बिजनेस स्टैंडर्ड - लंबी लड़ाई
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, November 29, 2020 01:01 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

लंबी लड़ाई

संपादकीय /  April 20, 2020

कोविड-19 के मामले पहले जहां औसतन चार दिन से कुछ अधिक वक्त में दोगुने हो रहे थे वहीं अब यह अवधि बढ़कर साढ़े सात दिन हो गई है। इसका श्रेय तमाम लोगों की कड़ी मेहनत को जाता है। हो सकता है हर कोई सरकार के रुख से सहमत नहीं हो। कुछ लोग यह दलील दे सकते हैं कि सरकार ने सक्रियता दिखाने में बहुत देर कर दी और वह तब सक्रिय हुई जब विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे महामारी घोषित किए दो सप्ताह बीत चुके थे। तब से सरकार को इस महामारी से निपटने में जोरदार संघर्ष करना पड़ा है। इस बात को समझते हुए हमें इस बीमारी के नियंत्रण को लेकर जीत की घोषणा करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। देश में बीमारी के संक्रमित लोगों की तादाद अभी भी लगातार बढ़ रही है। बीते दो दिनों में क्रमश: 1,400 और 1,900 मरीज बढ़े हैं। रविवार रात तक जहां संक्रमित लोगों की तादाद 17,000 थी, वहीं अगले पखवाड़े लॉकडाउन का दूसरा चरण समाप्त होने तक यह दो बार दोगुनी हो सकती है। अगर उस समय तक 60,000 मामले हुए तो इसका अर्थ यही होगा कि सरकार शायद उस समय भी लॉकडाउन को पूरी तरह समाप्त करने की स्थिति में नहीं रहेगी। वह तब भी आंशिक रूप से और चरणबद्ध तरीके से ही इस दिशा में बढ़ सकती है।

लोगों को अंतहीन समय तक बंद करके नहीं रखा जा सकता। इसका मनोवैज्ञानिक नुकसान होगा। ऐसे तरीके तलाश करने होंगे कि लोग बिना जोखिम के बाहर निकलकर कामकाज शुरू कर सकें। इसका अमल भी व्यवस्थित तरीके से करना होगा ताकि प्रवासी श्रमिकों के पलायन जैसी कोई स्थिति दोबारा न बने। सरकार 40 दिन से ज्यादा समय तक दुनिया का सबसे गंभीर लॉकडाउन जारी नहीं रख सकती है। भारत को इस बात को भी ध्यान में रखना होगा कि सिंगापुर जैसे देशों में संक्रमण का दूसरा दौर शुरू हुआ है और चीन में एकदम नए इलाकों में कोविड-19 संक्रमण सामने आया है। कहने का अर्थ यह कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। यह भी सही है कि दो सप्ताह बाद अगर मामले इतने अधिक बढ़ जाते हैं तो बीमारी से निपटने की हमारी क्षमता की भी परीक्षा होगी। सरकार को संस्थागत क्षमता में इजाफा करना जारी रखना होगा। मास्क, औषधि और बचाव उपकरणों के उत्पादन, जांच उपकरणों के आयात, नए अस्पतालों की स्थापना आदि के रूप में हमें यह काम करना होगा।

तमाम अन्य चुनौतियां भी हैं। यदि लॉकडाउन में इजाफा होता है तो इससे अर्थव्यवस्था को और अधिक नुकसान होगा। ऐसे में लोगों की आजीविका के मसले को गंभीरता से हल करना होगा। अब तक इसकी अनदेखी होती रही है। सरकार को काफी सक्रियता दिखानी होगी और आरबीआई को भी बोझ उठाना होगा। आरबीआई ने नीतिगत दरों में कटौती की है और नकदी आसान की है। परंतु केवल इतना पर्याप्त नहीं है। केंद्रीय बैंक ने जो किया है, उससे परे सरकार को आगे बढ़कर ऋण समर्थन देना होगा, कारोबारियों के लिए नकदी प्रवाह सुनिश्चित करना होगा और बेरोजगारी को नियंत्रित रखना होगा। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि रबी की फसल मंडियों में पहुंचे और खरीदकर भंडारित की जाए। सरकारी समर्थन के अभाव में बड़े पैमाने पर कारोबार बच ही नहीं पाएंगे। इससे व्यापक बेरोजगारी उत्पन्न होगी। भारत जैसे देश में इस पैमाने पर होने वाली आर्थिक क्षति बहुत महंगी साबित होगी क्योंकि आबादी का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करता है और उसके पास कोई बचत नहीं है। इस बीच केंद्र और राज्य दोनों सरकारें राहत उपलब्ध करा रही हैं लेकिन देश में शासन की क्षमता बहुत सीमित है। ऐसे में सरकार को अब लोगों की जान बचाने के लिए उनकी आजीविका बचाने की तैयारी कर लेनी चाहिए।

Keyword: WHO, Covid-19, Pandemic, Economic, CoronaVirus, Lockdown, Flu, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, महामारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जीडीपी में सुधार के बाद आगे तेज होगी रफ्तार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.