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राज्यों के लिए बढ़ी उधारी की सीमा

गिरीश बाबू, विनय उमरजी, दिलाशा सेठ और ईशिता आयान दत्त / नई दिल्ली 04 17, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज वेज ऐंड मीन्स ऐडवांस (डब्ल्यूएमए) की सीमा बढ़ा दी लेकिन विभिन्न राज्य इससे संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि यह उनकी फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

डब्ल्यूएमए वह अल्पकालिक ऋण है जो केंद्रीय बैंक राज्यों को उनकी प्राप्तियों और भुगतान के बीच नकदी प्रवाह के असंतुलन को दूर करने के लिए अस्थायी तौर पर देता है। राज्यों को यह राशि रीपो दर पर मुहैया की जाती है जो फिलहाल 4.40 प्रतिशत है।

आरबीआई ने 31 मार्च, 2020 के स्तर पर इस सीमा में 60 प्रतिशत का इजाफा किया है। नई सीमा 30 सितंबर, 2020 तक उपलब्ध रहेगी। बैंक ने इससे पहले इसमें 30 फीसदी का इजाफा किया था। बहरहाल राज्य इस बढ़ोतरी से संतुष्ट नहीं हैं। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है लेकिन इसकी प्रकृति बहुत चरणबद्ध वृद्धि की है।   मित्रा ने कहा, 'हम चाहते हैं कि इस सीमा को दोगुना किया जाए और यह केवल डब्ल्यूएमए तक सीमित न हो।' उन्होंने कहा कि यह असाधारण महामारी का समय है और आरबीआई को लक्ष्मण रेखा लांघकर आक्रामक अंदाज में काम करना होगा।

केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजक ने कहा कि आरबीआई का कदम अच्छा है लेकिन इससे राज्य सरकारों के सामने मौजूद चुनौतियों पर कोई असर नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि केरल के लिए 60 फीसदी की पूरी वृद्धि का अर्थ केवल 1,400 करोड़ रुपये की अस्थायी उधारी के रूप में सामने आएगा। आइजक ने कहा, 'यह उपाय राज्यों के वित्तीय संकट की गंभीरता को हल नहीं करता। 60 फीसदी सुनकर लोगों को लगेगा कि यह बहुत बड़ी मदद है जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है।'

पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि डब्ल्यूएमए में राहत सुखद है लेकिन राज्यों को केंद्र सरकार से वास्तविक मदद की आवश्यकता है। असम के वित्त मंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने भी डब्ल्यूएमए के राज्यों तक विस्तार को बेहतर बताते हुए कहा यह फिर भी अपर्याप्त है। उन्होंने कहा कि राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से और घोषणाओं की अपेक्षा है। इसमें राजकोषीय घाटे की सीमा बढ़ाने और सभी ऋणोंं और ब्याज के पुनर्भुगतान को और लंबे समय के लिए स्थगित करना शामिल है।

हालांकि गुजरात के मुयमंत्री विजय रूपाणी ने आरबीआई के कदम को पर्याप्त बताया। उन्होंने कहा, 'इससे राज्यों को राहत और पुनर्वास के उपाय करने में मदद मिलेगी। इससे राज्योंं को अर्थव्यवस्था को गति देने का मौका भी मिलेगा।' उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण राज्यों को राजस्व संग्रह करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है और इसमें अनिश्चितता आ गई है।

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