इन श्रेणियों की वृद्धि दर घटकर 1.8 फीसदी (जनवरी से मार्च की अवधि में) रह जाएगी जबकि दिसंबर 2019 तिमाही में यह आंकड़ा 3.8 फीसदी रहा था।

बसु ने कहा कि मार्च में गैर-फूड श्रेणियों में नकारात्मक वृद्धि (-0.8 फीसदी) दर्ज की गई क्योंकि कोविड संकट के कारण विवेकाधीन खर्च को तगड़ा झटका लगा है। दूसरी ओर, फूड श्रेणी में मार्च में 6.2 फीसदी की वृद्धि रही जो जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान 7.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। यह आंकड़ा दिसंबर तिमाही के दौरान दर्ज की गई 8.3 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले थोड़ा कम है।

Keyword: FMCG, Coronavirus, Lockdown, Covid-19, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, महामारी, देशबंदी, एफएमसीजी,
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