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ओएमसी की राह बेहतर, तेल उत्पादकों को नुकसान की आशंका

उज्ज्वल जौहरी / मुंबई 04 21, 2020

दो दिन के अंदर कच्चे तेल की कीमतें 25 फीसदी गिरकर 21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं हैं जो ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और वेदांत (प्राकृतिक संसाधनों की दिग्गज, जिसकी सहायक इकाई केयर्न इंडिया तेल उत्पादन एवं खोज में लगी हुई है) के साथ-साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) जैसी घरेलू तेल उत्पादकों के लिए अच्छी खबर नहीं है। तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) भी अल्पावधि में प्रभावित होंगी, लेकिन अगर तेल कीमतें निचले स्तर पर बनी रहीं तो उन्हें इसका लाभ मिलेगा।

वैश्विक रूप से, तेल आपूर्ति मांग से ज्यादा रहने की वजह से जहां मांग-आपूर्ति अंतर बना रहेगा, वहीं इससे कच्चे तेल के लिए भंडारण की समस्या भी बढ़ेगी। यही एक प्रमुख कारण था जिससे डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल मई वायदा गिरकर नकारात्मक दायरे में आ गया, और कच्चे तेल की कीमत सोमवार को गिरकर 25 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, भले ही प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन में भारी कटौती की घोषणा की है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में अन्य 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों का मानना है, 'भंडारण की समस्या गहरा गई है और कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले सप्ताहों में ऊंचा बना रहेगा। बाजार में संतुलन पैदा करने के लिए उत्पादन में बड़ी कमी लाए जाने की जरूरत होगी।'

इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी द्वारा कच्चे तेल की मांग में 2.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन की कमी का अनुमान जताए जाने के साथ साथ कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च के उपाध्यक्ष-प्रमुख रवींद्र राव का भी मानना है कि जब तक आपूर्ति ज्यादा बनी रहती है और मांग में सुधार नहीं आ जाता, तब तक बिक्री बरकरार रह सकती है।

इसे लेकर आश्चर्य नहीं है कि जहां ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी तेल उत्पादकों के शेयरों में 5-7 फीसदी तक की गिरावट आई। वहीं आरआईएल का शेयर दिन के कारोबार में 6 फीसदी से ज्यादा गिर गया था, हालांकि बाद में वह संभला और आखिर में 0.67 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। 

तेल में फिसलन की वजह से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया में बड़ी गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी से इन कंपनियों की शुद्घ प्राप्तियां काफी हद तक प्रभावित होंगी। विश्लेषकों के अनुसार, ओएनजीसी के लिए तेल उत्पादन की लागत (तेल क्षेत्रों से उत्पादन बरकरार रखने के लिए पूंजीगत खर्च शामिल) करीब 31 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि ऑयल इंडिया के लिए यह 25-26 डॉलर प्रति बैरल है। कच्चे तेल में गिरावट की वजह से इन कंपनियों को अब परिचालन स्तर पर भारी नुकसान की आशंका सता रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि मांग संबंधित चिंताओं की वजह से अपने रिफाइनिंग सेगमेंट के लाभ पर पहले से ही दबाव से जूझ रही आरआईएल जैसी कंपनियों के लिए तेल कीमतों में गिरावट का यह भी मतलब है कि इससे उन्हें इन्वेंट्री नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन और ज्यादा प्रभावित होगा।

हालांकि आरआईएल ने कच्चा तेल खरीदने की अपनी क्षमता की वजह से अन्य ओएमसी की तुलना में ज्यादा सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) दर्ज किया है, लेकिन इसका जीआरएम वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही के 9.2 डॉलर से घटकर मार्च तिमाही में 7.5 डॉलर रह जाने का अनुमान जताया गया था।

इसी तरह, सरकारी तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल को भी रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव और इन्वेंट्री नुकसान होने की आशंका है। लेकिन उन्हें विपणन मार्जिन में मौजूदा सकारात्मक रुझान का भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा कमजोर तेल कीमतों से ओएमसी को फायदा होगा क्योंकि उन्हें आयात के लिए कम रकम चुकाने की जरूरत होगी और इसलिए उनकी कार्यशील पूंजी जरूरत भी घटेगी।

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