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कंपनियों का आकलन ग्राहकों का बदलता मन

सुरजीत दास गुप्ता /  April 29, 2020

इस समय कंपनियों और उनके उत्पाद बेचने वाले कारोबारियों के मन में बार-बार एक ही प्रश्न आ रहा है कि कोविड-19 संकट के बाद उपभोक्ताओं का व्यवहार किस तरह बदलेगा? उनके जेहन में एक दूसरा अहम सवाल यह भी आ रहा है कि उपभोक्ताओं के व्यवहार एवं उनके मिजाज में आने वाले बदलाव से आखिरकार कैसे निपटा जाएगा।

फिलहाल इतना तो तय है कि एक बार कोविड-19 खत्म होने या कम से कम इसकी आंच कम होने के बाद उपभोक्ताओं की जेब में खर्च करने लायक बहुत अधिक रकम नहीं बचेगी। उपभोक्ताओं का मिजाज भांपने के लिए मैकिंजी ऐंड कंपनी ने 10 से 12 अप्रैल के बीच एक सर्वेक्षण किया था। इस सर्वेक्षण के अनुसार करीब 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे खर्च में कटौती करेंगे, जबकि 52 प्रतिशत से अधिक लोगों का मानना था कि उनकी नौकरियां सुरक्षित नहीं होने का अंदेशा सता रहा था। करीब 85 प्रतिशत लोग अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे।

इन बातों से स्पष्ट है कि उपभोक्ता फैशन या सैर-सपाटे के बजाय सुरक्षा से जुड़ी वस्तुओं जैसे हैंड सैनिटाइजर, फेस मास्क और प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने वाली चीजें खरीदने पर अधिक ध्यान देंगे। उनके पास इन जरूरतों को पूरा करने के बाद जो थोड़ी बहुत रकम बचेगी उनका इस्तेमाल वह दुकान या मॉल के बजाय ऑनलाइन माध्यम से खर्च करने को तरजीह देंगे। वाहन उद्योग की बात करें तो उन्हें मौजूदा समय में चुनौतियां तो दिख रही हैं, लेकिन साथ ही कई अवसर भी दिख रहे हैं। स्कोडा ऑटो इंडिया में ब्रांड निदेशक जैक होलिस कहते हैं, 'कोविड-19 संकट के बाद लोग सार्वजनिक परिवहनों का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी सुरक्षा के लिए निजी वाहन का इंतजाम करेंगे। हालांकि लोगों पर वित्तीय दबाव भी रहेगा, इसलिए नए वाहन के लिए मासिक किस्त (ईएमआई) भरना उनके लिए मुनासिब नहीं होगा। इससे बचने के लिए कई लोग नए वाहन खरीदने के बजाय पुराने वाहन खरीदेंगे।'

स्कोडा उन बीमा कंपनियों से बात कर रही है, जो कुछ महीनों तक प्रीमियम के तौर पर छोटी रकम लेकर मासिक किस्त का बीमा कर सकती हैं। लोगों की नौकरी जाने या वेतन में भारी कटौती की आशंका के कारण ऐसी नौबत आ सकती है जब उनकेपास ईएमआई भरने के लिए रकम नहीं बचेगी।

होलिस को लगता है कि इससे कंपनी को कारोबार बरकरार रखने में मदद मिलेगी। एक अन्य एजेंसी कैंटार ने भी उपभोक्ताओं का मन टटोलने के लिए देश के 19 शहरों में सर्वेक्षण किया है। इसके अनुसार करीब 32 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह अपने निजी वाहन-कार या स्कूटर-का इस्तेमाल अधिक करेंगे। करीब 76 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे उबर या ओला जैसी टैक्सी सेवाओं का इस्तेमाल नहीं करेंगे या इसमें खासी कमी करेंगे। सामाजिक दूरी बरतने पर अब विशेष जोर दिया जाने लगा है, जिससे उबर एवं ओला जैसी कंपनियों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। उबर के अधिकारियों ने माना कि कोविड-19 संकट समाप्त होने के बाद भी लोग कार-पूलिंग से दूर ही रहेंगे।

उबर में प्रमुख, सेंट्रल ऑपरेशंस, इंडिया एवं साउथ एशिया, पवन वैश ने कहा, 'हमें पता है कि लोग किसी सेवा के लिए अधिक कीमतें चुकाने की स्थिति में नहीं होंगे। लगभग सभी लोग इस समय कठिन आर्थिक हालात से गुजर रहे हैं, इसलिए हम उन्हें अपने साथ बनाए रखने की पूरी कोशिश करेंगे।' कोविड-19 के बाद बदले परिवेश में डिजिटल माध्यमों की तरफ  लोगों का रुझान बढऩा लगभग तय लग रहा है। ऐसे में ई-कॉमर्स, ओटीटी या ऑनलाइन शिक्षा का दबदबा बढ़ेगा।

गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स में प्रबंध निदेशक विवेक गंभीर कहते हैं-एफएमसीजी खंडों में खासा बदलाव आएगा। पहले केवल नई पीढ़ी के लोग ऑनलाइन माध्यम से खरीदारी कर रहे थे अब पुरानी पीढ़ी भी इस ओर मुड़ेगी। सैशे या बडे पैकेट में सामान की मांग अधिक बढेगी।' गंभीर ने कहा कि उनकी कंपनी ने ई-कॉमर्स पर केंद्रित एक अलग कारोबारी इकाई तैयार की है। उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी इस इकाई में उत्पादों का दायरा बढ़ाएगी और सौंदर्य प्रसाधन, एयर फ्रेशनर और लिक्विड डिटर्जेंट जैसे उत्पाद शामिल करेगी। उपभोक्ता स्वास्थ्य को सबसे अधिक तवज्जो देंगे। डाबर में मुख्य कार्याधिकारी मोहित मल्होत्रा का कहना है कि स्वास्थ्य के दृष्टिïकोण से उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव आ सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े उत्पादों जैसे च्यवनप्राश, शहद, प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने वाले एवं व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े उत्पादों में 30 से 40 प्रतिशत तेजी आएगी।

लोगों की खान-पान की आदतों पर भी असर पड़ेगा। नेस्ले इंडिया के मुख्य प्रबंध निदेशक सुरेश नारायण ने कहा कि वायरस संकट खत्म होने के बाद एक नया माहौल दिखेगा। उन्होंने कहा कि घर से काम करने का चलन बढऩे के बाद लोग अपने घरों में ही खान-पान का लुत्फ उठाना पसंद करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार उपभोक्ता वस्तुओं का कारोबार थोड़ा थम सकता है। उनके अनुसार लोग अब सस्ते उत्पाद खरीदने पर अधिक जोर दे सकते हैं।

Keyword: EMI, FMCG, Brands, Survey, Lockdown, Covid-19, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, देशबंदी, एफएमसीजी, मैकिंजी ऐंड कंपनी, सर्वेक्षण,
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