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बैंकों का फरमान कर्ज अदा करें मॉल

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली April 21, 2020

कोविड-19 संक्रमण के तांडव के बीच ग्राहकों का टोटा झेल रहे शॉपिंग मॉल मालिकों और उनके किरायेदारों के लिए एक और सिरदर्दी बढ़ गई है। सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी बैंकों ने शॉपिंग मॉल मालिकों को देनदारी चुकाने के लिए पत्र लिखे हैं। बैंकों ने लीज रेंटल डिस्काउंटिंग (एलआरडी) के तहत अनुबंधीय देनदारियों का हवाला देकर मॉल मालिकों को कर्ज भुगतान के लिए कहा है।

बैंकों को डर है कि अगर मॉल मालिकों से नियमित रूप से रकम नहीं मिली तो इन्हें आवंटित ऋण गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में बदल जाएंगे। इसे ध्यान में रखते हुए बैंकों ने मॉल मालिकों को अप्रैल का किराया संबंधी बिल तैयार करने के लिए कहा है। मॉल मालिकों को कहा गया है कि वे अपने किरायेदारों को किराये की रकम बैंक के संयुक्त खाते (एस्क्रो अकाउंट) में डालने के लिए कहें। शॉपिंग सेंटर्स एसोसिएशन (एससीए) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के इस कदम का विरोध किया है। एससीए देश के करीब 650 मॉल और शॉपिंग सेंटरों का प्रतिनिधित्व करता है। एससीए का कहना है कि बैंकों के इस फरमान से शॉपिंग मॉल में कारोबार करने वाले खुदरा स्टोर भुगतान नहीं कर पाएंगे, जिससे करीब 25,000 करोड़ रुपये के एनपीए का अंबार लगा जाएगा। एससीए ने कहा कि बैंकों के इस कदम से करीब 50 प्रतिशत कंपनियों पर असर होगा।

एससीए का यह भी कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सलाह के बाद भी बैंक तीन महीने तक भुगतान टालने की सुविधा कई मॉल मालिकों को नहीं दे रहे हैं। एक बैंक ने एक शॉपिंग मॉल को भेजे पत्र में किराये की शर्तों के अनुसार उन्हें समय पर किराये का भुगतान करने केकहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि मॉल में कारोबार करने वाले खुदरा स्टोरों ने भी रकम सीधे बैंक के खाते में अंतरित करने की शर्त पर सहमति दी थी। बैंकों का शॉपिंग मॉल एवं शॉपिंग सेंटरों में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश है और इनमें 75 प्रतिशत हिस्से का भुगतान एलआरडी या किराये की रकम के जरिये होता है।

एससीए पहले ही आरबीआई से इस बात की शिकायत कर चुका है कि कई बैंक उन्हें तीन महीने तक भुगतान टालने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण मॉल एवं शॉपिंग सेंटरों में आर्थिक गतिविधियां पूरी ठप हैं, जिससे खुदरा स्टोरों के लिए किराये का भुगतान करना संभव नहीं है। एससीए के चेयरमैन अमिताभ तनेजा ने कहा,'कई मॉल मालिकों को बैंकों से एलआरडी देनदारी से जुड़े पत्र मिले हैं। आरबीआई की घोषणा के अनुसार वे तीन महीने तक भुगतान टालने के लिए राजी नहीं दिख रहे हैं। हमने आरबीआई के पास इसकी शिकायत दर्ज कराई है। अगर हमें भुगतान के लिए हमें 9 से 12 महीने तक की मोहलत नहीं दी जाती है तो मॉल उद्योग बुरी तरह प्रभावित होगा और लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। हमने आरबीआई को अपनी चिंता से अवगत करा दिया है।'

तनेजा ने कहा कि अगर मई में मॉल खुलते हैं तब भी सामान्य कारोबार तक पहुंचने में लंबा समय लगेग, क्योंकि उपभोक्ताओं के पास भी अतिरिक्त खर्च के लिए रकम नहीं होगी।

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