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'विवाद से विश्वास' के तहत किस्तों में भुगतान पर विचार

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली May 01, 2020

कोरोनावायरस महामारी की वजह से पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए सरकार अपनी प्रमुख 'विवाद से विश्वास' प्रत्यक्ष कर समाधान योजना के लिए किस्तों में भुगतान करने के विकल्प पर विचार कर रही है। इस योजना के तहत 30 जून से पहले भुगतान किए जाने की जरूरत है जो नकदी संकट और लॉकडाउन की वजह से आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहे ज्यादातर व्यवसायों के लिए चुनौतीपूर्ण दिख रहा है।

वित्त वर्ष के लिए बड़े राजस्व संग्रह के लक्ष्य के साथ सरकार करदाताओं के बीच इस योजना को आकर्षक बनाने के तरीकों पर विचार कर रही है।

'विवाद से विश्वास योजना' की घोषणा 1 फरवरी को पेश किए गए बजट में की गई थी और इसमें ब्याज जुर्माने को माफ किए जाने तथा 31 जनवरी 2020 तक बकाया कर के विवादों को निपटाए जाने की अनुमति दी गई।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'यह सुनिश्चित करने के तरीकों पर विचार हो रहा है कि योजना व्यवसायियों के लिए महत्त्वपूर्ण बनी रहे, क्योंकि वे नकदी किल्लत और आर्थिक गतिविधि ठप होने से प्रभावित हुए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में 31 मार्च तक तीन किस्तों में भुगतान की अनुमति देना, या इसे अगले वित्त वर्ष तक बढ़ाना उचित दिख रहा है। इससे व्यवसायियों को मौजूदा नकदी किल्लत से उबरने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।'

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भुगतान की अवधि बढ़ाने की अनुमति के लिए नियम में संशोधन से ज्यादा संख्या में लोग इस योजना में शामिल होने के लिए उत्साहित होंगे और इससे सरकार के राजस्व में मदद मिलेगी।

कई कंपनियां इस योजना में भागीदारी के अपने रुख पर फिर से विचार कर रही हैं। यह योजना पहले अतिरिक्त 10 प्रतिशत भुगतान के बगैर 31 मार्च को समाप्त हो रही थी, लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से इसकी तारीख बढ़ा दी गई है।

सरकार ने अघोषित आय के लिए 2016 में आय घोषणा योजना को लागू किया था जिसमें करों का भुगतान तीन किस्तों - 30 नवंबर, 31 मार्च और 30 सितंबर - में किए जाने की अनुमति दी थी।

राजस्व संग्रह पर दबाव को देखते हुए, सरकार ने इस योजना के लिए 2 लाख करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद जताई।

नांगिया एंडरसन के निदेशक संदीप झुनझुनवाला का कहना है कि डायरेक्ट टैक्स विवाद से विश्वास ऐक्ट 2020 की धारा 5 के तहत इंसटॉलमेंट सुविधा से संबंधित कंपनियों को अपने पुराने आयकर विवादों को निपटा कर वित्तीय संकट से उबरने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, 'वैश्विक महामारी की वजह से नकदी प्रवाह वाकई बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है और ऐसे में किस्तों की सुविधा से कंपनियों को प्रमुख व्यावसायिक कार्य शुरू करने के लिए मौजूद नकदी का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।'

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