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अर्थव्यवस्था को राहत की खुराक

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली April 23, 2020

कोविड-19 महामारी से प्रभावित ग्रामीण और शहरी गरीबों, प्रवासी कामगारों, किसानों, छोटे और मझोले उद्यमों के लिए राहत पैकेज की दूसरी किस्त को अंतिम रूप देने के वास्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की एक बार फिर शुक्रवार को बैठक होगी। उड्डयन और आतिथ्य जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों को भी कुछ राहत मिल सकती है।

अगले 24 से 48 घंटे में इस राहत पैकेज की घोषणा हो सकती है। शीर्ष सूत्रों के मुताबिक दो चरणों में राहत उपायों की घोषणा हो सकती है। इनमें से कुछ उपाय वित्त मंत्रालय और कुछ भारतीय रिजर्व बैंक घोषित कर सकता है। शुक्रवार की बैठक से पहले सरकार के भीतर इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई है। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने वित्त मंत्रालय, नीति आयोग, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद और स्वतंत्र विशेषज्ञों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात की थी।

माना जा रहा है कि आरबीआई के पूर्व गवर्नर ऊर्जित पटेल, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष विवेक देबरॉय और सदस्य साजिद चेनॉय, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार शंकर आचार्य, 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह और नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ  पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी के निदेशक रथिन रॉय ने इस बैठक में हिस्सा लिया।

सरकार की ओर से कैबिनेट सचिव राजीव गाबा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्र, आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती, नीति आयोग के रतन वाटल, राजीव कुमार और अमिताभ कांत तथा मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन इसमें शामिल हुए। ऐसी ही एक बैठक बुधवार को हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक वित्त मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग में भी कई आंतरिक बैठकों में संभावित राहत उपायों के बारे चर्चा हुई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमें राज्यों, उद्योग संस्थाओं और जमीनी स्तर से कई सुझाव मिले हैं। इन पर व्यापक चर्चा हुई है। सूत्रों के मुताबिक इस पैकेज में भी ग्रामीण और शहरी गरीबों को राहत देने पर जोर होगा। देश के विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी कामगारों, समाज के कमजोर तबकों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों को राहत मिलेगी और साथ ही कोविड से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी कुछ अच्छी खबर मिल सकती है।

जहां तक उद्योग का सवाल है तो सरकार की कोशिश उद्योगों को आसान और सस्ता ऋण मुहैया कराने की होगी। साथ ही केंद्र सूक्ष्म, लघु एवं मझोली कंपनियों के क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट में ज्यादा पैसा डाल सकता है।

इस पैकेज में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों की ऋण तक पहुंच आसान बनाने और नकदी तथा खाद्य हस्तांतरण के उपायों को भी जगह मिल सकता है। मनरेगा में मजदूरी बढ़ाने का भी प्रस्ताव है और साथ ही पीएम किसान योजना के तहत आवंटन में और तेजी लाई जा सकती है।

जहां तक आरबीआई का सवाल है तो उसका जोर वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता कायम रखने पर हो सकता है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आर्थिक गतिविधि के बहाल होने से दूसरे क्षेत्र भी पटरी पर लौट सकते हैं लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वित्तीय क्षेत्र अपना काम करता रहे। यह अर्थव्यवस्था की धड़कन है। माना जा रहा है कि केंद्र भारी भरकम राहत उपायों के बजाय छोटे और लक्षित उपायों की घोषणा कर सकता है।

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