बिजनेस स्टैंडर्ड - कच्चे तेल की पतली हुई धार
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कच्चे तेल की पतली हुई धार

ज्योति मुकुल और अमृता पिल्लै / नई दिल्ली/मुंबई 04 21, 2020

कच्चे तेल का अमेरिकी सूचकांक वेस्ट टैक्सस इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) के सोमवार को शून्य से नीचे 37 डॉलर प्रति बैरल तक फिसलने के बाद दुनिया के तेल एवं वित्तीय बाजारों में सिहरन पैदा हो गई। इससे अंतरराष्टï्रीय बाजार में कच्चा तेल 20 प्रतिशत लुढ़क कर 18 डॉलर प्रति बैरल रह गया। हालांकि बाद में तेल ने कुछ नुकसान पाटा और 20 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया।

जहां तक भारतीय बाजार की बात है तो यह कच्चे तेल को 25 प्रतिशत भारांश देते हुए अपने आयात मानकों का निर्धारण करता है। इसका कच्चा तेल बास्केट इस समय वर्ष 2019-20 के औसत 60.6 डॉलर प्रति बैरल स्तर का एक तिहाई यानी 20 डॉलर प्रति बैरल रह गया है। भारतीय कच्चा तेल बास्केट बेंचामार्क  75 प्रतिशत भारांश दुबई-ओमान को देता है। दुनिया भर में आर्थिक सुस्ती से कच्चे तेल की मांग पहले ही कम हो गई थी, लेकिन कोविड-19 महामारी से हालात और बिगड़ते चले गए। अंतरराष्टï्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार वर्ष 2020 में तेल की वैश्विक मांग कम होकर 90 लाख बैरल प्रति दिन रह जाएगी। आईईए के अनुसार इससे एक दशक की वृद्धि दर के बराबर नुकसान होगा। आईईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'तेल उद्योग के लिए अप्रैल सबसे खराब महीना साबित हो सकता है। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले तेल की मांग 2.9 करोड़ बैरल तक कम हो सकती है।'

तेल की कीमतें थामने के लिए तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक और रूस ने मई और जून में उत्पादन में 97 लाख बैरल प्रति दिन की कटौती करने की घोषणा की थी। कीमतों में गिरावट रोकने के लिए जुलाई और दिसंबर में इसे कम कर 77 लाख बैरल प्रति दिन और अप्रैल 2022 तक 58 लाख बैरल प्रति दिन तक करने की योजना तैयार की गई थी। माना जा रहा है कि 2020 के अंत तक इससे बाजार में कुछ हद तक तेल का भंडार कम हो सकता है।

भारत दुनिया में तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक देश है और तेल कीमतों में कमी से इसे लाभ भी मिल सकता है, लेकिन भारत में उत्पादों की कीमतों उनके अपने मानक सूचकांकों से जुड़ी होती है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये के 76.63 तक फिसलने से तेल कीमतों में कमी से होने वाला लाभ सीमित रह सकता है। इस बीच, भारत विशाखापत्तनम, मंगलूर और पाडुर में 53.3 लाख टन तेल का रणनीतिक भंडार जमा करना चाहता है।

आईएचएस मार्केट में कार्यकारी निदेशक (ऑयल मार्केट्स मिडस्ट्रीम ऐंड डाउनस्ट्रीम) प्रेमाशिष दास का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तेल की मांग में बदलाव एवं इसका उपलब्ध भंडार और ओपेक और रूस जैसे देशों का रवैया तेल बाजार की दिशा तय करने में सबसे अहम हैं। दास ने कहा, 'कोविड-19 महामारी और इसकी चाल सहित कई दूसरे कारकों पर तेल की मांग और इसमें किसी तरह का सुधार निर्भर करेगा।

विभिन्न देशों की सरकारें इस महामारी से कैसे निपटती हैं यह बात तेल की मांग पर सबसे अधिक असर डाल सकता है। तेल की मांग सुधरने के बाद ओपेक एवं रूस और अमेरिका का रवैया भी अहम भूमिका निभाएगा।'

दूसरी तिमाही में तेल कीमतें 25-30 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती है और 2020 की शेष तिमाहियों में इसमें मामूली इजाफा हो सकता है। क्रिसिल रिसर्च ऑन ऑयल प्राइसेस में निदेशक मीरेन लोढा ने कहा, 'तेल का अकूत भंडार और अतिरिक्त भंडारण क्षमता का अभाव भी तेल कीमतों पर असर डालेंगे। कुल मिलाकर बें्रट 2020 में 30-35 डॉलर के बीच रह सकता है और कीमतें ऊपर जाने के बजाय नीचे ही आएंगी।'

अमेरिका में तेल भंडार तेजी से बढऩे और वहां उत्पादन में भी खास कमी नहीं आने से डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। पब्लिसिस सैपियंट में उपाध्यक्ष, ऊर्जा एवं जिंस, आदित्य गांधी ने कहा कि तेल की उपलब्धता बढऩे और इसका इस्तेमाल नहीं होने से सारी व्यवस्था ठहर गई है। गांधी ने कहा कि अमेरिका में पिछले कुछ महीनों में कई पाइपलाइन परियोजनाएं पूरी हुई हैं, जिससे अधिक मात्रा में तेल का निर्यात संभव हो सकता है।


तेल की धार पर फिसला बाजार

तेल कीमतों में तेज गिरावट से घरेलू शेयर और मुद्रा बाजार में बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स 1,011 अंक गिरकर 30,637 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 280 अंक नीचे 8,981 पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपया 29 पैसे नरम होकर 76.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। अमेरिका में कुछ तेल वायदा के ऋणात्मक स्तर पर पहुंचने के बाद ब्रेंट क्रूड के दाम 20 फीसदी फिसलकर 20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। हालांकि तेल के दाम में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है लेकिन वैैश्विक वृद्घि पर जोखिम बढऩे से निवेशकों का मनोबल कमजोर हुआ जिाससे बिकवाली बढ़ी। मंदी की आशंका से एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2,100 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। अप्रैल में उनकी ओर से बिकवाली थम सी गई थी लेकिन तेल की कीमतों में गिरावट से निवेश निकाले जाने की चिंता फिर बढ़ गई है। बीएस संवाददाता

Keyword: IEA, WTI, Crude Oil, Petroleum, OMC, Production, कच्‍चा तेल, पेट्रोलियम, उत्पादन, ओएमसी, ओपेक,
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