बिजनेस स्टैंडर्ड - नकदी बढ़ाने के किए उपाय
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 03, 2020 07:08 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

नकदी बढ़ाने के किए उपाय

अनूप रॉय / मुंबई April 17, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश की वित्तीय स्थिरता को बचाने और आर्थिक गिरावट को थामने के लिए आज एक बार फिर कई उपायों की घोषणा की लेकिन व्यापक आर्थिक पैकेज पर केंद्र सरकार ने अब भी चुप्पी साध रखी है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मीडिया से रूबरू हुए और उन्होंने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इन उपायों का मकसद देश की वित्तीय व्यवस्था और वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ बनाए रखना है ताकि सभी पक्षों खासकर उपेक्षित और कमजोर वर्गों को पैसों की कोई परेशानी न हो।

केंद्रीय बैंक ने रिवर्स रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती करते हुए इसे 3.75 फीसदी कर दिया। इसका संकेत साफ  है कि बैंक अपना अतिरिक्त पैसा आरबीआई में जमा करने के बजाय दूसरी जगह निवेश करें। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए नकदी सुनिश्चित करने के वास्ते बैंकों को लिक्विडिटी विंडो से उधार ली गई राशि में से कम से कम आधा रकम छोटी एनबीएफसी को देने को कहा गया है। साथ ही उसने राष्ट्रीय वित्त संस्थानों को पुनर्वित्त का एक मौका भी दिया है जिसका इस्तेमाल लघु और छोटी कंपनियों और आवास वित्त कंपनियों की फंडिंग के लिए किया जा सकता है। आरबीआई ने बैंकों को कम से कम सितंबर तक कोई लाभांश नहीं देने को कहा है। बैंकों का नकदी कवरेज अनुपात घटा दिया गया है और रियल एस्टेट कंपनियों को और एक साल तक डिफॉल्ट से बचाया गया है। बैंक सभी तरह के ऋण पर मोहलत का फायदा दे सकते हैं और साथ ही राज्यों की आरबीआई से उधार लेने की सीमा भी 60 फीसदी बढ़ा दी गई है। आरबीआई ने साथ ही कहा कि वह राष्ट्रीय आवास बैंक, नाबार्ड और सिडबी के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की पुनर्वित्त विंडो भी खोलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपाय मौजूदा समस्याओं से निपटने के लिए पर्याप्त हैं लेकिन सरकार की तरफ  से मदद के बिना इनसे दीर्घकालीन समाधान नहीं हो सकता है।

दास ने कहा, 'आरबीआई स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगा और इस महामारी के कारण पैदा हुई चुनौतियों के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करेगा।' उन्होंने साथ ही कहा कि महंगाई में नरमी आने और 2020-21 की दूसरी छमाही में इसके 4 फीसदी से नीचे चले जाने का अनुमान है जिससे कोविड के कारण आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिरता के लिए पैदा हुए जोखिमों से निपटने के वास्ते दरों में कटौती की गुंजाइश रहेगी।

रिवर्स रीपो दर में कटौती के लिए आरबीआई को मौद्रिक नीति समिति से परामर्श की जरूरत नहीं होती है। आज की कटौती से अब यह 3.75 फीसदी रह गई है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस कारण बैंक उधार देना शुरू नहीं कर देंगे। एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च में एसोसिएट प्रोफेसर अनंत नारायण ने कहा, 'बैंकों के एनबीएफसी को उधार नहीं देने की वजह नकदी नहीं है बल्कि परिसंपत्तियों की गुणवत्ता है। और इस समस्या का समाधान नकदी और ब्याज दरों के बारे में किए गए उपायों से नहीं हो सकता है।'

एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च में एसोसिएट प्रोफेसर अनंत नारायण ने कहा कि अंत में सरकार को कुछ कदम उठाने पड़ेंगे। हो सकता है कि सरकार फंसे कर्ज के प्रबंधन के लिए एक अलग बैंक खोले या सीधे संकटग्रस्त कंपनियों से परिसंपत्तियों की खरीद के लिए कोई व्यवस्था की जा सकती है। कम से कम सरकार कुछ दबावग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए क्रेडिट  गारंटी दे सकती है। लेकिन सरकार ने अब तक ऐसा कोई उपाय नहीं किया है। नारायण ने कहा कि सरकार का राजकोषीय घाटा बढऩा तय है और अगर आरबीआई सरकार को ज्यादा उधार लेने के लिए उससे या द्वितीयक बाजार से बॉन्ड खरीदता है तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। यह भी घाटे का मुद्रीकरण है। अन्यथा अर्थव्यवस्था में ब्याज दर बढ़ सकती है जिससे सभी तरह के पैकेजों की प्रभाविता कम हो जाएगी।

आरबीआई ने अपने लक्षित दीर्घावधि रीपो ऑपरेशन (टीएलटीआरओ) के तहत अतिरिक्त 50,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इसमें से कम से कम 10 फीसदी पैसा सूक्ष्म वित्त संस्थानों द्वारा जारी प्रतिभूतियों में, 15 फीसदी 500 करोड़ रुपये या उससे कम आकार वाली एनबीएफसी द्वारा जारी प्रतिभूतियों और 25 फीसदी 500 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये के परिसंपत्ति आकार वाली एनबीएफसी द्वारा जारी प्रतिभूतियों में निवेश करना होगा।

आर्क फिनकैप के मुख्य कार्याधिकारी विमल भंडारी ने कहा, 'आज घोषित उपायों से एनबीएफसी की तात्कालिक समस्याओं का समाधान हो गया है लेकिन सरकार की ओर से प्रोत्साहन पैकेज का अब भी इंतजार है। यह उनके परिचालन की दीर्घकालिक व्यवहार्यता का रास्ता तय करेगा।'

ईवाई इंडिया के वित्तीय सेवा विभाग के प्रमुख अबिजर दीवानजी ने आरबीआई द्वारा टीएलटीआरओ के जरिये झोंकी गई रकम से एनबीएफसी की मुश्किलें दूर होंगी लेकिन शर्तों के मुताबिक पहले बैंकों को इस व्यवस्था से उधार लेना होगा।

Keyword: RBI, Economic, Monetary Policy, NBFC, Banks, Banking, Repo Rate, Coronavirus, Lockdown, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, महामारी, आरबीआई,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद उद्योग जगत में लौटेगा आत्मविश्वास?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.