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बरकरार रहेगी अस्थिरता

संपादकीय /  04 21, 2020

बीते कुछ सप्ताह के दौरान शेयर बाजार की गतिविधियां निवेशक समुदाय के मिजाज के उतार-चढ़ाव को ही परिलक्षित करती हैं। सबसे पहले मानक निफ्टी सूचकांक 20 जनवरी के 12,430 के उच्चतम स्तर से 40 फीसदी गिरकर 24 मार्च को 7,511 के निम्रतम स्तर पर आ गया। बाद में इसमें करीब 20 फीसदी का सुधार हुआ और यह 9,000 के स्तर पर पहुंचा। कारोबारी रोजाना भारी उतार-चढ़ाव के आदी हो गए। हालांकि यह आंशिक सुधार आर्थिक भविष्य को लेकर मंदी वाले और नकारात्मक पूर्वानुमान के बावजूद देखने को मिला है। निफ्टी फिलहाल 21 के मूल्य आय अनुपात पर काम कर रहा है जबकि इस बात को लेकर आम सहमति बन चुकी है कि निकट भविष्य में आर्थिक गतिविधियां धीमी बनी रहेंगी। किसी भी पारंपरिक मानक पर देखा जाए तो मूल्यांकन बहुत ज्यादा है। ऐसे में यह जोखिम है कि बाजार हर नकारात्मक खबर पर प्रतिक्रिया दे सकता है। भारतीय शेयरोंं में सुधार की सीमित गुंजाइश ने विश्लेषकों को रेटिंग और लक्ष्य कम करने के लिए प्रेरित किया। आय में भारी गिरावट की संभावना और धीमे सुधार की आशा के बीच विश्लेषकों को लग रहा है कि भारतीय शेयर अपेक्षाकृत पिछड़े रहेंगे।

इंडिया वॉलेटिलिटी इंडेक्स अथवा वीआईएक्स भले ही मार्च के अंत के 83 के स्तर से काफी नीचे आ गया है लेकिन यह अभी भी काफी ऊंचा है। यह बात भी अनिश्चितता को रेखांकित करती है। वित्तीय बाजार युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं जैसी जानी-अनजानी घटनाओं को ध्यान में रखते हैं लेकिन कोरोनावायरस तथा उससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों ने बाजार को अज्ञात श्रेणी में धकेल दिया है। कारोबार की मौजूदा निराशाजनक स्थिति के लिए यह भी एक वजह है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और उससे आगे भारत की बात करें तो ये दोनों लंबे समय तक उथलपुथल के शिकार रहेंगे और अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं पर इस महामारी का असर सन 2008 के वित्तीय संकट की तुलना मेंं कहीं अधिक होगा। हालांकि इस उथलपुथल में भी अवसर होगा लेकिन अधिकांश कारोबार लॉकडाउन के बाद गति पकडऩे में संघर्ष करेंगे और उन्हें मांग में कमी से निपटना होगा। यदि भविष्य में लॉकडाउन दोबारा लगता है या संक्रमण का नया दौर शुरू होता है तो अर्थव्यवस्था को काफी उथलपुथल का सामना करना पड़ेगा। इसका असर वैश्विक जिंस बाजार में देखने को मिल सकता है जहां कच्चे तेल का वायदा मूल्य गिरकर ऋणात्मक हो गया क्योंकि आपूर्ति अत्यधिक ज्यादा थी। उधर धातु एवं औद्योगिक रसायन के दाम भी कई वर्ष के निचले स्तर पर गिर गए।

निवेशकों के रुख में भी भारी बदलाव देखने को मिला। मार्च में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 61,973 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर और 60,376 करोड़ रुपये मूल्य के बॉन्ड बेचे। अप्रैल में अब तक उन्होंने 4,682 करोड़ रुपये के अतिरिक्त शेयर बेचे हैं। परंतु घरेलू खुदरा निवेशक मंदी के इस रुझान से सहमत नहीं दिखे। घरेलू इक्विटी म्युचुअल फंड ने मार्च में 11,722 करोड़ रुपये की भारी आवक दर्ज की। इसका ज्यादातर हिस्सा निजी व्यक्तियों से आया। ऐसे में स्पष्ट है कि खुदरा निवेशक इक्विटी में आस्था रख रहे हैं। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि आकर्षक वैकल्पिक परिसंपत्ति मौजूद नहीं है। डेट में प्रतिफल कम है और वह जोखिम भरा है। अचल संपत्ति की स्थिति ठीक नहीं है। डेवलपरों केपास नकदी का भीषण संकट है और विनिर्माण कार्य अंतहीन समय के लिए टल रहे हैं।

बहरहाल, कम कर संग्रह और उच्च राजकोषीय घाटे को देखते हुए सरकार के पास प्रतिचक्रीय व्यय के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं है। ऐसे में इक्विटी के साथ अल्पावधि और मध्यम अवधि में काफी जोखिम जुड़े हुए हैं क्योंकि अनिश्चितता बहुत ज्यादा है। सुचिंतित निवेशक अस्थायी रूप से गिरावट वाले शेयर खरीद लेंगे। परंतु उन्हें उतार-चढ़ाव वाले सफर के लिए तैयार रहना होगा।

Keyword: VIX, Economic, Share Market, Sensex, Nifty, शेयर बाजार, निफ्टी, सूचकांक, इंडिया वॉलेटिलिटी इंडेक्स, युद्ध, प्राकृतिक आपदा,
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