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'सीधे आरबीआई से मिले लिक्विडिटी लाइन'

सुरजीत दास गुप्ता /  04 22, 2020

बीएस बातचीत

बजाज फिनसर्व की उधारी एवं निवेश इकाई बजाज फाइनैंस ने हाल में घोषणा की है कि कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के प्रसार को रोकने के लिए किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान महज 10 दिनों में उसे करीब 3,50,000 ग्राहकों का नुकसान हुआ। बजाज फिनसर्व के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजीव बजाज ने सुरजीत दास गुप्ता से बातचीत के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। पेश हैं मुख्य अंश:

अर्थव्यवस्था के खुलने के बारे में आप क्या कहेंगे? निवेश को सुचारु करने के लिए और क्या करने की जरूरत है?

कोविड-19 वैश्विक महामारी अचानक पैदा हुई है और इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है। सरकार ने इसके प्रसार को नियंत्रित करने के लिए समय पर लॉकडाउन करने और चिकित्सकीय क्षमता बेहतर करने की पहल की है लेकिन अब उन क्षेत्रों में धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियां शुरू करने की जरूरत है जो हॉटस्पॉट नहीं हैं। हमारी अर्थव्यवस्था ने पहले कभी इस तरह के लॉकडाउन का सामना नहीं था जहां मांग और आपूर्ति दोनों बंद हो गई हैं। जितनी जल्द हम अर्थव्यवस्था को नए सिरे से खोलेंगे, हमें स्थिति को सामान्य करने में उतनी ही आसानी होगी। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के लिए यह भी महत्त्वपूर्ण है कि लोगों में भरोसा पैदा किया जाए, विशेष रूप से छोटे कारोबारियों, प्रवासी श्रमिकों और व्यक्तिगत ग्राहकों में। पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान समाज के गरीब तबकों को भोजन और कुछ रकम प्रदान करने के लिए सराहनीय उपायों की घोषणा की गई है। अब उद्यम को दोबारा शुरू करने के लिए कार्यशील पूंजी एवं सावधि ऋण देने की आवश्यकता है। अर्थव्यवस्था को मौजूदा रुकावट से आगे बढ़ाने के लिए यह जरूरी है।

बैंकिंग एवं वित्तीय सेवा क्षेत्र की क्या चुनौतियां हैं?

हमारे बैंकों में पर्याप्त नकदी प्रवाह है लेकिन एनबीएफसी, आवास वित्त कंपनियों और माइक्रो-फाइनैंस संस्थानों को वे रकम नहींं दे रहे हैं क्योंकि वे उधारी का जोखिम नहीं लेना चाहते। यह गलत है क्योंकि वे बहुत सुरक्षित खेल रहे हैं। हालांकि यदि सरकार आरंभिक नुकसान को कवर करती है तो उससे भी मदद मिलेगी। विशाल घरेलू उपभोग के साथ हमारी अर्थव्यवस्था अन्य देशों के मुकाबले तेजी से सुचारु हो सकती है। लेकिन हमें शुरू में उसे रफ्तार देना होगा। अर्थव्यवस्था के रफ्तार पकडऩे के बाद सामान्य स्थिति में लौटने में कई तिमाहियों का समय लगेगा। क्योंकि हमें वायरस के प्रसार के साथ-साथ इसके खुलने को संतुलित करने की आवश्यकता होगी। इसलिए कोरोनावायस का उपचार या टीका उपलब्ध होने तक सरकार और आरबीआई की निरंतर दखल की आवश्यकता होगी।

आरबीआई ने हाल में एनबीएफसी की मदद के लिए कई उपायों की घोषणा की है। क्या आपको लगता है कि वे पर्याप्त होंगे?

विभिन्न प्रकार की एनबीएफसी की मदद के लिए किए गए उपाय स्वागत योग्य हैं। बैंकों की तरह एनबीएफसी हमारी अर्थव्यवस्था के एक उल्लेखनीय हिस्से की मदद करती हैं और इसलिए उन्हें अपना काम ठीक से करने में समर्थ होना चाहिए। मैं चाहूंगा कि बड़ी एनबीएफसी जैसे 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्ति वाली एनबीएफसी के लिए सीधे आरबीआई से लिक्विलिटी लाइन मिले। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अभी तक उन छोटी एनबीएफसी को बैक-टु-बैक मोहलत नहीं दी है जो अपने ग्राहकों को मोहलत दे रही हैं और ऋण के लिए इन बैंकों पर निर्भर हैं। इस चुनौतीपूर्ण समय में अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ्तार को बाधित करने वाली इस प्रकार की विसंगतियों को तत्काल दूर करने की आवश्यकता है।

लोगों का कहना है कि आपके जैसी बड़ी एनबीएफसी इस संकट से उबर जाएंगी लेकिन छोटी एनबीएफसी लॉकडाउन के कारण पूरी तरह तबाह हो जाएंगी। इस पर आप क्या कहेंगे?

यह सच है कि छोटी और नई एनबीएफसी के लिए जोखिम कहीं अधिक है। इन एनबीएफसी को अपनी पूंजी जरूरतों को अवश्य पूरा करना चाहिए, अतिरिक्त नकदी रखने के अलावा उधारी देने में सतर्क रहना चाहिए। ये कारोबार विवेक पर निर्भर करता है लेकिन अच्छे समय में कंपनियां कारोबार में विस्तार अथवा शुरुआती सफलता के लिए इसे भूल जाती हैं।

एनबीएफसी की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

अतिरिक्त उधारी लागत के बारे में कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि लॉकडाउन को आखिरकार कब हटाया जाता है, कारोबार किस प्रकार सामान्य होता है और ऋण किस प्रकार का है।

 

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