बिजनेस स्टैंडर्ड - आर्बिट्राज फंडों में मिले तरलता और प्रतिफल
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आर्बिट्राज फंडों में मिले तरलता और प्रतिफल

संजय कुमार सिंह /  April 27, 2020

 

निवेश के लिए फंडों की एक ऐसी श्रेणी है, जिसमें आम तौर पर बहुत कम जोखिम होता है और वह श्रेणी है आर्बिट्राज फंड। मगर मार्च के महीने में इस श्रेणी में भी जबरदस्त उतारचढ़ाव देखा गया और अच्छी खासी रकम इन फंडों से निकाली गई। उद्योग सूत्रों के मुताबिक इन फंडों से 27 मार्च तक करीब 32,000 करोड़ रुपये निकाले जा चुके थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इन फंडों में उतारचढ़ाव फिलहाल काफी कम हो गया है। हालांकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उतारचढ़ाव फिर नहीं होगा मगर इस श्रेणी में निवेशकों की रकम डूबने का खटका बहुत कम है।

इस श्रेणी के फंडों से पैसा निकाले जाने की बड़ी वजह यह थी कि वायदा में शेयरों के भाव नकद भाव से नीचे चले गए थे। आम तौर पर वायदा में कारोबार नकद के मुकाबले अधिक भाव पर होता है। लेकिन इसका उलटा होने के कारण फंड प्रबंधक आर्बिट्राज के मौकों का फायदा उठाकर मुनाफा नहीं कमा पाए। उनमें से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और टाटा एसेट जैसी कुछ कंपनियों ने मार्च के तीसरे-चौथे हफ्ते में करीब 7 से 10 दिन के लिए अपने फंडों में निवेश एकदम बंद कर दिया। टाटा एसेट मैनेजमेंट में मुख्य निवेश प्रबंधक - इक्विटीज राहुल सिंह ने कहा, 'अगर उस दौरान हमें बड़ी मात्रा में नकदी मिल जाती तो हम उसे मुनाफा कमाने के लिए इस्तेमाल नहीं कर पाते।'

सिंह ने वायदा और नकद में शेयरों के भाव का अंतर कम होने की वजह भी बताई। उन्होंने कहा, 'अंतर में कमी धारणा की वजह से आई थी। निफ्टी वायदा भी नकद के मुकाबले कम भाव पर चल रहा था। जब निवेशकों के बीच नकारात्मक धारणा है और बाजार में इतनी अधिक अनिश्चितता है तो नकद के मुकाबले वायदा श्रेणी में कुछ समय तक बिकवाली का ही बोलबाला रहेगा।'

मगर यह अंतर अब एक बार फिर सामान्य स्तर पर लौट आया है। वायदा में शेयरों का कारोबार नकद से अधिक भाव पर हो रहा है। यह देखकर आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और टाटा एएमसी ने अपने आर्बिट्राज फंड एक बार फिर निवेश के लिए खोल दिए हैं।

जिन खुदरा निवेशकों के पास नकदी पड़ी है मगर जो उतारचढ़ाव के इस दौर में नकदी को निवेश करने का जोखिम नहीं उठाना चाहते, वे उसे आर्बिट्राज फंडों में लगा सकते हैं। सिंह समझाते हैं, 'आप उम्मीद कर सकते हैं कि लंबी अवधि में आर्बिट्राज फंड लिक्विड फंडों के मुकाबले कम से कम 50 आधार अंक ज्यादा प्रतिफल आपको देंगे। अगर इनमें लिक्विड फंडों के बराबर प्रतिफल मिलता है तो भी निवेशकों को इन फंडों में कर के बाद बेहतर प्रतिफल हासिल होगा। इसकी वजह यह है कि लिक्विड फंडों पर इक्विटी के समान कर लगता है, इसलिए उनमें कर के बाद प्रतिफल कुछ कम हो जाता है।'

प्लेक्सस मैनेजमेंट सर्विसेज के मुख्य कार्य अधिकारी प्रसूनजित मुखर्जी कहते हैं कि लिक्विड फंडों से अल्पावधि पूंजीगत लाभ पर उसी दर से कर लगता है, जो निवेशक की कर श्रेणी की दर है यानी निवेशक को आम तौर पर जिस दर पर कर देना पड़ता है। उधर आर्बिट्राज फंड में 15 फीसदी की एकसमान दर से कर वसूला जाता है। इस तरह 20 फीसदी या उससे अधिक कर दर की श्रेणी में आने वाले निवेशकों के लिए इनमें निवेश करना फायदेमंद होता है। अगर आर्बिट्राज फंडों में निवेश को एक साल से अधिक समय तक बरकरार रखा जाता है तो कर की दर घटकर 10 फीसदी (1 लाख रुपये से अधिक पूंजीगत लाभ पर) रह जाती है।

इन फंडों में उतारचढ़ाव फिलहाल थम गया है, लेकिन दोबारा ऐसा होने लगा तो क्या होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि इन फंडों में नुकसान होने का खटका बहुत ही कम है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया में डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा, 'इन फंडों में फंड प्रबंधक प्रतिफल सुनिश्चित कर लेते हैं। वे शेयर खरीद लेते हैं और जब वायदा का भाव ऊंचा चल रहा होता है तो उन्हें बेच देते हैं। किसी एक महीने के भीतर उतारचढ़ाव हो सकता है। लेकिन अगर फंड प्रबंधक महीने के अंत तक निवेश बनाए रखता है तो उसे अनुमानित प्रतिफल मिल जाता है।'

बेलापुरकर के मुताबिक इस श्रेणी में सबसे बड़ा जोखिम यही होता है कि कभी-कभी ऐसे सौदे करने के लिए पर्याप्त मौके नहीं होते हैं। वह कहते हैं, 'अगर हाजिर बाजार की तुलना में वायदा बाजार में कीमतें बहुत अधिक नहीं हैं तो किसी महीने में प्रतिफल कम रह सकता है। लेकिन बाजार में हालात सामान्य रहने पर आप उचित प्रतिफल अर्जित कर सकते हैं, जो शेयरों को बनाए रखने की लागत के बराबर होता है।'

निवेशक बहुत कम जोखिम लेकर तरलता एवं प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए इन फंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें कर भी इक्विटी के समान है। बेलापुरकर ने कहा, 'लिक्विड फंडों में प्रतिफल इक_ïा होने का सिलसिला ज्यादा लंबा चलता है। यह भी सच है कि आर्बिट्राज फंडों में माह दर माह प्रतिफल में बहुत ज्यादा अंतर हो सकता है। लेकिन अगर आप उन्हें 9 से 1 2महीने रखते हैं तो आपको बेहतर प्रतिफल मिलेगा।'

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