बिजनेस स्टैंडर्ड - फसल को जोखिम
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फसल को जोखिम

संपादकीय /  April 23, 2020


इस वर्ष रबी फसल के रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना है लेकिन भविष्य फिर भी अनिश्चित नजर आ रहा है क्योंकि फसल कटाई और खेतों तथा बाजार में उनके प्रबंधन के लिए मशीन और श्रमिकों की भारी कमी है। सरकार ने कृषि संबंधी तमाम गतिविधियों तथा फसल कटाई, उसे बेचने तथा उपज के रखरखाव से जुड़े कामों से हर तरह के प्रतिबंध हटा लिए हैं लेकिन हालात अभी भी सामान्य नहीं हो सके हैं। देशव्यापी लॉकडाउन के बाद प्रवासी श्रमिकों के इधर-उधर हो जाने के कारण किसानों को खेती के काम के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। अनाज की सरकारी खरीद का काम भी प्रभावित हो रहा है क्योंकि सफाई, वजन करने, बोरी भरने, अनाज लादने और उतारने के लिए कामगार नहीं मिल रहे हैं।

सबसे बढ़कर देश के पश्चिमोत्तर इलाके में जहां फसल का बड़ा हिस्सा पक चुका है और कट भी चुका है, वहां गेहूं तथा अन्य फसलें अभी भी खेत में पड़ी हैं। पूरा इलाका बेमौसम बारिश की आशंका से जूझ रहा है जो इस उपज को नष्ट कर सकती है। इस उपज के एक बड़े हिस्से को नष्ट होने से बचाने के लिए समय पर एकत्रित करने, बेचने और भंडारगृहों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

दुख की बात है कि इस मामले में केवल पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे उपजाऊ क्षेत्र ही आशंकित नहीं हैं बल्कि पूरे देश में यही हालत है। महाराष्ट्र से आ रही खबरें बताती हैं कि रबी की सब्जियों और फलों का करीब एक तिहाई हिस्सा शायद खेतों में ही बरबाद हो जाएगा। मध्य प्रदेश में कोविड-19 के प्रसार के समय फसल कटाई शुरू हो गई थी, वहां कटी फसल का एक हिस्सा अभी भी सरकारी खरीद का इंतजार कर रहा है। पंजाब और हरियाणा जो केंद्र के खाद्यान्न भंडार में गेहूं का सबसे अधिक योगदान करते हैं वहां फसल कटाई अभी भी पूरी तरह नहीं हो पाई है। हालांकि इन इलाकों में फसल की ज्यादातर कटाई कंबाइन-हार्वेस्टरों के माध्यम से की जाती है। परंतु इनमें से अधिकांश उपकरण अभी चालकों और कलपुर्जों की प्रतीक्षा में बेकार खड़े हैं। ये बातें चिंतित करने वाली हैं और इन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

श्रमिकों की कमी के अलावा किसान नेताओं और राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) श्रमिकों को खेतों में काम करने दे और किसान उनका मेहनताना चुकाएं। इस सुझाव पर विचार किया जा सकता है। सरकार ने राहत शिविरों में रखे गए श्रमिकों को स्वास्थ्य की समुचित जांच के बाद खेतों में काम करने की इजाजत देकर अच्छा किया है। सरकार को बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित करनी चाहिए। खरीफ की फसल बोने में भी उनकी आवश्यकता होगी।

इसके अलावा इस वर्ष बड़ी मात्रा में अनाज खरीद इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि किसानों को मूल्य समर्थन देना होगा और लॉकडाउन से प्रभावित लोगों को पर्याप्त खाद्यान्न आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गोदाम भरने होंगे। मंडियों में भीड़ बढ़ाए बगैर ऐसा करने का एक तरीका यह है कि किसानों को विपणन सत्र के बाद ज्यादा मूल्य पर फसल खरीदने का आश्वासन दिया जाए। इसके लिए उनके खेतों या घरों पर अस्थायी भंडार गृह तैयार करने में मदद की जा सकती है। दूसरा तरीका यह है कि उनके गांवों के निकट खरीद केंद्र स्थापित कर किसानों से सीधे अनाज खरीदा जाए। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा दालों और तिलहन की खरीद में ऐसा कर रहे हैं। बहरहाल, इन अस्थायी बाजारों में भी कोविड-19 के खिलाफ पर्याप्त सावधानी बरतनी होगी।

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