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रिजर्व बैंक ने एमएफ के लिए खोली तिजोरी

जश कृपलानी और अनूप रॉय / मुंबई April 27, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने म्युचुअल फंडों के लिए 50,000 करोड़ रुपये की विशेष तरलता सुविधा शुरू की है। इससे म्युचुअल फंड उद्योग को ऐसे समय ऋण सुविधा मिल पाएगी, जब फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्युचुअल फंड के छह योजनाओं को बंद करने से उस पर निकासी (रिडेंप्शन) का भारी दबाव है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि कुछ डेट म्युचुअल फंड योजनाओं के बंद होने का अन्य फंडों पर भी असर पडऩे के आसार हैं। इससे निकासी का दबाव बढ़ा है, जिससे उद्योग के सामने तरलता का संकट पैदा हो रहा है। आरबीआई ने सोमवार को अपने बयान में कहा, 'हालांकि दबाव फिलहाल अधिक जोखिम वाले डेट म्युचुअल फंड तक सीमित है। शेष उद्योग के पास पर्याप्त नकदी है।'

आरबीआई की यह सुविधा 27 अप्रैल से शुरू हो जाएगी। इसमें म्युचुअल फंड नकदी हासिल कर सकेंगे। बैंक आरबीआई से म्युचुअल फंडों के लिए वैधानिक तरलता सुविधा (एसएलएफ-एमएफ) के तहत धनराशि उधार ले सकते हैं और म्युचुअल फंडों को उनकी डेट प्रतिभूतियां गिरवी रखकर या उनके वाणिज्यिक पत्र या कॉरपोरेट डिबेंचर खरीदकर ऋण दे सकते हैं। डेट योजनाओं में मार्च 2020 में 1.9 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई है। क्रेडिट आधारित श्रेणियों में अप्रैल में भी निकासी जारी है। आंकड़ों के मुताबिक क्रेडिट रिस्क फंड श्रेणी की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) अप्रैल में 12 फीसदी और घटकर 58,392 करोड़ रुपये पर आ गया है। इसके बाद मीडियम ड्यूरेशन फंडोंं का एयूएम अप्रैल में 9 फीसदी और घटकर 25,502 करोड़ रुपये पर आ गया है।

उद्योग के विशेषज्ञों ने आरबीआई की ऋण सुविधा का अति आवश्यक मदद के रूप में स्वागत किया है। उनका कहना है कि फ्रैंकलिन टेम्पलटन के अचानक छह क्रेडिट आधारित योजनाओं को बंद करने से निकासी का दबाव और बढऩे के आसार थे।

कोटक म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक और एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के चेयरमैन नीलेश शाह ने कहा, 'हम आरबीआई की पहल का स्वागत करते हैं। यह केंद्रीय बैंक की तरफ से भरोसा बहाल करने का अच्छा उपाय है। इससे निवेशकों का म्युचुअल फंड उद्योग में भरोसा बना रहेगा और बाजार भी सामान्य रूप से काम करते रहेंगे।'

इस पहल को कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में भी सकारात्मक रूप में देखा गया है, जहां इस घोषणा के बाद कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल 10 से 15 अंक गिर गया। एक फंड प्रबंधक ने कहा, 'डेट म्युचुअल फंडों से निकासी का कंपनियों की उधारी लागत पर भी असर पड़ेगा क्योंकि इस खंड में म्युचुअल फंडों का अच्छा दबदबा है।' आरबीआई की एसएलएफ-एमएफ सुविधा के तहत केंद्रीय बैंक निश्चित रीपो दर पर 90 दिन के लिए ऋण मुहैया कराएगा। एसएलएफ-एमएफ एक खुली सुविधा है और बैंक फंड हासिल करने के लिए सोमवार से शुक्रवार तक अपनी बोलियां सौंप सकते हैं। यह योजना 11 मई 2020 तक या आवंटित धनराशि का उपयोग (जो भी जल्द होगा) होने तक उपलब्ध है। आरबीआई बाजार की स्थितियों के आधार पर समयसीमा और राशि की समीक्षा करेगा।

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