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कल चमन था आज सहरा हुआ..
अमेरिका में हाउसिंग संकट गहराने से वित्त वर्ष 2008-09 में निवेशकों को 41.6 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा। जो क्षेत्र सबप्राइम ऋण डिफॉल्ट की वजह से सबसे अधिक प्रभावित हुए, उनमें आवास निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रमुख हैं।
बीजी शिरसाठ /  April 04, 2009

शेयर बाजार में लगभग 6 साल तक सकारात्मक रिटर्न हासिल करने के बाद निवेशकों को अमेरिका में हाउसिंग संकट गहराने की वजह से वित्त वर्ष 2008-09 में 41.6 फीसदी या 21.54 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

जो क्षेत्र सबप्राइम ऋण डिफॉल्ट की वजह से सबसे अधिक प्रभावित हुए, उनमें आवास निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रमुख रूप से शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर धातुओं की कीमतों में आई गिरावट ने इसके निर्माताओं को नुकसान पहुंचाया।

वहीं वित्तीय सेवा क्षेत्र में नौकरियों पर गिरी गाज ने एयरलाइन, ऑटोमोबाइल और रिटेलर जैसे उपभोक्ता-आधारित क्षेत्रों के शेयर भावों को काफी हद तक प्रभावित किया। शिपयार्ड, इलेक्ट्रिकल उपकरण, मेटलर्जीकल कोक, स्टील-हॉट और कोल्ड रॉल्ड शीट, ट्रांसमिशन लाइन टावर और हाउसिंग कंस्ट्रक्शन कंपनियों के शेयरों में 75 फीसदी से भी अधिक की गिरावट देखी गई।

हालांकि दोपहिया निर्माता अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने में सफल रहे। दोपहिया निर्माता दोहरे अंक में लाभ हासिल करने में कामयाब रहे और 2008-09 में इस क्षेत्र में निवेशकों के धन में 45 फीसदी तक का इजाफा हुआ।

खाद्य उत्पादों के शेयरों ने निवेशकों की रकम में 3 फीसदी का इजाफा किया वहीं पर्सनल केयर उत्पाद अपने निवेशकों के धन को ह्रास से बचाने में सफल रहे और अगर इनके मूल्य में गिरावट आई भी तो यह बेहद नगण्य थी। अन्य क्षेत्रों की बात करें तो 8 क्षेत्रों की बाजार पूंजी 12 और 25 फीसदी के बीच गिरी।

127 सेक्टरों के बाजार मूल्यांकन में 72 से 50 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई वहीं 42 सेक्टरों के शेयरों में गिरावट 25 और 50 फीसदी के बीच थी। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर कारोबार करने वाले 65.4 शेयरों ने निराशाजनक प्रदर्शन किया। इन शेयरों में प्रत्येक में 45 फीसदी से भी अधिक की गिरावट देखी गई।

सिर्फ 248 या लगभग 9 फीसदी शेयरों ने अपने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया। इनमें से 38 शेयरों ने 100 फीसदी से भी अधिक की बढ़त हासिल की वहीं 25 ने 50 और 99 फीसदी के बीच बढ़त हासिल की। बीएसई द्वारा कारोबारी समूहाें में विभाजित किए गए ए-गु्रप के 53 फीसदी और बी गु्रप के 70 फीसदी शेयरों ने निराशाजनक प्रदर्शन किया।

शेयर कीमतों में आवधिक मूल्य गिरावट के बावजूद कारोबारियों ने बाजार को लेकर अपनी भेड़चाल जारी रखी। 2008-09 में बीएसई और एनएसई पर कारोबारी सौदों की संख्या में मामूली इजाफा दर्ज किया गया। शेयरों के संदर्भ में बीएसई पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में 25 फीसदी की गिरावट आई वहीं एनएसई में यह गिरावट 5 फीसदी रही।

सक्रिय रूप से कारोबार करने वाले शेयरों की बाजार कीमत में 42 फीसदी की कमी आने के कारण 2008-09 में बीएसई का कारोबार 30 फीसदी घटा वहीं एनएसई को अपने कारोबार में 22.4 फीसदी की गिरावट का सामना करना पड़ा।

बीएसई का सेंसेक्स 38 फीसदी नीचे पहुंच गया जो 2000-01 के बाद से इसकी सबसे बड़ी गिरावट थी। 2000-01 में शेयर बाजार में गिरावट के बाद यह 28 फीसदी तक लुढ़का था। आवास निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों वाले रियल्टी सूचकांक को 2008-09 में सबसे तगड़ा झटका लगा। यह सूचकांक 79 फीसदी नीचे पहुंच गया था।

बीएसई के कंज्यूमर डयूरेबल और मेटल सूचकांक 59-59 फीसदी गिरे वहीं कैपिटल गुड्स इंडेक्स 54 फीसदी गिरा। बीएसई 500 सूचकांक ने भी खराब प्रदर्शन किया और यह 43 फीसदी लुढ़का वहीं बीएसई मिड कैप सूचकांक (-54 फीसदी) और स्मॉल कैप सूचकांक (59 फीसदी) ने रिलेटिव टर्म में निराशाजनक प्रदर्शन किया।

