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रिलायंस जियो पर सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक क्यों हुई फिदा

पवन लाल / मुंबई April 22, 2020

सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक के लिए बड़ा अधिग्रहण कोई बड़ी बात नहीं रही है। उन्होंने इंस्टाग्राम को 2012 में 1 अरब डॉलर में खरीदा था जबकि व्हाट्सऐप को 2014 में 19 अरब डॉलर और वर्चुअल रियलिटी कंपनी ओक्यूलस वीआर को उसी साल 2 अरब डॉलर में खरीदा था। इन तीनों कंपनियों में एक सामान्य बात स्पष्ट थी। इन सभी सौदों में नियंत्रक हिस्सेदारी के लिए सौदा हुआ और दुनिया के सबसे बड़े सोशल नेटवर्क ने अधिग्रहण के जरिये उस समान कारोबार वाली कंपनियों पर जोर दिया जो उसके दायरे में नहीं था।

फेसबुक ने रिलायंस जियो में महज करीब 10 फीसदी की हिस्सेदारी के लिए करीब 5.7 अरब डॉलर का निवेश किया है, जो इस सौदे के लिए असामान्य बात है। बड़े विदेशी करार पर काम करने वाले एक निवेश बैंकर ने बताया, एक प्रौद्योगिकी कंपनी के द्वारा यह सबसे बड़ा अल्पांश निवेश है लेकिन यह दोनों कंपनियों की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी और उनके उपयोगकर्ता समूहों के लिहाज से एक ताकतवर संभावना का संकेत देती है। लेकिन इसके लिए यह देखना महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर इस सौदे से बाहर क्या निकलकर आता है।

कंपनी के लिए दुनिया के सबसे बड़े समुदायों में भारत भी एक है, जहां लगभग 32.8 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। इसके बाद इंस्टाग्राम के भारत में लाखों अकाउंट हैं और मैसेंजर सर्विस व्हाट्सऐप ने 2019 में घोषणा की थी कि उसके पास देश में 40 करोड़ यूजर हैं जिससे भारत, अमेरिका के बाहर उसका सबसे बड़ा बाजार बन गया है।

रिलायंस जियो भी पीछे नहीं है और इसने हाल ही में घोषणा की थी कि उसके पास करीब 40 करोड़ ग्राहक हैं। एक प्रौद्योगिकी विश्लेषक ने कहा, बड़ी तस्वीर में देखा जाए तो चीन में जो कुछ भी चल रहा है, उसे देखते हुए वहां किसी भी कारोबार से जुडऩे की बढ़ती अनिच्छा की वजह से फेसबुक के लिए वहां कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में भारत फिर दुनिया की सबसे बड़ी उपयोगकर्ता-आधार वाली आबादी में से एक है और उसे पूरी तरह भुनाया नहीं गया है।'

लेकिन यह देखते हुए कि टेलीकॉम यूजर कम खर्च करने वाले हैं, अन्य लक्ष्यों के लिए होड़ हो सकती है। भविष्य में फोन पर भुगतान में तेजी आ सकती है। ग्रांट थॉर्नटन में पार्टनर राजा लाहिड़ी कहते हैं, फेसबुक-जियो पार्टनरशिप एक गेटवे बना सकती है जो भविष्य के कारोबार के लिए काम करे। फेसबुक इंडिया ने इस बात का जवाब नहीं दिया कि भविष्य में एकदम नया मैसेंजर तंत्र बनाया जा सकता है या नहीं ।

क्रेडिट सुइस की एक रिपोर्ट के मुताबिक जियो और रिलायंस रिटेल की एक नई वाणिज्यिक पहल जियोमार्ट के बीच साझेदारी में व्हाट्सऐप मैसेंजर सेवा भी मददगार साबित होगी।

देश में फेसबुक के प्रवेश के साथ ही यह देखा गया कि कंपनी दूसरे बाजारों से अलग चीजें यहां करती नजर आई है। यहां मॉडल बदल गया क्योंकि उपयोगकर्ताओं ने पहले एक डेस्कटॉप के बजाय फोन पर ही फेसबुक तक पहुंच बनाई, जिसकी वजह से  मोबाइल उनकी रणनीति की आधारशिला बना रही है । 2012 में फेसबुक ने स्थानीय भाषाओं जैसे हिंदी, गुजराती, तमिल, मलयालम, कन्नड़, पंजाबी, बंगाली और मराठी और अधिक भाषाओं में सेवाएं देनी शुरू कर दी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी बाजार से कमाई करने में उतना सक्षम रही है, जितना वह सोच रही थी। हाल के दिनों में डिजिटल विज्ञापन की हिस्सेदारी 13,700 करोड़ रुपये (2019) रही, जिसमें गूगल और फेसबुक दोनों की करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी है। उद्योग के अधिकारियों का अनुमान है कि गूगल के खाते में इसकी बड़ी हिस्सेदारी जाती है।

विश्लेषक ने कहा कि फेसबुक जिसे बैंक ऑफ अमेरिका ने इस लेनदेन के लिए विशेष रूप से सलाह दी थी, उस ने पिछले आठ वर्षों में भारत में बहुत अधिक निवेश नहीं किया है। उनका कहना है, बेंगलूरु में उनका कोई बड़ा विकास केंद्र नहीं है और न ही अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के लिए एक अनुसंधान और विकास कार्यालय है। इससे भी बड़े निवेश की तैयारी का संकेत मिलता है। इस बीच, चीन की स्वामित्व वाली कंपनी टिकटॉक जैसी सोशल मीडिया कंपनी को भी बड़ी तादाद में उपयोगकर्ता मिले हैं, जिन्होंने अरबों डाउनलोड किए हैं। करीब 2 करोड़ सक्रिय यूजर इस पर अपना अधिक समय देते हैं।

फेसबुक के भुगतान वाला मंच व्हाट्सऐप पे ने पिछले साल अपनी शुरुआत की कोशिश की थी, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली है। अब वह निकट भविष्य में मंजूरी और अनुमतियां मिलने पर संयुक्त रूप से कारोबारी फायदे की पेशकश करेगी।

व्हाट्सऐप पे नियामकीय मंजूरी पाने के लिए संघर्ष कर रही है। हालांकि गूगल पे ने भी इसी तरह की बाधा को पार करते हुए अपना काम जारी रखा है। यह भी कोई रहस्य नहीं है कि 2014 में फेसबुक के फ्री बेसिक्स जैसे प्ले ने भी मुफ्त इंटरनेट देने की कवायद की थी नेट निरपेक्षता के खिलाफ चला गया और भारत सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी।

फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग अपने प्रबंधकों को यह कहने के लिए मशहूर हैं कि वे या तो हैकर का रास्ता अपनाएं या तेजी से आगे बढ़ें और चीजों को तोड़ें।' अब समय बताएगा कि क्या यह उनका बड़ा कदम है जो फेसबुक के लिए नई जमीन तैयार करेगा।

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