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सहकारी आवास समितियों को आम बेच रहे किसान

दिलीप कुमार झा / मुंबई 04 19, 2020

देशभर में लॉकडाउन की अवधि बढऩे से महाराष्ट्र के आम किसानों को अपनी आजीविका और अगले साल तक अपना अस्तित्व बचाए रखने की चिंता में डाल दिया है। जिस फसल के लिए उन्होंने पिछले सत्र में ही तैयारी शुरू कर दी थी, उनके लिए अब उसे बेचना काफी मुश्किल हो रहा है।

महाराष्ट्र में आम के प्रमुख केंद्र रत्नागिरि जिले के किसानों ने मुंबई और राज्य के अन्य बड़े शहरों में सहकारी आवास समितियों से ऑर्डर लेने और सीधे उपभोक्ताओं को थोक आपूर्ति करने के लिए संपर्क करना शुरू कर दिया है। रत्नागिरि जिले में आम की प्रसिद्ध किस्म अल्फांसो का लगभग 2,75,000 टन उत्पादन होता है।

आम आपूर्ति की इस नई प्रणाली में बिचौलियों के हटने से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को ही लाभ है। बिचौलिये आम तौर पर इस सौदेबाजी की सुविधा में भारी मार्जिन प्राप्त करते हैं। लेकिन अब किसान एजेंट के माध्यम से की जाने वाली बिक्री के मुकाबले कम से कम 20 से 30 प्रतिशत अधिक कमाई कर लेंगे और उपभोक्ता को भी बाजार मूल्य से कम दरों पर सुनिश्चित आपूर्ति मिल जाएगी।

महाराष्ट्र में कृषि उपज की बिक्री और उत्पादन पर नजर रखने वाली राज्य सरकार की इकाई महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एमएसएएमबी) के महाप्रबंधक मिलिंद जोशी ने कहा, 'रत्नागिरि में आम के किसानों ने अपनी उपज की सीधी बिक्री करने के लिए व्यक्तिगत रूप से सहकारी आवास समितियों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। 180 से अधिक किसानों और 100 उपभोक्ताओं ने हमारी वेबसाइट पर पंजीकरण किया है। हम उनके द्विपक्षीय कारोबार में हस्तक्षेप नहीं करते हैं, केवल सुविधा प्रदान करते हैं।'

भारत में अल्फांसो आम के केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले रत्नागिरि जिले में फिलहाल इसकी क्षमता से केवल 50 प्रतिशत स्तर पर ही आम उत्पादन हो रहा है। जलवायु परिवर्तन, अपर्याप्त ऋण सुविधा, कटाई से पहले और बाद में फलों की देखभाल संबंधी तकनीक की अनुपलब्धता और संगठित खुदरा बिक्री की गैर-मौजूदगी की वजह से किसान धीरे-धीरे आम उत्पादन गंवाते देखे गए हैं।

जोशी ने कहा, 'आज बड़ी मात्रा में अल्फांसो आम उपलब्ध है जिसे उचित बिक्री की जरूरत है। किसानों ने बड़े स्तर पर निर्यात ऑर्डर बुक किए हैं जिन्हें माल ढुलाई की अधिक लागत के कारण फिलहाल पूरा करना असंभव है। थोक में माल ले जाने वाले विमान वैश्विक लॉकडाउन की वजह से दोनों तरफ के यात्रियों के बिना उड़ान नहीं भर सकते हैं। छोटे वाहकों की परिवहन लागत बहुत महंगी है। ऐसी परिस्थिति में आम के किसानों के पास इस सत्र का निर्यात शुरू करने के लिए लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार करने के अलावा विकल्प नहीं है।'

रत्नागिरि के थोक बाजार में अल्फांसो आम के दाम गिरकर 600 रुपये दर्जन रह गए हैं। हालांकि बढिय़ा गुणवत्ता वाले अल्फांसों (प्रत्येक फल का वजन 250 ग्राम से अधिक) के दाम 1,200-1,500 रुपये प्रति दर्जन हैं।

लॉकडाउन से न केवल परिवहन ठप पड़ा बल्कि कारखानों और खेतों में भी श्रमिकों की कमी हो गई है। खेत से हवाई अड्डे तक आम की ढुलाई मंद पड़ गया है। उदाहरण के लिए यूरोप भेजने के लिए माल ढुलाई की लागत पहले 100 रुपये थी, जो आज 210 रुपये प्रति किलोग्राम बैठती है।

जोशी ने कहा कि अगर यह लॉकडाउन 3 मई से आगे बढ़ाया जाता है तो इस सत्र में आम निर्यात का अवसर खत्म हो जो जाएगा। लेकिन किसान और निर्यातक सभी मंजूरियों के साथ इस लॉकडाउन अवधि के तुरंत बाद खेप शुरू करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते आयात करने वाले देशों में भी लॉकडाउन खत्म हो जाए।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि किसानों और भारतीय निर्यातकों को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और पश्चिम एशिया से फार्मास्युटिकल और प्रत्यक्ष उपभोग के लिए भारी मात्रा में आम निर्यात के ऑर्डर मिले हैं।

मैंगो ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यपक्ष आई अली ने कहा कि हमें साल में केवल एक बार अपनी रोजी-रोटी कमाने का मौका मिलता है। अगर यह मौका गंवा दिए तो अगले पूरे साल पैसे की दिक्कत हो जाएगी।

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