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10,000 करोड़ रु. के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा आरबीआई

अनूप रॉय / मुंबई 04 23, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को कहा कि वह सोमवार को छोटी अवधि वाले 10,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचेगा तथा इतनी ही राशि के लंबी अवधि के बॉन्ड खरीदेगा। यह राजस्व तथा तरलता प्रबंधन की एक गतिविधि है, जो मुख्यत: केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट प्रबंधन का हिस्सा है, हालांकि आरबीआई ने इसे लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

आरबीआई द्वारा खुले बाजार की प्रक्रियाओं (ओएमओ) की घोषणा के बाद दीर्घावधि बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट देखी गई। 10 साल के बॉन्ड का प्रतिफल 6.223 फीसदी के पिछले स्तर के मुकाबले 17 आधार अंक गिरकर 6.052 फीसदी पर आ गया।

इससे पहले भी आरबीआई द्वारा ऐसा कदम उठाया गया था, जब केंद्रीय बैंक ने सरकार द्वारा उधार लेने में मदद करने के लिए दीर्घकालिक बॉन्ड प्रतिफल को कम करने के लिए इसी तरह का कदम उठाया था। अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा भी इसी तरह की गतिविधियों को देखते हुए बाजार से जुड़े लोग इसे 'ऑपरेशन ट्विस्ट' कह रहे हैं।

केंद्रीय बैंक जिन 4 बॉन्ड को द्वितीयक बाजार में बेचने की योजना बना रहा है, वे 16 जून 2020 से 15 अप्रैल 2021 के बीच परिपक्वहो रहे हैं। इनके बदले में आरबीआई 11 जनवरी 2026 से 9 मई 2030 के बीच परिपक्वहोने वाले चार बॉन्ड की खरीदारी करेगा। हालांकि आरबीआई ने बॉन्डों से जुड़ी सिक्योरिटी आधारित सीमा की घोषणा नहीं की है।

नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उसके पास लगभग 9 लाख करोड़ रुपये मूल्य के बॉन्ड हैं। अब द्वितीयक बाजार से खरीदारी करके केंद्रीय बैंक इसे और बढ़ा सकता है। हालांकि आरबीआई के साथ बैंकों की 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की तरलता रखी हुई है। तरलता से जुड़े इस परिचालन से इतर, आरबीआई को सिक्योरिटी के तौर पर बॉन्ड देने होंगे। बाजार जानकारों का कहना है कि इसलिए आरबीआई अपने अल्पकालिक स्टॉक को लंबी अवधि के बॉन्ड के साथ भर रहा है, जिससे तरलता संचालन को निर्बाध रूप से जारी रखा जा सके।

कई दूसरे विकल्प भी हैं, जिनका उपयोग बैंक बाद में भी कर सकता है, जैसे रिवर्स रीपो के तहत शामिल बॉन्ड की सीमा तय करना, अतिरिक्त तरलता को समाप्त करने के लिए बाजार स्थिरीकरण योजना के तहत विशेषीकृत बॉन्ड जारी करना या स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) को लाना आदि।

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