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रिवर्स रीपो की सीमा तय करेगा रिजर्व बैंक

रघु मोहन / मुंबई April 19, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रिवर्स रीपो के जरिये आने वाली रकम अधिक मात्रा में अपने पास रखने के पक्ष में नहीं दिख रहा है। इसके उलट यह रकम उद्योग-धंधों तक पहुंचाने के लिए बैंकिंग नियामक इससे आने वाली रकम की सीमा तय कर सकता है। इस बारे में एक सूत्र ने कहा, 'हालांकि इस बात का निर्णय पूरी तरह बैंकों को करना है कि वे ऋण कहां आवंटित करना चाहते हैं, लेकिन अब उन्हें आरबीआई के पास असीमित मात्रा में रकम रखने की इजाजत नहीं दी जाएगी।'

आरबीआई ने पिछले शुक्रवार को रिवर्स रीपो दर 25 आधार अंक घटा कर 3.75 प्रतिशत कर दिया था। इसका लक्ष्य बैंकों को आरबीआई के पास अधिक मात्रा में नकदी रखने से रोकना और इसे उद्योग-धंधों तक पहुंचाना था। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के बयान में इस बात का जिक्र किया गया था कि रिवर्स रीपो परिचालनों के जरिये इसके पास 27 मार्च से 14 अप्रैल तक 6.9 लाख करोड़ रुपये आए और इनके अलावा इस अवधि के दौरान वित्तीय प्रणाली मेंं 4.37 लाख करोड़ रुपये की अधिशेष नकदी थी।

इससे पहले केंद्रीय बैक ने 27 मार्च को रिवर्स रीपो दर 90 आधार अंक घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया था। मार्च में मौद्रिक समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद निकले नतीजे में दास ने कहा था, 'कोविड-19 का असर कम करने, देश की आर्थिक वृद्धि दर पटरी पर लाने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई परंपरागत और गैर-परंपरागत दोनों तरह के उपाय करने से पीछे नहीं हटेगा।' दास ने पिछले शुक्रवार को कहा कि कोरोनावायरस महामारी से देश को होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकने के लिए आरबीआई कोई भी कदम उठाने के लिए तैयार है। एक दूसर्रे सूत्र ने कहा कि रिवर्स रीपो के जरिये रकम का प्रवाह सीमित करना आरबीआई की इसी रणनीति का हिस्सा है।

एक अन्य लेकिन संबंधित घटनाक्रम में नकदी से जुड़ी चिंता और ऋण का प्रवाह बेहतर करने पर आरबीाई अपने अगले बोर्ड में विचार कर सकता है। यह बैठक अगले महीने आयोजित होगी। कोविड-19 संक्रमण के प्रसार के बाद आरबीआई के बोर्ड की होने वाली यह पहली बैठक है। यह बैठक पहले 28 अप्रैल को होने वाली थी, लेकिन इसे अब मई के पहले पखवाड़े तक के लिए टाल दिया गया है। इससे पहले आरबीआई ने रीपो के जरिये बैंकों को मिलने वाली रकम की सीमा भी तय कर दिया था। उस समय केंद्रीय बैंक ने इसे बैंक की नेट डिमांड ऐंड टाइम लाइबिलिटीज (एनडीटीएल) का 1 प्रतिशत तक सीमित कर दिया था।

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