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रिलायंस-फेसबुक गठजोड़ का ई-कॉमर्स पर रहेगा जोर

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली April 23, 2020

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी जियो प्लेटफॉम्र्स (जेपीएल) और फेसबुक ने आपसी गठजोड़ के लिए ई-कॉमर्स के अलावा तीन अन्य क्षेत्रों की पहचान की है। दोनों कंपनियों के बीच चल रही चर्चा की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक ये क्षेत्र हैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉल्यूशंस, मिक्स्ड रियलिटी (ऑगमेंटेड रियलिटी का उन्नत रूप) और मीडिया। फेसबुक ने जेपीएल में 9.9 फीसदी हिस्सेदारी 43,574 करोड़ रुपये में खरीदने की घोषणा कल की थी।

मुकेश अंबानी के समूह ने जेपीएल का आईपीओ लाने का भी फैसला किया है। पहले रिलायंस जियो का आईपीओ लाने की बात चल रही थी, लेकिन अब जेपीएल का आईपीओ आएगा और फेसबुक चाहेगी तो उसके जरिये अपनी हिस्सेदारी बेचकर कंपनी से बाहर हो जाएगी।

समूह के करीबी सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप रिलायंस रिटेल के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जियोमार्ट के लिए एक चैट इंटरफेस बना रहा है। इसके जरिये ग्राहक सामान ऑर्डर कर सकते हैं और किराना दुकानदार उन तक सामान पहुंचा सकते हैं। इसके लिए जियोमार्ट ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस तरह जियोमार्ट एक ही झटके में व्हाट्सऐप के 40 करोड़ देसी उपभोक्ताओं से जुड़ जाएगा। इससे कंपनी को एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से मुकाबला करने में मदद मिलेगी। फेसबुक के साथ जिस योजना पर काम चल रहा है, उसके मुताबिक देश के 2 करोड़ छोटे दुकानदारों और रेस्टोरेंटों को जोड़ा जाएगा। इनमें 80 लाख खानपान और किराना दुकानें, 10 लाख दवा की दुकानें, फैशन और लाइफस्टाइल स्टोर, सेवा प्रदाता, डिजिटल स्टोर तथा रेस्तरां शामिल होंगे।

इस योजना में सबसे ज्यादा जोर किराने की दुकानों पर है। इन दुकानों पर औसतन 300 से 400 तरह की सामग्री मिलती है, जिसे बढ़ाकर 1,500 से 2,000 किया जाएगा। एक सूत्र ने कहा कि इन दुकानदारों को अपना स्टॉक नहीं बढ़ाना पड़ेगा। उसके बजाय वे हमारे गोदामों से अतिरिक्त सामान मंगा सकते हैं, जो चौबीसों घंटे उनके पास पहुंचता रहेगा। अभी नवी मुंबई में जियोमार्ट का परीक्षण चल रहा है और इसके लिए करीब 1,000 दुकानों को जोड़ा गया है।

व्हाट्सऐप के साथ करार के बाद 24 महीने में इसे पूरे देश में शुरू करने की योजना है। यह मॉडल बाजार में क्रांति ला सकता है क्योंकि यह एमेजॉन और फ्लिपकार्ट से एकदम अलग है। इन कंपनियों ने ग्राहकों तक आपूर्ति के लिए अपना ढांचा बनाया है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस का अनुमान है कि इस तरह ग्राहकों को सामान की आपूर्ति में उसका 2-3 फीसदी खर्च आएगा, जबकि प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की परिचालन लागत 15-16 फीसदी है।

फेसबुक और रिलायंस के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के क्षेत्र में भी सहयोग पर चर्चा चल रही है। फेसबुक ने पोर्टल को एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग डिवाइस देने की बात कही है, जो भारत में पहले से उपलब्ध है। इसमें कृत्रिम मेधा से चलने वाला स्मार्ट कैमरा लगा है, जो आपके हिलने-डुलने या चलने-फिरने पर भी आप पर ही फोकस करता है। इस तकनीक को टीवी और संभवत: मोबाइल के साथ जोड़ा जा सकता है। जाहिर है दोनों पक्ष इस क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा करेंगे।

मिक्स्ड रियलिटी के क्षेत्र में फेसबुक ने हाल में वीआर हैडसेट बनाने वाली कंपनी ऑक्यलस को 2 अरब डॉलर में खरीदा था।
सूत्र ने कहा, 'रिलायंस ने भी मिक्स्ड रियलिटी उत्पाद विकसित किए हैं, जो हल्के हैं और कम डेटा इस्तेमाल करते हैं। हम इस क्षेत्र में सहयोग के लिए बातचीत कर रहे हैं।' दोनों कंपनियों के बीच सहयोग का चौथा क्षेत्र मीडिया है। हालांकि अभी इसकी रूपरेखा पर काम चल रहा है। फेसबुक और रिलायंस ने इंडियन प्रीमियर लीग के डिजिटल अधिकार खरीदने की नाकाम कोशिश की थी और विशेषज्ञों का कहना है कि कंटेंट तथा प्रौद्योगिकी के ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां दोनों कंपनियों के बीच सहयोग की गुंजाइश है।

फिर भी कुछ हलकों में यह चिंता है कि डेटा के कारण इस सौदे को नियामकीय बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। रिलायंस के करीबी सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप के साथ व्यावसायिक करार में एक ऐसी शर्त है जिससे तहत दोनों के बीच डेटा साझा करने की कोई बाध्यता नहीं है। एक सूत्र ने कहा कि समूह ने दो अलग-अलग समझौते किए हैं। इनमें से एक अल्पांश हिस्सेदारी के निवेश के बारे में है और दूसरा व्हाट्सऐप के साथ व्यावसायिक करार है। अगर फेसबुक निवेश नहीं करती तो भी रिलायंस इस समझौते पर हस्ताक्षर करती। उन्होंने साथ ही कहा कि समूह ने नेट निरपेक्षता का खुला समर्थन किया है और समझौते में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इसके सिद्धांत के खिलाफ  हो।

Keyword: Mukesh Ambani, Mark Zuckerberg, Telecom, Facebook, Reliance Jio, JPL, फेसबुक, रिलायंस जियो, जेपीएल, आरआईएल,
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