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बड़े स्टार्टअप का घट रहा मूल्यांकन

पीरजादा अबरार और नेहा अलावधी / बेंगलूरु/नई दिल्ली May 01, 2020

कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के बीच ओयो, जोमैटो, ओला और स्विगी जैसे 1 अरब डॉलर के कारोबार वाले स्टार्टअप (यूनिकॉर्न) को वैश्विक निवेशकों से रकम जुटाने में देरी अथवा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष तौर पर सरकारी प्रतिबंध के कारण चीन के निवेशकों से रकम जुटाने में परेशानी हो सकती है।

भारतीय स्टार्टअप बाजार में काफी सक्रिय दिखने वाले विदेशी निवेशकों में टेनसेंट, बाइटडांस और अलीबाबा जैसी चीनी कंपनियों के अलावा सॉफ्टबैंक, वीजा, नैसपर्स एवं विभिन्न सॉवरिन फंड शामिल हैं। इन विदेशी निवेशकों ने भारतीय स्टार्टअप क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश किया है। स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश के मुख्य वाहक वेंचर कैपिटल और निजी इक्विटी फर्म हैं। पूंजी के लिए स्टार्टअप आमतौर पर विदेशी स्रोतों पर निर्भर होते हैं। भारत सरकार ने हाल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में बदलाव करते हुए कोविड-19 संकट के कारण मौकापरस्त अधिग्रहण को रोकने की पहल की है। समझा जाता है कि इससे अलीबाबा, टेनसेंट और श्याओमी जैसी दिग्गज चीनी कंपनियों का भारत में निवेश प्रभावित होगा। विदेशी निवेश प्रभावित होने से यूनिकॉर्न के कारोबार पर जबरदस्त प्रभाव दिखेगा। इसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों के वेतन में कटौती, छंटनी और मूल्यांकन में उल्लेखनीय गिरावट दिख सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे अगले कुछ महीनों में विलय-अधिग्रहण के जरिये सुदृढीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। भारतीय स्टार्टअप में चीन के प्रौद्योगिकी निवेशकों का कुल निवेश करीब 4 अरब डॉलर होने का अनुमान है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मार्च 2020 में समाप्त पांच वर्षों के दौरान भारत के 30 यूनिकॉर्न में से 18 में चीनी कंपनियों का निवेश है। नई दिल्ली की विशेषज्ञ तकनीकी कानून फर्म टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स के मैनेजिंग पार्टनर सलमान वारिस ने कहा, 'कोविड-19 के बाद की परिस्थिति में और चीनी निवेश पर लगाम लगाने के लिए एफडीआई नीति में किए गए हालिया बदलाव के कारण बड़े स्टार्टअप एवं यूनिकॉर्न को आगे के निवेश दौर में रकम जुटाने में काफी परेशानी होगी। चीन के निवेशकों के बीच इसे लेकर काफी चिंता है।'

आमतौर पर भारतीय बाजार में प्रत्यक्ष निवेश करने वाले अमेरिका, पश्चिम एशिया और यूरोप जैसे अन्य क्षेत्रों के निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण चिंतित हैं। विश्लेषकों का कहना है कि आगे के निवेश दौर के लिए अपनी पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए शीर्ष भारतीय स्टार्टअप काफी आक्रामक रुख अपनाते हुए मूल्यांकन घटाने के लिए भी तैयार हो सकते हैं।

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