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म्युचुअल फंडों से निवेश निकासी जारी

जश कृपलानी / मुंबई April 30, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा म्युचुअल फंड उद्योग की समस्याओं के समाधान के तौर पर तरलता पेश किए जाने से भी अधिक राहत नहीं मिल सकेगी। उद्योग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि मंगलवार को क्रेडिट रिस्क फंडों के परिसंपत्ति आधार में 11 फीसदी की गिरावट आई और इसमें 4,869 करोड़ रुपये की कमी आई।

क्रेडिट रिस्क फंड के अलावा, कर्ज से जुड़ी दूसरी श्रेणियां भी पहले से ही दबाव में हैं। मंगलवार को मध्यम अवधि के फंड का परिसंपत्ति आधार भी छह फीसदी या 1,479 करोड़ रुपये घट गया। कम अवधि की श्रेणी के लिए परिसंपत्ति आधार 3.13 फीसदी या 2,475 करोड़ रुपये घटा।

फ्रैंकलिन टेम्पलटन (एफटी) एमएफ द्वारा छह एमएफ योजनाओं को बंद करने के बाद सोमवार को आरबीआई ने एमएफ उद्योग के लिए 50,000 करोड़ रुपये की तरलता उपलब्ध कराई थी। इस कदम का उद्देश्य जोखिमों को दूर करना तथा निवेशकों में विश्वास बहाल करना भी था।

मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट के निदेशक (फंड रिसर्च) कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा, तरलता पर आरबीआई के कदम से निवेशकों को थोड़ी राहत दी है। हालांकि मध्यम अवधि की क्रेडिट जोखिम जैसी श्रेणियों में चिंता बनी रह सकती है।

एफटी एमएफ द्वारा छह योजनाओं को बंद करने की घोषणा के बाद से इस क्षेत्र में तेज गिरावट देखने को मिली है। आंकड़े बताते हैं कि 23 अप्रैल को इस घोषणा के बाद से क्रेडिट रिस्क फंड का परिसंपत्ति आकार 18.7 फीसदी (9,066 करोड़ रुपये) कम हो गया है। मध्यम अवधि की योजनाओं में यह गिरावट 11.5 फीसदी (2,948 करोड़ रुपये) रहा। साथ ही, कम अवधि के क्रेडिट रिस्क फंड का परिसंपत्ति आकार 5.6 फीसदी या 2,475 करोड़ रुपये कम हो गया।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंक द्वारा म्युचुअल फंड के लिए स्थायी तरलता सुविधा (एसएलएफ एमएफ) में विस्तार के सिर्फ दो दिनों के भीतर इससे 4,000 करोड़ रुपये निकाल लिए गए हैं।

एक फंड मैनेजर ने कहा, इससे पता चलता है कि परिसंपत्तियों पर दबाव जारी है और बाजारों में तरलता के चलते एमएफ को उधारी के विकल्प के साथ बने रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, फ्रैंकलिन टेम्पलटन के कदम से निश्चित आय वर्ग श्रेणी के सामने जोखिम बढ़ गया है। इससे पहले, एमएफ उद्योग ने यह कहकर निवेशकों की चिंताओं को कम करने की कोशिश की थी कि मार्च के बाद से ही इन योजनाओं में उधारी काफी कम हो गई थी। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया ने बताया कि 23 अप्रैल 2020 तक उद्योग की उधारी 4,427 करोड़ रुपये घट गई थी।

इस बीच, बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई द्वारा तरलता संबंधी कदम उठाने के बाद भी सभी एमएफ के लिए उधारी आसान नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, हो सकता है कि एमएफ द्वारा रखे गए वाणिज्यिक पत्रों या डिबेंचर की सीधी खरीद के लिए बैंक उत्सुक न हों, जब तक कि एमएफ किसी तरह की छूट या बराबर मूल्य पर बेचने के लिए तैयार नहीं होते।

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