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बंगाल में कामगार और मालिक घाटे की आशंका में डूबे

ईशिता आयान दत्त /  April 15, 2020

कोरोनावायरस का संक्रमण रोकने के लिए जिस दिन देश भर में पहले चरण में तीन हफ्ते के लॉकडाउन की घोषणा की गई थी उसके दो दिन पहले ही 23 मार्च को राष्टï्रीय राजमार्ग पर बेलगाचिया से हावड़ा के बीच लगभग लगभग 200 फैक्टरियां शाम 5 बजे बंद हो गईं। बनारस रोड के साथ लगे छोटे और मझोले कारखानों में कमोबेश देश के दूसरे हिस्से जैसा ही नजारा है। यहां सुरक्षा गार्ड और कतार में खड़े ट्रक नजर आते हैं और यहां से नजदीक रहने वाले कामगार गलियों में बैठे सुस्ता रहे हैं।

एक कलपुर्जे कारखाने में काम करने वाले कर्मचारी जलधर सिंह को लॉकडाउन से पहले के सप्ताहांत में वेतन मिला था। यहां करीब 200-250 लोगों को रोजगार मिला हुआ है लेकिन सवाल यह है कि क्या लॉकडाउन की अवधि के लिए पैसा मिलेगा? यह सवाल सिंह के मन में भी बना हुआ है। एक निर्माण इकाई में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी दीपक मंडल की तुलना में सिंह काफी बेहतर हैं जहां साप्ताहिक आधार पर भुगतान किया जाता है। यह पैसा उसके बैंक खाते में जमा हो गया। मंडल को लॉकडाउन के बाद पहले हफ्ते का भुगतान मिला लेकिन उसके बाद से वह अपने फोन पर भुगतान के लिए बैंक का एसएमएस अलर्ट चेक कर रहे हैं लेकिन कोई संदेश नहीं मिला है।

हावड़ा कास्टिंग, मशीन पाट्र्स असेंबल्ड पाट्र्स का केंद्र है और यह देश के साथ दुनिया की जरूरतें पूरी करता है। एक सामान्य गणना के मुताबिक इस क्षेत्र में 400-500 इकाइयों द्वारा 3,000 से 3,500 करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात किया जाएगा। सिंह और मंडल कारोबारी पदानुक्रम में सबसे नीचे हैं लेकिन हावड़ा में लॉकडाउन से फैक्टरी मालिकों को काफी नुकसान हो रहा है। निर्यात ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं जिसकी वजह से इन इकाइयों को भारी नुकसान हुआ है।

 कैलाश अग्रवाल की कंपनी जेपीके मेटालिक्स मैनहोल कवर बनाती है जिसकी आपूर्ति पश्चिम एशिया, यूरोप और आयरलैंड में की जाती है। अग्रवाल के पास पूरा माल भरा हुआ है और उन्हें डर है कि जब तक लॉकडाउन खत्म होगा तब तक निर्यात के ऑर्डर रद्द कर दिए जाएंगे। उन्हें एक महीने में 15 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। जेपीके में करीब 150 अनुबंध वाले संविदा कर्मचारी हैं। ठेकेदार को कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए एकमुश्त राशि का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा, 'इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।'

भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन रवि सहगल ने कहा कि अगर 15 अप्रैल के बाद भी फैक्टरियों में काम शुरू नहीं हुआ तब बड़ी तादाद में निर्यात ऑर्डर रद्द किए जा सकते हैं। सहगल ने कहा, 'चीन, ब्राजील, तुर्की और मैक्सिको ऐसे देश हैं जहां कारोबार प्रभावित नहीं होता। अमेरिका में भी जहां देश में लॉकडाउन है लेकिन उद्योगों में काम चल रहा है। पश्चिम बंगाल निर्यात के लिए विनिर्माण इकाइयों, विशेष रूप से इंजीनियरिंग क्षेत्र में 50 फीसदी उपस्थिति के साथ परिचालन फिर से शुरू करने की अनुमति देकर अगुआई कर सकता है । हावड़ा परीक्षण का केंद्र बन सकता है।'

 सहगल ने कहा कि अगर देश का इंजीनियरिंग क्षेत्र जरूरतों को पूरा करने में असफल रहता है तब आपूर्ति ऑर्डर दूसरे देशों को किया जा सकता है। अप्रैल ऐसा समय है जब ज्यादातर खरीदार छह महीने की खरीदारी की योजना बनाते हैं।

फैब्रिकेशन यूनिट दयाल इंजीनियर्स के मालिक एच के शर्मा को उम्मीद नहीं है कि लॉकडाउन हटाए जाने के बाद कारोबार तुरंत सामान्य हो जाएगा। उन्होंने कहा, 'अगले दो से चार महीने काफी उथल-पुथल वाले रहेंगे। यह एक लेन-देन पर आधारित उद्योग है। जब तक पैसा वापस नहीं आ जाता तक तक चीजें आसान नहीं होंगी।'  शर्मा दरअसल नकदी प्रवाह का जिक्र कर रहे हैं। दयाल इंजीनियर्स फाउंड्री (ढलाईखाना) के लिए स्पेयर पाट्र्स बनाते हैं जो इस वक्त संकट में हैं। जब तक कोई फाउंड्री भुगतान नहीं करता तब तक दयाल उन वेंडरों को भुगतान नहीं कर सकते हैं जो इलेक्ट्रोड और ऑक्सीजन की आपूर्ति करते हैं। यह एक ऐसा चक्र है जिसे चलते रहने की जरूरत है ।

शर्मा को अब भी अपने मजदूरों का भुगतान करना है। उन्होंने पहले ही खुराकी या दैनिक भत्ता सीधे अपने मजदूरों के खातों में ट्रांसफर किया है। लेकिन जब कारखाने खुलेंगे तब उन्हें उनकी मांग भी पूरी करनी होगी। उन्होंने कहा, 'मुझे पैसे की व्यवस्था करनी होगी नहीं तो वे दूसरी जगह काम करने चले जाएंगे।'

हावड़ा चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (एचसीसीआई) के महासचिव संतोष उपाध्याय ने कहा कि अगर सरकार मदद नहीं करती है तब हावड़ा में ज्यादातर खाते फंसे कर्ज में बदल जाएंगे। एचसीसीआई 1,000 से अधिक कारोबारियों और एमएसएमई सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है और इसने पहले से ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राहत देने की गुहार लगाई है।

मांगी गई राहतों में जीएसटी के देर से दाखिल होने पर ब्याज और दंडशुल्क से छूट देने, पूरे लॉकडाउन अवधि के दौरान दीर्घावधि ऋण और कार्यशील पूंजी ऋण पर बैंकों से ब्याज की कुल छूट जैसी मांग शामिल है। चैंबर चाहता है कि ब्याज दर छह महीने के लिए न्यूनतम छह प्रतिशत तक सीमित रहे और रेलवे बोर्ड तथा सरकारी क्षेत्र के तहत चल रहे संयंत्रों को सुझाव दिया जाए कि मार्च में खरीदे गए सामान पर देर से भुगतान के लिए ब्याज न वसूला जाए।

पिछले 5-6 साल में कामगारों और नकदी की कमी के चलते कम से कम 200 इकाइयां बंद कर दी गईं। हालांकि यहां अब भी लोहा और स्टील इकाइयों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब दो लाख कामगार जुड़े हुए हैं।

Keyword: Economic, Coronavirus, Lockdown, West Bengal, Workers, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, महामारी, संक्रमण, पश्चिम बंगाल,
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