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एटीएम शुल्क की चोट से कैसे बचें?

बिंदिशा सारंग /  April 27, 2020

भारत में बैंकों ने आपके लिए कई सहूलियतें दे दी हैं। लेकिन झंझट के बगैर एटीएम का इस्तेमाल करने की सहूलियत आपको नहीं मिल पाई है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में अपनी लोकपाल योजनाओं की वार्षिक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2018-19 में एटीएम या डेबिट कार्ड से जुड़ी 36,539 शिकायतें मिलीं, जबकि 2017-18 में केवल 24,672 शिकायतें मिली थीं। इसका मतलब है कि एक साल के भीतर इन शिकायतों में 48 फीसदी इजाफा हुआ। हालांकि भारत नकदरहित अर्थव्यवस्था बनने की पुरजोर कोशिश में जुटा है, लेकिन शिकायतों में इस तरह का इजाफा चिंता में डालने वाली बात है। एटीएम इस्तेमाल करने वाले हरेक ग्राहक को कुछ बातें जानना जरूरी है, जो उसे मुश्किलों से बचा सकती हैं।


रकम कटी मगर निकली नहीं

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी दिक्कत यही है। रिपोर्ट कहती है कि एटीएम और डेबिट कार्ड से जुड़ी शिकायतों में सबसे बड़ा हिस्सा 'खाते से रकम कटने मगर एटीएम से बाहर नहीं आने' का ही था। कुल 53 फीसदी शिकायतें इसी तरह की घटनाओं की थीं। कल्पना कीजिए कि आप एटीएम के सामने खड़े हैं, कार्ड मशीन में डालकर लेनदेन कर रहे हैं, आपको एसएमएस मिलता है कि रकम खाते से कट गई है, लेकिन मशीन एक भी नोट नहीं उगलती। ऐसे में आपको क्या करना चाहिए? इंडियन ओवरसीज बैंक के एक अधिकारी की सलाह है, 'ग्राहक को शाखा में आवेदन करना चाहिए। वह बैंक के कॉल सेंटर और वेबसाइट के जरिये भी इस बात की सूचना दे सकता है।' रिजर्व बैंक के नियम कहते हैं कि बैंकों को गलती से कटी रकम को शिकायत की तारीख से लेकर एक तय अवधि के भीतर ग्राहक के खाते में लौटाना होगा। केंइ्रीय बैंक ने अधूरे लेनदेन के मामले में रकम वापस लौटाने में लगने वाला समय और ग्राहकों को दिया जाने वाले मुआवजा सभी बैंकों के लिए एकसमान करने के बारे में एक सूचना जारी की थी। आरबीएल बैंक में बिजनेस बैंकिंग, एटीएम एवं डेबिट काड्र्स के प्रमुख अमिताभ भटनागर बताते हैं, 'रिजर्व बैंक के नए दिशानिर्देशों में बैंकों को लेनदेन की तारीख से 5 दिन के भीतर रकम ग्राहकों को वापस करने के लिए कहा गया है। इसके बाद बैंक को हर एक दिन के एवज में 100-100 रुपये का जुर्माना ग्राहक को देना होगा। ग्राहक ने बैंक को जानकारी दी हो या नहीं दो और शिकायत की हो या नहीं की हो, यह जुर्माना जुर्माना उसे हर हाल में दिया जाएगा। बैंक को अपने रिकॉर्ड तथा खाते देखकर यह सुनिश्चित करना होगा कि देर होने पर जुर्माना उचित समय में ग्राहक के पास पहुंच जाए।' इसलिए याद रहे कि ऐसी कोई भी समस्या होने पर आपको बैंक से बात करनी होगी और उसे जानकारी देनी होगी। यदि आपको तय समय के भीतर पैसा वापस नहीं मिलता तो बैंक से पूछताछ भी करनी चाहिए।


एटीएम शुल्क और रणनीति

एटीएम इस्तेमाल करने वाले हरेक व्यक्ति को उस पर लगने वाले शुल्क के बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए। अक्सर एटीएम से धन निकासी आदि पर लगने वाले शुल्क इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपका बैंक खाता किस प्रकार का है। मिसाल के लिए अधिक रकम वाले ज्यादातर खातों में एटीएम से असीमित लेनदेन की सुविधा दी जाती है, जबकि दूसरे प्रकार के खातों में एक निश्चित संख्या में मुफ्त लेनदेन करने का मौका मिलता है। भटनागर कहते हैं, 'कीमत पर नियंत्रण के नजरिये से रिजर्व बैंक ने तय कर दिया है कि कोई भी बैंक अपने ग्राहकों को कम से कम कितने मुफ्त लेनदेन करने देगा। उदाहरण के लिए बड़े महानगरों में ग्राहकों को महीने में कम से कम तीन लेनदेन नि:शुल्क करने का मौका दिया जाता है।' ग्रामीण और कम बैंक शाखाओं वाले इलाकों में लेनदेन की संख्या अधिक रखी गई है। इसके बाद लेनदेन पर अधिकतम 20 रुपये प्रति लेनदेन शुल्क वसूला जा सकता है।

पैसाबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्य अधिकारी और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा की सलाह है, 'डेबिट कार्ड रखने वालों को भुगतान के डिजिटल तरीकों का यथासंभव सहारा लेना चाहिए। इनमें ई-वॉलेट, इंटरनेट बैंकिंग, आईएमपीएस और यूपीआई आदि शामिल हैं। इससे नकद भुगतान का इस्तेमाल कम होगा और एटीएम से बार-बार रकम निकालने के फेर में तय संख्या से अधिक लेनदेन भी नहीं करना पड़ेगा। जिनके एक से अधिक बचत खाते हैं, वे अपने हरेक खाते में रकम रखें और हर बैंक के एटीएम से रकम निकालें। इस तरह उन्हें अधिक बार एटीएम से रकम निकालने का मौका मिल जाएगा और शुल्क भी नहीं लगेगा।' 1 जनवरी से एनईएफटी की सुविधा भी मुफ्त हो गई है। इसीलिए आप जब भी चाहें एक खाते से दूसरे खाते में रकम भेज सकते हैं और नकद निकासी के लिए मुफ्त एटीएम लेनदेन सुविधा का फायदा उठा सकते हैं।


सुरक्षित लेनदेन करें

जब भी एटीएम का इस्तेमाल करें, पूरी तरह सतर्क रहें। पुणे में रहने वाले साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मयूर जोशी कहते हैं, '2019 में भारत में सबसे अधिक धोखाधड़ी स्किमिंग के जरिये देखी गई। ग्राहकों को इस बारे में बताए जाने की जरूरत है। यदि एटीएम में कार्ड रीडर या पिन पैड थोड़ा अलग दिख रहा हो या उसमें कुछ अजीब लग रहा हो, छूने पर वह ढीला लग रहा हो या ग्राहक को दूसरे रीडर में कार्ड स्वाइप करने के निर्देश दिए जा रहे हों तो फौरन एटीएम से दूर हट जाएं और कार्ड उसके नजदीक नहीं ले जाएं। उसे हटाएं भी नहीं और बैंक को फौरन खबर करें।'

इंडियन ओवरसीज बैंक के एक अधिकारी समझाते हैं, 'ध्यान रखें कि एटीएम से रकम निकासी जैसे काम आप खुद ही करें। अपना पिन न तो कभी किसी कागज पर लिखें और न ही पिन या ओटीपी किसी को बताएं। लेनदेन पूरा होने के बाद नकद रकम और कार्ड साथ ले जाना भी कभी नहीं भूलें।' कुल मिलाकर लेनदेन के वक्त पूरी तरह मुस्तैद रहें और एटीएम कार्ड के इस्तेमाल या नकदी गिनने आदि में कभी किसी अनजान की मदद नहीं लें। एटीएम से हटने से पहले 'कैंसल' का बटन दबाना बिल्कुल नहीं भूलें। हिताची पेमेंट सर्विसेज में नकद कारोबार के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्य अधिकारी रुस्तम ईरानी आगाह करते हैं कि कार्ड तभी डालें, जब कार्ड रीडर की रोशनी चमक रही हो। पिन डालते वक्त कीपैड को अपने हाथ से ढकें और जब तक लेनदेन पूरा नहीं हो जाता है एटीएम से बाहर नहीं जाएं। इसके अलावा एटीएम कक्ष में घुसने पर देख लें कि वहां लगा कोई कैमरा सीधे कीपैड की दिशा में तो नहीं है या पिन पैड के ऊपर कोई नन्हा कैमरा तो नहीं लगा है। भटनागर यह भी समझाते हैं कि अपने पीछे खड़े शख्स का ध्यान रखें। हो सकता है कि जब आप पिन डाल रहे हों तब वह उचककर आपका पिन पढ़ ले। इसीलिए एटीएम के जितना करीब हो सके, खड़े हों और पिन डालते वक्त कीपैड को अपने शरीर तथा हाथों से ढक लें ताकि कोई भी पिन नहीं देख सके। कुल मिलाकर देख लें कि कोई आपके पीछे से झांक तो नहीं रहा है। यदि आप एटीएम का इस्तेेमाल चेक या नकद जमा करने के लिए कर रहे हैं तो बाद यह जरूर देख लें कि आपके खाते में उसे जमा दिखाया गया है या नहीं।

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