हाउसिंग कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रास्ट्रक्चर शेयरों को बढ़ती ब्याज दरों, कमजोर आर्थिक परिदृश्य में घट रही ऑर्डर बुक और रियल एस्टेट की कीमतों में भारी कमी  आने की वजह से पिछले 12 महीनों के दौरान बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा। यूनिटेक 87 फीसदी और डीएलएफ 74 फीसदी लुढ़के। दूसरी तरफ आकृति सिटी 23 मार्च तक धीमे विकास को बरकरार रखने में सफल रही।

ए-गु्रप के शेयरों में स्पाइस कम्युनिकेशन्स ने दोगुनी बढ़त हासिल की वहीं हीरो होंडा ऑटो क्षेत्र के शेयरों में बढ़त हासिल करने वाली एकमात्र कंपनी रही। इसने अपने शेयरधारकों की कीमत में 55 फीसदी का इजाफा किया। ए-गु्रप के फायदे में रहने वाले अन्य शेयरों में कैस्ट्रॉल, ल्यूपिन लैबोरेटरीज और कॉलगेट पामोलिव, जीएसके कंज्यूमर शामिल रहे।

ये शेयर 10 फीसदी से अधिक चढ़े। नुकसान में रहने वाले शेयरों में इंडियाबुल्स फाइनैंसियल, रोल्टा, गुजरात एनआरई कोक, वेलस्पन गुजरात, जय कॉर्प, सुजलॉन एनर्जी और अबान ऑफशोर शामिल रहे। इन शेयरों में 75 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

बिनायक टेक्स प्रोसेसर्स 1300 फीसदी की बढ़त के साथ बी-गु्रप के शेयरों में शीर्ष पर रहा। अच्छी बढ़त हासिल करने वाले बी-गु्रप के अन्य शेयरों में टोरेंट केबल्स (555 फीसदी), क्वालिटी डेयरी (+431 फीसदी), श्री ग्लोबल ट्रेडफिन (+390 फीसदी) और पैनोरामिक यूनिवर्सल (+267 फीसदी) शामिल थे।

बी-ग्रुप के नुकसान में रहने वाले शेयरों की सूची भी लंबी है। इसके 20 शेयरों की बाजार कीमत 90 फीसदी से भी अधिक गिरी। इस सूची में सबसे ज्यादा नुकसान में रहने वाले शेयरों में ट्रिटन कॉरपोरेशन, बायो ग्रीन, पिरामिड साइमीरा, मायटास इन्फ्रा, प्रजय इंजीनियर्स और विशाल रिटेल शामिल हैं।

हालांकि 9 मार्च की तेज गिरावट के बाद बेंचमार्क सूचकांक में 25 फीसदी का उछाल आया है। इमरजिंग पोर्टफोलियो फंड रिसर्च (ईपीएफआर) ग्लोबल के मुताबिक विदेशी निवेशकों में जोखिम की भूख पुन: देखी गई है और शेयर की कीमतों में उछाल को देखते हुए उन्होंने पिछले दो सप्ताहों में एशियाई इक्विटी फंडों में 50.2 करोड़ रुपये की नई रकम लगा दी है।

जनवरी 1998, जब बाजार जुलाई 1997 की ऊंचाई से गिर कर आधा रह गया था, में प्रवाह मंद बाजार रैली के बावजूद सकारात्मक था। सिटीग्रुप के मुताबिक 1998 के अंतिम चार महीनों, जब एशियाई बाजार निचले स्तर से 50 फीसदी आगे था, में मुश्किल से ही कोई निवेशक यह मान रहा था कि शेयर कीमतें नीचे आई हैं और चार में से तीन महीनों में एशियाई फंडों से रिडेम्पशन जारी रहा।

फंड प्रवाह और बाजार प्रदर्शन के बीच अंतर तेजी की शुरुआत का एक संकेत है। सिटीगु्रप एशिया पैसीफिक के शोध में कहा गया है कि निचले स्तर से 25 फीसदी की शानदार उछाल शेयरों के भाव कम रहने, विकास दर फिर से ठीक होने, बढ़ती मौद्रिक तरलता आदि की बदौलत आई है। 

भारत का बाजार ऐतिहासिक रूप से 30 महीने की मंदी की चपेट में है जो क्षेत्रीय बाजारों (21-30 महीने) की तुलना में काफी अधिक है। बेंचमार्क सूचकांक अपने 15 साल के औसत पीई से 30 फीसदी डिस्काउंट पर कारोबार कर रहा है और यह अपने ऐतिहासिक निचले स्तर से लगभग 15 फीसदी ऊपर है।

मौजूदा उछाल तेजी की शुरुआत नहीं है। भारत के शेयर बाजार में निचला स्तर लंबे समय तक बना रहा है और यह इसके आर्थिक चक्र के कारण ही है। बाजार में मौजूदा कारोबारी उछाल के बजाय रेंगने की संभावना अधिक है।

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