बिजनेस स्टैंडर्ड - फंसे लोगों को भेजने में परिवहन की चुनौती
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फंसे लोगों को भेजने में परिवहन की चुनौती

बीएस संवाददाता / लखनऊ/बेंगलूरु/मुंबई/कोलकाता/चेन्नई/अहमदाबाद/नई दिल्ली 04 30, 2020

केंद्र सरकार की तरफ से फंसे लोगों की मदद के लिए अंतरराज्यीय आवाजाही की प्रक्रिया तय करने और नोडल अधिकारी चिह्नित करने पर राज्य सरकारों ने सवाल उठाया है। केंद्र ने फंसे प्रवासी कामगारों, छात्रों, तीर्थयात्रियों आदि को एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचाने के लिए केवल बसों के इस्तेमाल की योजना बनाई है। इसी पर राज्यों को आपत्ति है। उनकी मांग है कि इसके लिए ट्रेन चलाई जानी चाहिए।

राज्य सरकारों ने कहा कि भयंकर गर्मी में सड़क के रास्ते बसों से हजारों लोगों को लाने-ले जाने में लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समस्या केवल यात्रा के दौरान सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इतनी बड़ी तादाद में बसों की व्यवस्था करना भी है क्योंकि ऐसे लोगों की संख्या बहुत बड़ी है। वहीं यात्रा के दौरान उनके लिए खान-पान की व्यवस्था भी करनी होगी। इस यात्रा में दो या तीन दिन से अधिक भी समय लग सकता है।

राज्यों ने कहा कि उन्हें न केवल यात्रा बल्कि आने वाले लोगों के लिए उपयुक्त क्वारंटीन सुविधा तलाशने में भी कड़ी जद्दोजदह करनी होगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने प्रशासन से कहा है कि राज्य में लौटने वाले 10 लाख कामगारों के लिए क्वारंटीन और खाने की व्यवस्था की जाए।

देश में 26,476 राहत शिविरों में 10.4 लाख कामगार रह रहे हैं। केंद्र सरकार ने हाल में उच्चतम न्यायालय में यह आंकड़ा पेश किया था। हालांकि ये अनुमान वास्तविक आंकड़े से कम हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि अकेले लुधियाना में ही सात लाख से अधिक प्रवासी कामगार हैं। उन्होंने कहा कि पूरे पंजाब में कृषि एवं उद्योगों में 10 लाख से अधिक प्रवासी कामगार काम करते हैं। इनमें से 70 फीसदी बिहार के हैं। उन्होंने कहा, 'इतने अधिक लोगों को केवल ट्रेनों से ही भेजना संभव है और प्रस्थान के समय उचित जांच की जा सकती है।' उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि रेलवे को एक निश्चित स्थान से दूसरे निश्चित स्थान तक विशेष ट्रेन चलानी चाहिए।

बिहार के एक मंत्री ने भी कहा कि उनके राज्य के सामने लॉजिस्टिक बड़ी चुनौती है। बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, 'अगर हम सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हैं तो विभिन्न राज्यों में फंसे बिहार के 25 लाख पंजीकृत श्रमिकों को लाने के लिए करीब 1.7 लाख बसों की जरूरत होगी।' उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के लिए प्रवासी कामगारों को वापस लाने के लिए स्थितियां अनुकूल नहीं हैं।

सिंह ने अपने पत्र में कहा कि पंजाब में ज्यादातर प्रवासी कामगारों की नौकरी चली गई है या लॉकडाउन की वजह से काम नहीं मिल पा रहा है।

राज्य सरकारों ने मानक परिचालन प्रक्रियाएं जारी की हैं और जिलास्तरीय नोडल अधिकारियों को उन प्रवासी कामगारों और अन्य का ब्योरा तैयार करने का जिम्मा सौंपा है, जो अपने राज्य में वापस लौटना चाहते हैं। महाराष्ट्र में राहत शिविरों में करीब 17 लाख कामगारों को रोजाना खाना-पीना दिया जा रहा है। इनमेें से कुछ राज्य के ही कामगार हैं। जिलाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है और जो लोग अपने राज्य वापस जाना चाहते हैं उन्हें जिलाधिकारियों के पास खुद को पंजीकृत कराना होगा। महाराष्ट्र के एसओपी ने कहा कि किसी भी समूह को तब तक जाने की मंजूरी नहीं दी जाएगी, जब तक उनके पास प्राप्तकर्ता राज्य या जिला प्रशासन का उचित पत्र नहीं होगा। महाराष्ट्र के करीब 12,000 से 15,000 निवासी राज्य के बाहर फंसे हुए हैं और वे अपने घर लौटना चाहते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उनके राज्य के छह लाख से अधिक प्रवासियों ने घर लौटने के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा, 'सुदूर जगहों से आवाजाही के लिए विशेष ट्रेनों की जरूरत है। हमने इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।'

