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उद्योगों को प्रोत्साहन पैकेज देना एजेंडे में नहीं

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली April 30, 2020

सरकार के भीतर कई दौर की चर्चाओं के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस हफ्ते दूसरे दौर की प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा कर सकती हैं। यह प्रोत्साहन समाज के सर्वाधिक प्रभावित वर्ग के लिए होगी। 

दूसरे दौर के प्रोत्साहन के लाभार्थी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, किसान, महिलाएं, गरीब, प्रवासी मजदूर और समाज के दूसरे वंचित तबके हो सकते हैं। 

हालांकि, विमानन, आतिथ्य, वाहन, रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और अन्य उद्योग जो सरकार से समर्थन की मांग कर रहे हैं और लॉकडाउन से सबसे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, उन्हें फिलहाल इंतजार करना होगा। अधिकारियों ने कहा कि इन क्षेत्रों और बड़े उद्योगों के लिए कोई सहायता आगे चलकर ही दी जा सकती है जब अर्थव्यवस्था कुछ हद तक सामान्य हो जाएगी।

सरकार के भीतर प्रोत्साहन को लेकर चर्चाओं में शामिल रहे एक अधिकारी ने कहा, 'सरकार के लिए राजनीतिक मजबूरियां हैं। किसी तरह का गलत संदेश नहीं जाना चाहिए। सरकार स्पष्ट रूप से बड़े उद्योगों के साथ खड़ी नजर नहीं आ सकती है। उसे जनता के साथ दिखना चाहिए। लिहाजा अब ध्यान में आम जनता और छोटे कारोबारी हैं।'  अनुमानित उपायों में एमएसएमई के लिए एक नई ऋण गारंटी योजना, और नकदी व खाद्य अंतरण हो सकता है। मनरेगा भुगतानों में एक बार और वृद्धि की उम्मीद जताई गई है और पीएम किसान योजना के तहत राशि आवंटन में और अधिक तेजी लाई जा सकती है।

एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले हफ्ते कहा था कि सरकार एमएसएमई के लिए शीघ्र ही 1 लाख करोड़ रुपये के सक्रिय कोष की स्थापना कर सकती है ताकि छोटे कारोबारों के लिए अत्यंत जरूरी नकदी मुहैया कराई जा सके। 

सरकार का विचार है कि जहां तक उद्योग का प्रश्न है आगे चलकर उनको उबारने वाले उपायों की घोषणा की जा सकती है। अधिकारी ने कहा, 'फिलहाल के लिए ध्यान स्वास्थ्य क्षेत्र पर है। आर्थिक ध्यान समाज के सबसे गरीब तबकों पर रहना चाहिए। जैसे जैसे वित्त क्षेत्र स्थायी होता जाएगा, लॉकडाउन के हटने और आर्थिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हलचल शुरू होने पर दूसरे क्षेत्रों की सहायता की जा सकती है।'

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