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क्वारंटीन सेंटर में बदलते पांच सितारा होटल

वीर अर्जुन सिंह /  04 24, 2020

कारों के काफिले के साथ एक बस अमृतसर के पार्क इन बाई रैडिसन के गेट से अंदर घुसी। आंगतुक बस से बाहर आए और एक कतार में खड़े हो गए। उनके बीच बनाई गई सामाजिक दूरी से साफ था कि वे असामान्य परिस्थितियों में यहां आए थे। 29 आगंतुकों की इस टोली के साथ उनके परिजन और दोस्त नहीं बल्कि डॉक्टर और पुलिसकर्मी थे। होटल में न कोई दरवाजा खोलने वाला था और न ही सामान ढोने वाला।

बिना ऑपरेटर वाली एक लिफ्ट इन मेहमानों के लिए आरक्षित रखी गई थी। इन लोगों में भारतीय और विदेशी पर्यटक शामिल थे जिनके कोविड-19 संक्रमित होने की आशंका थी। यह लिफ्ट होटल के सबसे ऊपरी तल पर बनाई गई एक अस्थायी क्वारंटीन फैसिलिटी में खुली जहां पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) पहने होटल के एक कर्मचारी ने उनका स्वागत किया। आंगतुकों ने अपने-अपने कमरों की चाबियां उठाई और 14 दिन के आइसोलेशन के लिए अपने कमरों में चले गए। कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के कारण सामाजिक दूरी का खास ध्यान रखा जा रहा है और इस महामारी ने पांच सितारा होटलों के नियमों को पुनर्परिभाषित किया गया है। अब चेक इन के समय वे सारी औपचारिकताएं नहीं हो रही हैं जो पहले होती थीं। पहले मेहमानों का मुस्कराकर स्वागत किया जाता था, उन्हें वेलकम ड्रिंक दी जाती थी, दरवाजे और लिफ्ट खुली रखी जाती थी और उनके सामान को कमरे तक छोडऩे की व्यवस्था होती थी। लेकिन अब यह सब नदारद है। होटल कर्मचारियों को होटल प्रबंधन और महीनों के प्रशिक्षण के दौरान मेहमाननवाजी के जो गुर सिखाए जाते थे, अब वे उससे परहेज कर रहे हैं। अचानक उन्हें ऐसा काम करना पड़ रहा है जो महामारी के दौरान अग्रिम मोर्चे का काम माना जाता है।

अमृतसर के पार्क इन बाई रैडिसन के महाप्रबंधक जितेन्दर सोहल ने कहा कि उन्हें  एसडीएम की कॉल आई थी और फिर उन्होंने व्हाट्सऐप पर लिखित जानकारी भी दी। एक घंटे बाद एसडीएम, पुलिस और मेडिकल टीम ने होटल का मुआयना किया। होटल ने अपने कर्मचारियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों के मुताबिक प्रशिक्षण दिया है। एसडीएम के साथ आई टीम नें उन्हें कुछ और निर्देश दिए और उसी रात संदिग्ध होटल पहुंच गए। सोहल ने कहा, 'हमने कुछ कर्मचारियों से स्वयंसेवक बनने के लिए बात की। होटल के कर्मचारियों में स्थानीय और प्रवासी शामिल हैं। इनमें से कुछ अपने घर नहीं जा सके थे और होटल में ही रह रहे थे। किचन और हाउसकीपिंग के तीन-तीन लोगों तथा इंजीनियरिंग विभाग के दो कर्मचारियों को इस काम पर लगाया गया। हमें स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए थे। हमें डिस्पोजेबल कंटेनरों में बुनियादी रूम सर्विस देनी थी और मेहमानों के साथ कोई संपर्क नहीं रखना था। इसके लिए हमें ज्यादा लोगों की जरूरत नहीं थी। साथ ही हम अपने कम से कम कर्मचारियों को खतरे में डालना चाहते थे।' 19 साल के हाउसकीपिंग कर्मचारी हृदयमल्ला सरानिया को हजमत सूट में डेली रूम सर्विस के लिए प्रशिक्षित किया गया। उन्हें क्वारंटीन फैसिलिटी में खाना पहुंचाने, वहां से कूड़ा एकत्र उठाने और कमरों में दवा के छिड़काव का जिम्मा सौंपा गया। होटल में अपनी पहली नौकरी में शायद ही कोई इस तरह के काम की उम्मीद करेगा। हजमत सूट (हजार्डस मटेरियल सूट) पूरे शरीर को ढकने वाला कपड़ा होता है और खतरनाक पदार्थों से रक्षा करता है।

