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जेट: एक साल से इंतजार कर रहे कर्मचारी, लेनदार

अनीश फडणीस और सुब्रत पांडा / मुंबई 04 16, 2020

जेट एयरवेज के प्रतिस्पर्धियों को उसके विमान और मार्ग भले ही मिल चुके हैं लेकिन उसके कर्मचारियों और लेनदारों को विमानन कंपनी के बंद होने के एक साल बाद भी अपने बकाये के भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। विमानन कंपनी ने पिछले साल 17 अप्रैल को अमृतसर से मुंबई के लिए अपनी अंतिम उड़ान भरी थी। उसके बाद उसका परिचालन बंद हो गया क्योंकि ऋणदाताओं ने आपातकालीन उधारी के लिए उसकी मांग को ठुकरा दिया था।

नरेश गोयल द्वारा स्थापित यह विमानन कंपनी 1993 में उड़ान भरने वाली पहली निजी विमानन सेवा थी। लेकिन भारी ऋण बोझ और नकदी संकट के कारण इस विमानन कंपनी को अपना परिचालन बंद करना पड़ा। कंपनी पर 16,000 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया गया है और वह पिछले साल जून से ही दिवालिया प्रक्रिया के तहत है। अब कोविड-19 संकट के कारण उसके सुधार की संभावनाएं धूमिल हो चुकी हैं।

देशव्यापी लॉकडाउन से पहले नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने इस विमानन कंपनी के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को कोई निवेशक तलाशने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया था। परिसमापन के बजाय यदि जेट एयरवेज की बिक्री किसी औपचारिक समाधान योजना के तहत की जाती है तो लेनदारों को उसकी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य मिल सकता है। पिछले महीने तक रशियन डेवलपमेंट फंड और प्रुडेंट एआरसी इस विमानन कंपनी को पुनर्जीवित करने की दौड़ में शामिल थीं लेकिन उन्होंने कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं की है।

धीर ऐंड धीर एसोसिएट्स के सहायक पार्टनर आशिष प्यासी ने कहा, 'एनसीएलएटी द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए दिए गए आदेश के मद्देनजर लॉकडाउन की अवधि को समाधान प्रक्रिया की अवधि की गणना से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा, 'विस्तार देकर एनसीएलटी ने इस प्रक्रिया को अतिरिक्त जीवनदान दिया था ताकि कोई व्यवहार्य समाधान योजना सामने आ सके। लेकिन ध्यान देने की बात है कि इस परिसंपत्ति की प्रकृति ऐसी है कि परिसमापन में उतना मूल्य नहीं मिलेगा। इसलिए परिसंपत्ति मूल्य को अधिकतम करने के लिए आवश्यक है कि कोई व्यवहार्य समाधान योजना तैयार की जाए।

हालांकि बैंकरों का मानना है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए जेट एयरवेज को पुनरुद्धार काफी मुश्किल लग रहा है। बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'कुल मिलाकर विमानन उद्योग संकट में है और विमानन कंपनियां नकदी किल्लत की समस्या से जूझ रही हैं। ऐसे में जेट एयरवेज के लिए किसी कंपनी द्वारा समाधान योजना प्रस्तुत करने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। यहां तक कि परिसमापन से भी अच्छे मूल्य हासिल करना मुश्किल होगा क्योंकि वैश्विक स्तर पर विमानन कंपनियों के विमान बेड़े में खड़े हैं।

जेट एयरवेज के पास 12 विमान हैं जिसमें तीन उसके पूर्ण स्वामित्व वाले बोइंग 737, छह बोइंग 777 और तीन एयरबस ए339 विमानों के अलावा एक विमान एयर सर्बिया को पट्टे पर दिया गया है। जनवरी में उसने अपने एक बोइंग 777 विमान की बिक्री केएलएम को करते हुए बकाये विमान ऋण को निपटाने और नीदरलैंड में दिवालिया प्रक्रिया कीलागत को पूरा करने का निर्णय लिया था। लेकिन वह सौदा अभी पूरा नहीं हुआ है। हालांकि जेट एयरवेज के कई पायलटों, इंजीनियरों और केबिन क्रू को अन्य भारतीय एवं विदेशी विमानन कंपनियों में नौकरी मिल चुकी है लेकिन करीब 4,000 कर्मचारी अभी भी जेट एयरवेज के रोल पर हैं।

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