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छोटे डेवलपरों के अस्तित्व पर संकट, बड़े ब्रांड की बढ़ेगी धमक

राघवेंद्र कामत और समरीन अहमद / मुंबई/बेंगलूरु April 28, 2020

बेंगलूरु के रियल एस्टेट डेवलपर अविनाश रेड्डी इस कारोबार में करीब 13 साल से हैं। वह अपने जीवन की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक को विकसित करने के लिए एक भूखंड के मालिक से बात कर रहे थे। यह बेंगलूरु में हवाई अड्डे के नजदीक पांच एकड़ की एक विला परियोजना थी, जो लॉकडाउन के दौरान रुक गई।

रेड्डी ने कहा, 'हम इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करना चाहते थे क्योंकि यह हवाई अड्डे के नजदीक है और हमें इसमें बहुत संभावनाएं नजर आ रही थीं।' मगर अब उन्हें हालात सामान्य होने का इंतजार करना पड़ेगा। उनका मानना है कि मौजूदा हालात अगले कुछ महीनों तक बने रहेंगे, इसलिए उन्होंने निकट भविष्य में नई परियोजनाएं शुरू करने की सभी योजनाएं रद्द कर दी हैं।

रेड्डी ने कहा, 'हमने कर्ज लौटाने में मोहलत लेने का विकल्प चुना था, जिससे हमें अगले कुछ महीने निकालने में मदद मिलेगी। इसके अलावा विकास प्रबंधन करार सबसे अधिक बुद्धिमानी की चीज होगी, जिससे वजूद बनाए रखने में मदद मिलेगी।' उनकी कंपनी व्याप्त की बिक्री मार्च तिमाही में 80 फीसदी घटी है।

मुंबई के एक मझोले आकार के डेवलपर ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए बताया कि यह उनके कारोबार का सबसे मुश्किल समय है। उन्होंने निराशा के साथ कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अगले कुछ महीनों लोग खरीदारी के लिए आएंगे। कर्ज लौटाने में मोहलत से अब मदद मिलेगी, मगर हमें अगली तिमाही में भुगतान करना होगा।' वह कहते हैं कि उन्हें या तो किसी बड़े डेवलपर के साथ संयुक्त उद्यम बनाना होगा या खुद का वजूद गंवाना होगा।

यह हालात केवल इन दो डेवलपरों की ही नहीं है बल्कि बहुत से छोटे और मझोले डेवलपरों का वजूद दांव पर लगा हुआ है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से बिक्री थम गई है और हर गुजरते महीने के साथ उनका कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। लॉकडाउन के बाद भी उनकी हालत कम से कम इस साल तक सुधरने के आसार नहीं हैं।

इस उद्योग से जुड़े बहुत से लोगों का मानना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में वर्ष 2012 से हो रहा एकीकरण और तेज होगा। छोटे डेवलपर कारोबार से बाहर हो जाएंगे और बड़े नाम इस क्षेत्र में आएंगे।

रियल एस्टेट के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली कंपनी प्रॉपइक्विटी ने पिछले साल कहा था कि देश में वर्ष 2011-12 में जितने डेवलपर थे, उनमें से 50 फीसदी से अधिक वर्ष 2017-18 तक यह बाजार छोड़ चुके हैं। गुरुग्राम जैसे शहरों में 70 से 80 फीसदी डेवलपर इस बाजार से बाहर हो गए हैं। इनमें से बहुत से डेवलपर नोटबंदी, रेरा, जीएसटी और एनबीएफसी क्षेत्र में वित्तीय संकट के असर और कारोबार गैर-लाभकारी बन जाने के कारण निकले हैं।

प्रॉपइक्विटी ने कहा कि इस एकीकरण की वजह से देश के नौ बड़े शहरों में मौजूद शीर्ष 10 डेवलपरों की हिस्सेदारी बिक्री और नर्ई परियोजनाएं शुरू करने के लिहाज से बढ़ी है। इसके संस्थापक समीर जसूजा का मानना है कि कोरोनावायरस और लॉकडाउन की वजह से 10 से 20 फीसदी और डेवलपर प्रभावित होंगे।