सरानिया कहते हैं, 'शुरुआत में जिस तरह कोरोनावायरस फैल रहा था उससे मैं चिंतित था। लेकिन मैं सभी तरह की एहतियात बरत रहा हूं।' उनका परिवार असम के बाक्सा जिले के एक गांव में रहता है और वह छह महीने से अभी घर नहीं गए हैं। आइसोलेशन में दो हफ्ते का समय बहुत लंबा होता है और इस दौरान मेहमानों ने खासकर मार्च के अंतिम हफ्ते में नवरात्रि के दौरान कई तरह की विशेष मांग की। सरानिया ने कहा, 'कई मेहमानों ने व्रत रखा था, इसलिए वे विशेष नमकीन, कुकीज और फल मांग रहे थे। हम ये सारा सामान बाहर से ला रहे थे।'

होटलों का कहना है कि वे सभी तरह की एहतियात बरत रहे हैं। इनमें पीपीई, हजमत सूट, साफ-सफाई तथा दवा का नियमित छिड़काव शामिल है। लेकिन उनके कर्मचारियों को जिस तरह का असामान्य काम करना पड़ रहा है उससे वे कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर ला दिया है।

दक्षिण मुंबई का ताज महल पैलेस होटल डॉक्टरों को मुफ्त ठहरने की सुविधा दे रहा था। इस महीने की शुरुआत में वहां के छह कर्मचारियों में कोविड-19 के संक्रमण की पुष्टि हुई। बाकी कर्मचारियों को होटल में ही क्वारंटीन कर दिया गया है। होटल के एक वरिष्ठ कर्मचारी की पिछले सप्ताह संक्रमण के कारण मौत हो गई। इस अभूतपूर्व स्थिति के कारण स्वाभाविक है कि सरानिया का परिवार भी चिंतित है। उन्होंने कहा, 'मैं उनसे रोज बात करता हूं। पहले वे बहुत चिंता करते थे लेकिन अब वे जानते हैं कि मैं सुरक्षित हूं और वे यह नौकरी करने के मेरे फैसले का पूरा साथ देते हैं।'

पार्क इन बाई रैडिसन अमृतसर में हवाई अड्डे के पास है। यह उन कई होटलों में शामिल है जिन्हें सरकार ने क्वारंटीन में इस्तेमाल के लिए कमरे देने को कहा था। इससे लोगों को सरकारी क्वारंटीन सुविधाओं से इतर अपनी पसंद की जगह में रहने का मौका मिल रहा है लेकिन इसने पहले से ही कोविड-19 की मार झेल रहे होटल उद्योग की परेशानी बढ़ा दी है। होटलों को अपने यहां क्वारंटीन फैसिलिटी बनाने तथा अपने कर्मचारियों को सुरक्षा और साफ-सफाई के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक प्रशिक्षित करने को कहा जा रहा है। साथ ही उन्हें यह निर्देश भी दिया गया है कि वहां रह रहे दूसरे मेहमानों को संक्रमण का खतरा नहीं होना चाहिए।

देश में 94 होटल चलाने वाले रैडिसन होटल ग्रुप के प्रबंध निदेशक एवं  वाइस प्रेजिडेंट (दक्षिण एशिया ऑपरेशंस) जुबिन सक्सेना ने कहा, 'इसके पीछे कभी भी व्यावसायिक सोच नहीं थी। ऐसा नहीं है कि होटलों में कमरे खाली पड़े हैं और क्वारंटीन फैसिलिटी से नई बिजनेस मांग बन रही है। इसके पीछे समाज के लिए कुछ करने की सोच है।'

रैडिसन होटल ग्रुप के कई होटलों में किचनों में गरीबों के लिए खाना बनाया जा रहा है जबकि ताज पब्लिक सर्विस वेलफेयर ट्रस्ट मुंबई, दिल्ली और बेंगलूरु के अस्पतालों के लिए खाना बना रहा है और इसका वितरण कर रहा है।

