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बॉन्ड बाजार में सतर्क रुख अपना रहे निवेशक

अनूप रॉय / मुंबई 04 16, 2020

बॉन्ड निवेशक इस बात को लेकर काफी चिंतित दिख रहे हैं कि तमाम कॉरपोरेट बॉन्ड की देयता ऐसे समय में आ रही है जब आर्थिक गतिविधियां थम-सी गई हैं और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) एवं उद्योग जगत अपने नकदी भंडार को  बचाकर रखने में व्यस्त हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में 52,414 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट ऋण की देयता है जिसमें से 1,992 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। मई में 46,145 करोड़ रुपये की देयता होगी जबकि जून में देय राशि लगभग 72,632 करोड़ रुपये है। इनमें डॉलर बॉन्ड का भुगतान भी शामिल है।

बॉन्ड डीलरों का कहना है कि देशव्यापी लॉकडाउन के बीच दमदार कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के अभाव में कंपनियां कार्यशील पूंजीगत ऋण के लिए वाणिज्यिक पत्रों का सहारा ले रही हैं लेकिन ऐसे निर्गम भी कुछ ही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा उठाए गए कदमों के अनुरूप पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भी ब्याज भुगतान पर तीन महीने की मोहलत दी है। उसने रेटिंग एजेंसियों को सलाह दी है कि वे इस प्रकार ब्याज की अदायगी न होने को डिफॉल्ट न मानें। हालांकि मूलधन का भुगतान किया जाएगा और इसलिए इन बॉन्डों के निवेशकों के बीच थोड़ी बेचैनी दिख रही है।

हालांकि 80 फीसदी से अधिक बॉन्ड एएए और एए रेटिंग वाली कंपनियों द्वारा जारी किए गए हैं और इसलिए निवेशकों को भरोसा है कि कोई डिफॉल्ट नहीं होगा। निवेशकों का कहना है कि कम रेटिंग वाली कंपनियों में भी डिफॉल्ट का खतरा अगले तीन महीनों में नहीं है लेकिन फिलहाल कोई नहीं जानता कि आगे कैसी परिस्थिति आएगी।

एक बॉन्ड निवेशक ने कहा, 'आईएलऐंडएफएस संकट के बाद अधिकतर कंपनियों ने आश्वस्त किया है कि उनके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। अधिकतर मामलों में नकदी कवरेज का दायरा तीन महीने से नौ महीने तक होता है। लेकिन यदि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक जारी रही और रिजर्व बैंक अथवा सरकार की ओर से नकदी प्रवाह के लिए कोई उपाय नहीं किया गया अथवा मोहलत में विस्तार नहीं दिया गया तो यह एक गंभीर समस्या हो सकती है।

एक रेटिंग एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अगले तीन महीनों के दौरान चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा, 'रेटिंग एजेंसियां ब्याज भुगतान में देरी के लिए कंपनियों को डिफॉल्टर करार नहीं देने जा रही हैं लेकिन मूलधन का भुगतान करना होगा। बाजार में उम्मीद की जा रही है कि रिजर्व बैंक को अन्य कंपनियों की तरह एनबीएफसी को भी बैंकों के लिए लिए गए ऋण की अदायगी में मोहलत का लाभ देना चाहिए। लेकिन चिंता की बात यह है कि बॉन्ड बाजार में जारी करीब 70 फीसदी निर्गम के लिए एनबीएफसी जिम्मेदार हैं। यदि उनकी नकदी प्रवाह की स्थिति प्रभावित होगी तो उससे कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में भी व्यवधान पैदा हो सकता है।

एक वरिष्ठ बॉन्ड अरेंजर ने कहा, 'यह अनुचित है कि एनबीएफसी इस मोहलत का फायदा नहीं उठा सकती है जबकि अन्य कंपनियों को उसका फायदा मिलेगा।

Keyword: Bond, Share Market, Investment, NBFC, बॉन्ड बाजार, निवेशक, एनबीएफसी, सेबी,
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