मोतीलाल ओसवाल रियल एस्टेट के निदेशक और सीईओ शरद मित्तल ने कहा, 'आम तौर पर छोटे एवं मझोले डेवलपरों के लिए नकदी की उपलब्धता बड़े डेवलपरों की तुलना में ज्यादा बड़ी चुनौती बनेगी। इसकी वजह यह है कि लॉकडाउन और उसके बाद के महीनों में नकदी आवक न होने से वे लागत का भार उठाने की स्थिति में नहीं होंगे।'


बड़े शहरों में ओबेरॉय रियल्टी जैसे बड़े ब्रांडों को पहले ही फायदा मिलने लगा है। उनके पास छोटे डेवलपरों की तरफ से बहुत से संयुक्त उद्यम और संयुक्त विकास के प्रस्ताव आ रहे हैं।

कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक विकास ओबेरॉय ने कहा, 'केवल वही डेवलपर अपना वजूद बचा पाएंगे, जो पैसे का सोच-समझकर इस्तेमाल करते हैं, जिन पर कर्ज का बोझ नहीं है और जिन्होंने राजस्व अनुशासन और ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित किया है।'

कंपनी पहले ही जेवी और जेडी के प्रस्तावों पर सौदेबाजी कर रही है। ओबेरॉय ने कहा, 'ये प्रस्ताव मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से आ रहे हैं, जिन्होंने इन परियोजनाओं में निवेश किया है। ये परियोजनाएं वित्तीय कुप्रबंधन या कमजोर ब्रांडों की वजह से अटकी हुई हैं।'

मुंबई के वाधवा समूह के चेयरमैन विजय वाधवा ने कहा, 'हमें अन्य डेवलपरों से प्रस्ताव मिले हैं। हमने उन्हें लॉकडाउन हटने तक इंतजार करने को कहा है।'

रियल एस्टेट क्षेत्र में इसके पहले भी हालात काफी खराब रहे हैं। इस कैलेंडर वर्ष की जनवरी-मार्च तिमाही में देश के बड़े शहरों में आवासीय संपत्तियों की बिक्री में करीब 30 फीसदी गिरावट रही। प्रॉपर्टी सलाहकार जेएलएल इंडिया का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में आवासीय संपत्तियों की तिमाही बिक्री के ये दूसरे सबसे खराब आंकड़े हैं। इसके पहले वर्ष 2017 की पहली तिमाही में नोटबंदी के प्रभाव के चलते 37 फीसदी की जबरदस्त गिरावट रही थी।

अग्रणी डेवलपर एनारॉक का मानना है कि कोविड महामारी के दुष्प्रभावों से इस कैलेंडर वर्ष में फ्लैटों की बिक्री 25-30 फीसदी तक गिर सकती है।

वहीं हीरानंदानी समूह के प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी के मुताबिक वित्तीय रूप से सक्षम कंपनियों को आने वाले दिनों में कहीं अधिक बड़ी भूमिका निभानी होगी। हीरानंदानी कहते हैं, 'सकारात्मक शुद्ध हैसियत वाली कंपनियों को मुश्किल हालात से गुजर रही कंपनियों से नए अवसर मिलने की स्थितियां बनेंगी। लॉकडाउन खत्म होने के बाद उद्योग में अलग बाजारों एवं संवर्गों में नए खिलाड़ी उभरने की पूरी संभावना है।'

एनारॉक कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी शोभित अग्रवाल का मानना है कि कोविड-19 महामारी के दबाव ऐसे हैं कि डेवलपरों को इससे उबरने के लिए मजबूत बैलेंस शीट की जरूरत होगी। अग्रवाल कहते हैं, 'खुद को सशक्त बनाने के जो प्रयास पहले से जारी थे, अब उनमें तेजी देखने को मिलेगी।'

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