बिजनेस स्टैंडर्ड - दिशानिर्देश को लेकर उलझन में उद्योग
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दिशानिर्देश को लेकर उलझन में उद्योग

सुरजीत दास गुप्ता, ईशिता आयान दत्त और देव चटर्जी / नई दिल्ली/कोलकाता/मुंबई 04 15, 2020

विनिर्माण क्षेत्र की बड़ी कंपनियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आज जारी दिशानिर्देश के नियमों को स्पष्टï करने तथा नियमों में कुछ और छूट देने का आग्रह केंद्र से किया है। नए दिशानिर्देशों में अधिकतर उद्योगों और फैक्टरियों को धीरे-धीरे शुरू करने के बारे में व्यापक दिशानिर्देश हैं मगर इसके लिए शर्तें काफी कड़ी रखी गई हैं।

उदाहरण के तौर पर वाहन कंपनी मारुति सुजूकी यह पता लगाने में जुटी है कि उसके 350 से 360 वेंडर तथा मझोले और छोटे आपूर्तिकर्ताओं में कितने रेड जोन में स्थित हैं। कंपनी जानना चाहती है कि ये इकाइयां अगर बंद रहती हैं तो उसके पास आपूर्ति का कोई वैकल्पिक स्रोत हो सकता है या नहीं। मारुति सुजूकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा, 'हम विस्तार से जांच रहे हैं कि हमारे कितने प्रत्यक्ष और परोक्ष वेंडर रेड जोन में हो सकते हैं, जहां कारखाने नहीं खोले जा सकते। ऐसा होता है तो हमें वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता तलाशने होंगे क्योंकि कल-पुर्जों के बगैर हम कार बना ही नहीं सकते।'

भार्गव ने कहा कि दूसरा मसला यह है कि मारुति के कुछ डीलरों को शोरूम भी खोलने पड़ेंगे। उन्होंने कहा, 'हमें अपनी कारें बेचनी भी तो हैं। इस जांच के बाद ही हम फैसला करेंगे और सरकार ने बीच में जो कुछ दिन दिए हैं, उनसे हमें तैयारी करने में मदद मिलेगी।' मारुति ने अपने कामगारों और कारखानों की सुरक्षा तथा स्वच्छता की योजना पहले ही तैयार कर ली है।

सरकार ने केवल औद्योगिक क्षेत्रों और औद्योगिक टाउनशिप में फैक्टरियां खोलने का दिशानिर्देश जारी किया है, ऐसे में वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम और वाहन कल-पुर्जा विनिर्माताओं के संगठन एक्मा से उनके सदस्य पूछ रहे हैं कि उन्हें कारखाने खोलने की इजाजत दी जाएगी या नहीं।

सायम के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'हमारे बहुत सारे सदस्य और आपूर्तिकर्ता औद्योगिक क्षेत्रों या टाउनशिप में नहीं हैं। ऐसे में अगर मूल उपकरण विनिर्माताओं के कारखाने औद्योगिक क्षेत्र में हैं, लेकिन वेंडर वहां नहीं हैं तो उत्पाद कैसे शुरू हो सकता है।'

कई लोग दिशानिर्देश में थोड़ा बदलाव करने की मांग कर रहे हैं ताकि उत्पादन जल्द से जल्द शुरू हो सके। फोक्सवैगन समूह के प्रबंध निदेशक गुरप्रताप बोपाराय ने कहा, 'हमारे जैसे बड़े संयंत्रों में हजारों श्रमिक काम करते हैं और 5-7 हजार मजदूर वेंडरों के भी होते हैं। ऐसे में उन सभी को कारखाने के भीतर या उसके आसपास ठहराना तो मुमकिन नहीं है। चाकण जैसे इलाकों में ठहरने की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। वहां हमारे जैसे बड़े कारखानों के मजदूरों को कारखाना परिसर में ठहराना व्यावहारिक नहीं होगा। इसके साथ ही नियम है कि सभी श्रमिकों का पुलिस द्वारा सत्यापन कराना होगा, जिसमें हफ्तों लगेंगे और संयंत्र खोलने में देरी होगी। आसान यह होता कि उनके सत्यापन की इजाजत कंपनी को ही दे दी जाती।'

फोक्सवैगन समूह के बोपाराय ने कहा कि वह इस बारे में और स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि ज्यादा प्रभावित इलाकों में फैक्टरियों को खोलने की अनुमति नहीं होगी। अभी यह साफ  नहीं है कि कंटेनमेंट जोन के कारण पूरा जिला (चाकण पुणे जिले में है जो रेड जोन है) बंद कर दिया जाएगा या केवल कंटेनमेंट जोन को ही बंद किया जाएगा। अगर कंटेनमेंट जोन का मतलब सभी रेड जोन या जिला है तो वह अपनी फैक्टरी नहीं खोल पाएंगे।

टायर बनाने वाली कंपनी सिएट लिमिटेड जैसी कंपनियों का कहना है कि वे हरेक मामले के आधार पर देशभर में अपनी इकाइयां खोलने के बारे में फैसला करेंगी। सिएट के मुख्य वित्त अधिकारी कुमार सुबैया ने कहा, 'यह फैसला सोच-विचार कर किया जाएगा। हमने जल्दबाजी में अपनी इकाइयों को बंद किया था और कुछ माल आधा तैयार है जिसे पूरा करना होगा या उसे कबाड़ में बेचना होगा। हमारे पास गोदाम में भी कुछ माल पड़ा है और उत्पादन शुरू होने से पहले उसे भी बेचना होगा। इसके अलावा हमें निर्यात को ऑर्डर भी पूरे करने होंगे। अगर सरकार अनुमति देती है तो हम उतना ही माल बनाएंगे जितना बिक सके और वहीं बनाएंगे जहां मांग होगी।' उन्होंने साथ ही कहा कि सामाजिक दूरी और कम कामगारों की मौजूदगी से क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं होगा और परिचालन लागत को पूरा करना हमेशा एक बड़ी चुनौती होगा। एवर्स टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के डिप्टी मैनजिंग डायरेक्टर राजू बी केतकाले ने कहा कि क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं होने से विनिर्माण की लागत निश्चित रूप से बढ़ जाएगी। कंपनी से चरणबद्ध तरीके से अपने संयंत्रों में उत्पादन शुरू करने के योजना बनाई है और उसे लगता है कि बेंगलूरु में उसकी इकाई में कामगारों के लौटने में कुछ समय लगेगा।

लॉकडाउन के कारण इस्पात संयंत्रों में सीमित उत्पादन हो रहा था लेकिन अब वहां भी उत्पादन बढ़ाने की तैयारी चल रही है। स्टील उद्योग को लॉकडाउन में भी अपना काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। (साथ में टीई नरसिम्हन और अदिति दिवेकर)

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