केंद्र के प्रवासियों को अंतर-राज्यीय आवाजाही की मंजूरी की घोषणा से प्रवासी कामगारों का पलायन शुरू हुआ है। इसके चलते जब महाराष्ट्र से हजारों कामगारों ने मध्य प्रदेश की सीमा में घुसने की कोशिश की तो उन्हें रोका गया। वे अब राष्ट्रीय राजमार्ग 3 पर मुंबई-बरवाणी के बीच सेंधवा के पास फंसे हुए हैं। 

दिल्ली सरकार ने कहा कि वह दूसरे राज्यों के लोगों की आवाजाही के कायदे-कानून को अंतिम रूप दे रही है। उसने लोगों से इस योजना की घोषणा तक इंतजार करने की अपील की है।

उत्तर प्रदेश ने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के लिए 100 बसें भेजीं ताकि 3,000 लोगों को वापस लाया जा सके। उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त प्रमुख सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने इसके साथ ही बताया कि 40 बसों में बिठाकर मध्य प्रदेश के लोगों को भेजा भी गया है।

तेलंगाना के मंत्री तलासनी श्रीनिवास यादव ने कहा कि विभिन्न राज्यों में 2 करोड़ से भी अधिक निवासी फंसे हुए हैं लेकिन इन लोगों को उनके राज्य भेजे जाने के बारे में केंद्र के निर्देश समुचित नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'लोग गर्मी के इस मौसम में किस तरह से तीन-चार दिनों तक बसों में सफर कर पाएंगे? बसों की तुलना ट्रेन कहीं बेहतर साधन होतीं।'

उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि पांच लाख से अधिक प्रवासी मजदूर पहले ही लौट चुके हैं लेकिन अब भी करीब 10 लाख लोग दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। राज्य ने हाल ही में राजस्थान के कोटा में फंसे 11,500 छात्रों को बुलाया है।

गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) दूसरे राज्यों में भेजी जाने वाली बसों के बारे में राज्य सरकार से आदेश मिलने का इंतजार कर रहा है। निगम के बेड़े में करीब 7,500 बसें हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने बताया कि दूसरे राज्यों से 20,000 से अधिक लोग वापस लाए जा चुके हैं।

पश्चिम बंगाल सरकार ने कोटा में फंसे करीब 2,500 छात्रों को वापस बुलाने का फैसला किया है। इन छात्रों से भरी 101 बसें बंगाल के लिए रवाना भी हो चुकी हैं। राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने बताया कि फंसे छात्रों एवं श्रमिकों को निकालने का फैसला सूक्ष्म स्तर पर लिया गया है। लेकिन उनका मानना है कि प्रवासी मजदूरों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने की इजाजत देने से लॉकडाउन का असली मकसद ही धराशायी हो जाएगा क्योंकि राज्यों को पता ही नहीं होगा कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं? इसका नतीजा काफी खराब होगा।

तमिलनाडु सरकार भी अपने यहां फंसे दूसरे राज्यों के कामगारों को वापस भेजने की इच्छुक है। हालांकि राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढऩे के पहले गाडिय़ों के बंदोबस्त को लेकर केंद्र सरकार से पूरी तरह स्पष्ट दिशानिर्देश आने की उम्मीद कर रही है। राज्य के प्रमुख होजरी उत्पादक शहर तिरुपुर में ही अकेले 2 लाख प्रवासी मजदूर हैं जबकि चेन्नई में इनकी संख्या 1.34 लाख है। कांचीपुरम जिले में भी करीब 38,000 प्रवासी मजदूरों की मौजूदगी बताई जा रही है।

कर्नाटक सरकार ने भी तय किया है कि अपने गृह राज्य लौटने की इच्छा रखने वाले प्रवासी कामगारों को जाने की एकबार छूट दी जाए। कर्नाटक के मंत्री जे सी मधुस्वामी ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा, 'हमने अंतर-राज्य परिवहन की अनुमति देने का फैसला किया है जो खास तौर पर छात्रों एवं प्रवासी मजदूरों के लिए है। हम केवल एक बार ही ऐसी अनुमति देंगे और वह केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप होगा।'

इस बीच नांदेड़ से करीब 3,600 श्रद्धालु और कोटा से 153 छात्र पंजाब पहुंच गए।

(वीरेंद्र सिंह रावत/समरीन अहमद/अनीश फडणीस/अभिषेक रक्षित/टी ई नरसिम्हन/विनय उमरजी और अर्चिस मोहन)

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