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छंटनी मुआवजा से मिले राहत

सोमेश झा / नई दिल्ली April 25, 2020

ऐसे समय पर जब कोरोनावायरस ने राष्ट्रीय लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों में भारी बाधाएं उत्पन्न कर दी है, संसद की एक स्थायी समिति ने सरकार से श्रम कानूनों के एक उपनियम में बदलाव करने की मांग की है। इस उपनियम के तहत कामगारों को किसी राष्ट्रीय आपदा के कारण कारोबार प्रभावित होने पर कामबंदी मुआवजा लेने की अनुमति दी गई है।

स्थायी समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह बड़ी कंपनियों को सरकार से आधिकारिक अनुमति लिए बिना ही छंटनी करने की अनुमति प्रदान करे और सरकार से कहा है कि वह इसकी सीमा तय करे कि कंपनियां कितनी बार कर्मचारियों के ठेकों का नवीनीकरण कर सकती हैं। उसने सरकार से अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए हड़ताल पर जाने से 14 दिन पहले नोटिस देने के प्रस्ताव को खत्म करने के लिए कहा है। 

बीजू जनता दल के सांसद भर्तहरि महताब की अगुआई वाली श्रम पर बनी स्थायी समिति ने सरकार की प्रस्तावित औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक पर बनी रिपोर्ट में कहा, 'भूकंप, बाढ़, भयंकर चक्रवात आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के मामलों में, जिनमें बिना नियोक्ता की गलती के अमूमन प्रतिष्ठान काफी लंबी अवधि के लिए बंद हो जाते हैं, उद्योग के पुन: शुरू होने तक मजदूरों को भुगतान (कामबंदी मुआवजा के तौर पर) अन्यायपूर्ण हो सकता है।' यह रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की गई। 

मौजूदा परिस्थिति में इसका काफी महत्त्व है, जब कंपनियां अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं, बहुत सारे मामलों में वे अपने कामगारों को वेतन मुहैया करा पाने में अक्षम हैं। 25 मार्च से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद जरूरी सामानों का उत्पादन करने वाली कंपनियों को छोड़कर बाकी कारोबार ठप पड़ा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने नियोक्ताओं से लॉकडाउन के दौरान कामबंदी या कर्मचारियों की छंटनी नहीं करने का अनुरोध किया है, जिसके बाद इस आदेश पर श्रम आयुक्तों की ओर से जारी किए गए परामर्श पर कड़ाई से नजर रखी जा रही है। सच तो यह है कि सरकार ने 29 मार्च को एक आदेश जारी कर दिया जिसमें कंपनियों को लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों के वेतन में कटौती या उसे घटाने मना कर दिया गया जिसे कुछ नियोक्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

भले ही सरकार ने कोविड-19 को प्राकृतिक आपादा घोषित नहीं किया है, लेकिन श्रम कानून विशेषज्ञ ने कहा कि फरवरी में वित्त मंत्रालय का वह आदेश में जिसमें कंपनियों को प्राकृतिक आपदा के समय विशेष प्रावधान 'फोर्स मेजर' लगाने की अनुमति दी गई है, इस बात का बड़ा संकेत है कि महामारी को प्राकृतिक आपदा के तौर पर लिया जा सकता है। श्रम कानून की भाषा में कामबंदी या छंटनी के बीच मामूली अंतर है। छंटनी के स्थान पर कामबंदी अंशकालिक होता है जब कर्मचारियों को अस्थायी समय के लिए काम नहीं दिया जा सकता है। श्रम कानून की भाषा में कामबंदी या छंटनी के बीच मामूली अंतर है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने प्राकृतिक आपदा प्रावधान का बचाव किया है, लेकिन स्थायी समिति ने उसे स्वीकार नहीं किया। माकपा के राज्यसभा सदस्य एलामरम करीम, जो पैनल के सदस्य भी हैं, ने इस पर असहमति नोट देते हुए कहा है, 'मैं इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हूं और इस लॉक, स्टॉक और बैरल का विरोध करते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराता हूं। दरअसल मौजूदा कोरोनावायरस की स्थिति ने हमें इस बात के लिए प्रेरित किया है कि इस दिशा में कानून और मजबूत किया जाए, जो हमारे श्रम कानून में अपर्याप्त है।'

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