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एनबीएफसी, एमएफआई के लिए खोली तिजोरी

सुब्रत पांडा और नम्रता आचार्य / मुंबई 04 17, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि वह लक्षित दीर्घकालिक रीपो ऑपरेशन (टीएलटीआरओ 2.0) को अंजाम देगा ताकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) को नकदी मुहैया कराई जा सके। ये क्षेला इस समय चल रहे स्वास्थ्य संकट और उसकी वजह से देश भर में लॉकडाउन के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

हालांकि आरबीआई ने यह साफ नहीं किया कि एबीएफसी और एमएफआई ने बैंकों से जो ऋण लिया है, उसे लौटाने में कितनी अवधि की मोहलत दी जाएगी। इस तरह नियामक ने इस मुद्दे का फैसला बैंकों पर छोड़ दिया। आरबीआई गवर्नर शक्तितकांत दास ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'एनबीएफसी, एमएफआई के लिए लंबी अवधि के रीपो ऑपरेशन कुल 50,000 करोड़ रुपये के होंगे। इसके लिए उचित आकार की खेप आएंगी।' टीएलटीआरओ 2.0 के तहत बैंक आरबीआई से 4.4 फीसदी की बेंचमार्क नीतिगत दर पर उधार लेंगे।

केंद्रीय बैंक ने पाया है कि पूर्व दीर्घकालिक रीपो ऑपरेशंस की ज्यादातर धनराशि सार्वजनिक क्षेला के बैंकों और बड़ी कंपनियों द्वारा लाए गए बॉन्डों में गई है, जबकि एनबीएफसी और एमएफआई जैसी मझोले आकार की कंपनियां नकदी की समस्या से जूझ रही हैं। आरबीआई ने कहा, 'टीएलटीआरओ 2.0 के तहत बैंक जो पैसा उधार लेंगे, उसे एनबीएफसी के निवेश ग्रेड बॉन्डोंंं और वाणिज्यिक पत्रों और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचरों में निवेश करना होगा। बैंक आरबीआई से जितनी राशि उधार लेंगे, उसमें से कम से कम 50 फीसदी राशि छोटे एवं मझोले आकार की एनबीएफसी और एमएफआई के पास जानी चाहिए।' आरबीआई ने कहा कि इस 50 फीसदी राशि में से 10 फीसदी एमएफआई की प्रतिभूतियों या योजनाओं में निवेश की जानी चाहिए। वहीं 15 फीसदी राशि 500 करोड़ या उससे कम परिसंपत्ति वाली एनबीएफसी की प्रतिभूतियों या योजनाओं में निवेश की जानी चाहिए। शेष 25 फीसदी धनराशि 500 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये के परिसंपत्तियां आकार वाली एनबीएफसी में निवेश की जानी चाहिए। यह निवेश आरबीआई से नकदी हासिल करने के एक महीने के भीतर करना होगा। टीएलटीआरओ 2.0 के तहत पहली नीलामी 23 अप्रैल 2020 को होगी।

श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस के एमडी और सीईओ उमेश रेवांकर ने कहा, 'हमारा मानना है कि आरबीआई चाहता है कि बैंक ऋण स्थगन के मुद्दे को खुल हल करें, बजाय कि उन्हें नियामक की तरफ से निर्देश दिया जाए। एनबीएफसी उद्योग चाहता है कि सभी एनबीएफसी को बैंक ऋण लौटाने में कुछ समय की मोहलत दी जाए। मुझे नहीं लगता कि इस क्षेत्र में नकदी की कोई समस्या है मगर कर्ज लौटाने में मोहलत मिलने से नकदी को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।'

आधार हाउसिंग फाइनैंस के एमडी और सीईओ देव शंकर त्रिपाठी ने कहा, 'टीएलटीआरओ 2.0 से कुछ हद तक एनबीएफसी एवं एमएफआई की नकदी की समस्या कम होगी। भले ही ऋ! ादाता बैंक किस्त एवं ब्याज के भुगतान में वह मोहलत देने से इनकार कर दें, जो एनबीएफसी अपने ग्राहकों को दे रही हैं। हालांकि यह फैसला हर बैंक के विवेक पर छोड़ा गया है कि वह एनबीएफसी को मोहलत देने के बारे में विचार करता है या नहीं।'

अभी यह साफ नहीं है कि कर्ज तीन महीने की मोहलत एनबीएफसी द्वारा लिए हुए ऋणोंं पर भी लागू होती है। इस वजह से एनबीएफसी और एमएफआई को ऐसे समय बैंकों का कर्ज लौटाना पड़ रहा है, जब कोरोनावायरस महामारी के कारण उनकी नकदी आवक बुरी तरह प्रभावित हुई है।

फाइनैंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल (एफआईडीसी) के सह-चेयरमैन रमन अग्रवाल ने कहा, 'आरबीआई ने बैंकों से एनबीएफसी द्वारा लिए गए ऋ! ाों को लौटाने में मोहलत के मुद्दे को नहीं छेड़ा है और इसे बैंकों के विवेक पर छोड़़ दिया गया है। इंडियन बैंक एसोसिएशन इस मुद्दे पर बैठक कर रहा है और हमें उम्मीद है कि इसका सकारात्मक नतीजा निकलेगा।'

श्रेय इन्फास्ट्रक्चर फाइनैंस के चेयरमैन हेमंत कनौडिय़ा ने कहा कि हालांकि आरबीआई ने लजु अवधि में नकदी की किल्लत को दूर करने की कोशिश की है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। इस समय ताठकालित जरूरत यह है कि नकदी आवक के आधार पर कॉरपोरेट्स को एकबारगी पुनर्गठन की मंजूरी दी जाए।

आरबीआई ने एनबीएफसी और एमएफआई के लिए नकदी की स्थिति और सुधारने के लिए नाबार्ड, सिडबी और राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) को 50,000 करोड़ रुपये की विशेष पुनर्वित्त सुविधा मुहैया कराई है। आरबीआई ने कहा कि इस कुल राशि में नाबार्ड को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों और एमएफआई को पुनर्वित्त के लिए 25,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। वहीं 15,000 करोड़ रुपये सिडबी को दिए जाएंगे। शेष 10,000 करोड़ रुपये एनएचबी को हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों की मदद के लिए दिए जाएंगे।

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