देश में 18,000 से अधिक होटलों का संचालन करने वाले ओयो ग्रुप में 10,000 से अधिक कर्मचारी हैं। इस समूह ने अपोलो हॉस्पिटल्स के साथ साझेदारी से अपने होटलों को क्वारंटीन फैसिलिटी में बदला है। ओयो होटल्स ऐंड होम्स (इंडिया और दक्षिण एशिया) के मुख्य कार्याधिकारी रोहित कपूर ने कहा, 'हम छह शहरों में अपोलो हॉस्पिटल्स के करीब कोविड-19 के मरीजों के लिए खासतौर पर तैयार किए गए कुछ होटलों में सैनिटाइज्ड बिस्तर और दूसरी सुविधाएं दे रहे हैं। देश में फंसे कई विदेशी पर्यटक भी विभिन्न शहरों में ओयो के होटलों में ठहरे हुए हैं।' बिहार में समस्तीपुर के रहने वाले 22 साल के मनीष कुमार सिंह पिछले दो साल से मुंबई के कांदिवली में ओयो होटल में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले महीने उनका सामना एक ऐसे मेहमान से हुआ जो लगातार खांस रहा था। सिंह ने कहा, 'हमें लगा कि यह कोविड-19 का लक्षण हो सकता है। हमने उनसे पूछा कि वह कहां-कहां गए थे, उनका तापमान मापा और उन्हें एक मास्क पहनने को दिया। इस मेहमान के अलग-थलग कर दिया गया और डॉक्टर को बुलाया गया। शुरुआत में मेरा परिवार चिंतित था लेकिन मेरे मैनजरों ने उन्हें समझाया कि हमें इस काम का प्रशिक्षण मिला है। मुझे लगता है कि जैसे मैं अपना नैतिक कर्तव्य निभा रहा हूं।'

वैश्विक रियल एस्टेट सलाहकार फर्म जेएलएल ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि बड़े और संगठित होटलों में 65 फीसदी कमरे खाली पड़े हैं। नकदी प्रवाह लगभग सूख चुका है। भारत में होटल उद्योग का सालाना राजस्व 38,000 करोड़ रुपये है लेकिन कोविड-19 के कारण उसे भारी नुकसान हो रहा है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) का अनुमान है कि अगर अक्टूबर 2020 तक स्थिति नहीं सुधरती है तो हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन उद्योग में 2 करोड़ लोगों की नौकरी जा सकती है।

दुनिया की सबसे बड़ी होटल कंपनी मैरियट इंटरनैशनल ने हजारों कर्मचारियों को लंबी छुट्टी पर भेजना शुरू कर दिया है और इनमें से कइयों की छुट्टी हो सकती है। ओयो ने भी अमेरिका में कई कर्मचारियों को लंबी छुट्टी पर भेज दिया है। कंपनी के भारत में 10 हजार से अधिक कर्मचारी हैं और उसने कई कर्मचारियों को 4 मई से बिना वेतन चार महीने की छुट्टी पर भेज दिया है। इस दौरान उन्हें सीमित लाभ मिलेंगे जिनमें चिकित्सा बीमा, स्कूल फीस प्रतिपूर्ति और अनुग्रह राशि शामिल हैं। साथ ही 5 लाख रुपये से अधिक सालाना वेतन पाने वाले कर्मचारियों के वेतन में 25 फीसदी कटौती की गई है।

रैडिसन होटल ग्रुप के सक्सेना ने कहा, 'होटल का हर कमरा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 16 लोगों को रोजगार देता है और उनके परिवार का पेट भरता है। हमारे यहां कोई छंटनी नहीं हुई है और हम अपने कर्मचारियों खासकर फ्रंटलाइन स्टाफ की नौकरी बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'

रोज ऐसे होटलों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें क्वारंटीन सेंटर बनाया जा रहा है क्योंकि देश में कोविड-19 के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हो सकता है कि होटल कर्मचारियों की मुस्कान हजमत सूट के पीछे छिप गई हैं लेकिन वे अपना काम बखूबी कर रहे हैं।

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