बिजनेस स्टैंडर्ड - आभूषण उद्योग के लिए सुस्त रही अक्षय तृतीया
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आभूषण उद्योग के लिए सुस्त रही अक्षय तृतीया

राजेश भयानी / मुंबई 04 27, 2020

सराफा उद्योग से लंबे समय से जुड़े और इस उद्योग की शीर्ष संस्था इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी ने कहा, 'मैं सराफा उद्योग से 42 साल से जुड़ा हूं। मैंने इन चार दशकों में बहुत से आर्थिक संकट और उतार एवं चढ़ाव के दौर देखे हैं। मगर अक्षय तृतीया का त्योहार कभी इतना सुस्त नहीं रहा, जब लोग डर में जकड़े हैं और देश भर में दुकानें बंद हैं। यहां तक कि सोने के आयात को नियंत्रित करने के समय भी ऐसे हालात नहीं रहे।'

कोरोनावायरस के हमले की वजह से देश में मार्च के आखिरी सप्ताह से लॉकडाउन है। ऐसे में आभूषण और सोना सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। वहीं जिन निवेशकों के पास नकदी है, वे सोने के अलावा अन्य कोई परिसंपत्ति नहीं खरीदना चाहते हैं। भले ही ऐसे निवेशकों की संख्या बहुत अधिक नहीं हो मगर वे यह जानते हैं कि सोना ही एक ऐसी संपत्ति है, जो संकट के समय में अच्छा प्रतिफल दे सकती है। सोने की कीमतें लंबे समय तक एक सीमित दायरे में बनी रहीं। मगर पिछले साल जिन लोगों ने सोना खरीदा था, उन्होंने 47.7 फीसदी प्रतिफल कमाया है। यह वर्ष 2005 के बाद सबसे अधिक है।

उद्योग का अनुमान है कि पिछले साल अक्षय तृतीया पर 30 टन से अधिक सोना बिका था। कोठारी ने कहा कि इस साल शादियां भी टाली गई हैं। केवल अक्षय तृतीया के दिन ही देश में 10 लाख से अधिक शादियां होती हैं। अब शादियों का सीजन दीवाली के बाद ही आएगा। ऑनलाइन बिक्री का हिस्सा बहुत कम है।

यहां तक कि टाइटन जैसी संगठित खुदरा आभूषण शृंखला का भी यही मत है। टाइटन की आभूषण इकाई के सीईओ अजय चावला ने कहा, 'ऐसी अक्षय तृतीया पिछले 26 वर्षों में कभी नहीं रही। हमारे सभी 328 तनिष्क स्टोर बंद हैं, इसलिए हमें अपने ग्राहकों से टेलीफोन और डिजिटल रूप से संपर्क करना पड़ा। हमारा कारोबार तनिष्ट डॉट कॉम पर खुला है और ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर दे सकते हैं। हालांकि हम जो ऑर्डर ले रहे हैं, उनकी डिलिवरी सरकार ई-कॉमर्स डिलिवरी को मंजूरी देने के बाद मई के पहले सप्ताह में होगी।'

उन्होंने कहा रोचक चीज यह है, 'पिछले एक सप्ताह में ऑनलाइन पोर्टल पर आने वाले लोगों की संख्या शानदार रही है। हमारे पोर्टल पर करीब 10 लाख से अधिक लोग आए हैं। यह इस बात का संकेत है कि मौजूदा हालातों के बावजूद तनिष्क में लोगों की बहुत रुचि है। इसमें परंपरा और सोने के निवेश मूल्य की अहम भूमिका है। अब हमारे ऑनलाइन पोर्टल पर पहले की तुलना में औसतन 2.5 गुना अधिक वजन के गहने खरीदे जा रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि परंपरागत ग्राहक इस शुभ मौके पर आभूषणों की ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं।'

इस बार अक्षय तृतीया पर अन्य संगठित आभूषण विक्रेता भी ऑनलाइन बिक्री का प्रयोग कर रहे हैं। डिजिटल सोने के प्लेटफॉर्म जैसे सेफ गोल्ड, ऑगमोंट, पेटीएम आदि डिजिटल सोने की पेशकश कर रहे हैं क्योंकि इनमें डिलिवरी की दिक्कत नहीं है। इन प्लेटफॉर्मों की न्यासी कंपनियां सोने को अपने पास रखती हैं।

उद्योग का अनुमान है कि आज हर तरह की ऑनलाइन बिक्री एक टन से अधिक नहीं होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 30 टन से अधिक बिक्री हुई थी। हालांकि यह रोचक चीज है कि ऑनलाइन पूछताछ करने वाले लोगों की संख्या में अहम बढ़ोतरी हुई है। इस उद्योग के बहुुत से अगुआओं का कहना है कि  ऑनलाइन पूछताछ से पता चलता है कि आगे आभूषण बिक्री का कैसा रुझान रहेगा। चावला ने कहा कि परंपरागत ग्राहक ऑनलाइन आ रहे हैं, जो एक अच्छा संकेत है। एमएमटीसी पैंप के एमडी और सीईओ विकास सिंह ने कहा, 'इस बार ई-अक्षय तृतीया है। डिजिटल सोना बेचने वाले प्लेटफॉर्मों से हमारे पास ज्यादा ऑर्डर आए हैं। हम इन प्लेटफॉर्मों को सोना मुहैया कराते हैं और उनके पक्ष में स्टोर भी करते हैं। इस बार इन प्लेटफॉर्मों की प्रतिक्रिया हाल फिलहाल और पिछले साल की तुलना में भी अधिक है। डिजिटल सोने का चलन बढ़ रहा है, विशेष रूप से नई युवा पीढ़ी में।' हालांकि डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्मों के नियमन से जुड़े मुद्दे बरकरार हैं। विश्व स्वर्ण परिषद के निदेशक (भारत) सोमसुंदरम पीआर ने कहा, 'सोने की ऊंची कीमतों, डिलिवरी में लॉजिस्टिक की अड़चनों, शादियों की तारीखों को लेकर अनिश्चितता, आय को लेकर फिक्र और लॉकडाउन से यह असामान्य समय है, जिससे सोने की मांग प्रभावित हो रही है। सेफगोल्ड और एमएमटीसी पैंप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक मामूली खरीद में मदद दे सकते हैं, मगर वे दुकानों की बिक्री का विकल्प नहीं बन सकते।'

उन्होंने कहा कि यह अक्षय तृतीया उद्योग में डिजिटल बदलाव ला सकती है। आज रविवार होना भी अक्षय तृतीया पर सोने की बिक्री में एक बाधा है। कोठारी ने कहा कि स्टॉक एक्सचेंज बंद होने से एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों के जरिये भी सोने की मांग नहीं आ पाई।

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