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मुश्किल कितनी भी आए बीमा खत्म न होने पाए

बिंदिशा सारंग /  04 14, 2020


कोविड-19 की वजह से 14 अप्रैल तक लॉकडाउन का ऐलान किया गया था, जिसमें 19 दिन का इजाफा और करने का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कर दिया। इसका मतलब है कि 3 मई तक देश में वे सभी गतिविधियां लगभग बंद रहेंगी, जो 14 अप्रैल तक बंद रहीं। इसे देखकर जीवन बीमा और सामान्य बीमा पॉलिसी वाले वे लोग फिक्र में पड़ रहे होंगे, जिनकी पॉलिसी का प्रीमियम भरने की तारीख या तो निकल गई है या एकाध हफ्ते में ही आने वाली है। उन्हें डर इस बात का होगा कि प्रीमियम नहीं भरने पर उनकी पॉलिसी खत्म यानी लैप्स हो सकती है। सामान्य बीमा पॉलिसीधारकों के लिए यह बात खास तौर पर चिंता वाली है क्योंकि उन्हें अपनी वाहन, स्वास्थ्य बीमा और दूसरी बीमा पॉलिसियों का प्रीमियम भरना होगा।

उन्हें भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के पिछले दिनों आए आदेश ने कुछ राहत दी थी क्योंकि इस आदेश में प्रीमियम भरने के लिए कुछ मोहलत दे दी गई थी। हालांकि प्राधिकरण ने अभी कोई नया आदेश नहीं दिया है, लेकिन इस बात के पूरे आसार हैं कि रियायत की इस मोहलत को और भी आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसा होता है तो राहत रहेगी मगर उसके बाद भी कुछ बातें ध्यान में रखनी होंगी ताकि बीमा का भरपूर फायदा मिल सके और किसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़े।

बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के रिटेल अंडरराइटिंग प्रमुख गुरदीप सिंह बत्रा समझाते हैं, 'आईआरडीएआई के पिछले आदेश की बात करें तो लॉकडाउन उठने के एक हफ्ते बाद तक की मोहलत दी गई है। प्राधिकरण ने कहा है कि यदि लॉकडाउन की अवधि यानी 25 मार्च से 14 अप्रैल के बीच कोई बीमाधारक अपना प्रीमियम नहीं भर पाता है तो वह 21 अप्रैल से पहले यह काम कर सकता है। उस सूरत में उसे प्रीमियम भरने में चूक नहीं माना जाएगा।'

यदि सरकार लॉकडाउन की मियाद 3 मई तक नहीं बढ़ाती तो सभी बीमा कंपनियों के दफ्तर 15 अप्रैल से खुल सकते थे। यदि रियायत की मियाद बढ़ाई जाती है तो भी 4 मई को बीमा कंपनियां खुल सकती हैं। उस सूरत में यदि आप ईसीएस सुविधा के जरिये प्रीमियम चुकाते हैं तो आपको जरूरी रकम का इंतजाम फौरन करना होगा। जिन्होंने अपने क्रेडिट कार्ड के जरिये पॉलिसी के ऑटो-रिन्यूअल यानी प्रीमियम भरने की सुविधा ली है, उन्हें ध्यान रखना होगा कि उनका कार्ड एक्टिव रहे और उसमें प्रीमियम भर की क्रेडिट लिमिट भी बची हो। यदि आप आईआरडीआईए की बताई तारीख तक बैंक में रकम जमा नहीं कर सकते और तारीख निकलने के बाद आपकी ईसीएस बाउंस कर जाती है तो आपकी पॉलिसी को लैप्स हुआ माना जाएगा।

पॉलिसीबाजर में प्रोडक्ट्स ऐंड इनोवेशन प्रमुख वैद्यनाथन रमानी कहते हैं, 'गैर-जीवन बीमा में एक साल का करार होता है। पुरानी पॉलिसी जिस दिन खत्म हो रही है, उसी दिन यदि पॉलिसी के नवीकरण के लिए प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया तो नई पॉलिसी चालू नहीं होगी। बेशक आप बाद में नई पॉलिसी खरीद सकते हैं, लेकिन पुरानी पॉलिसी खत्म होने और नई पॉलिसी चालू होने के बीच की अवधि में आपको बीमा का फायदा नहीं मिलेगा।' यहां ध्यान रखने की बात यह है कि यदि आपकी वाहन बीमा या स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लैप्स हो गई तो इस बात की संभावना बहुत कम है कि नई पॉलिसी लेने से पहले आपको बीमा की सुरक्षा मिल पाएगी।

आम तौर पर सामान्य बीमा कंपनियां पॉलिसी के नवीकरण की तारीख निकल जाने के बाद भी स्वास्थ्य बीमाधारकों को प्रीमियम अदा करने के वास्ते 30 दिन का समय देती हैं। वाहन बीमाधारकों को इसके लिए 90 दिन तक का समय दिया जाता है। लेकिन उस सूरत में आपको पुरानी पॉलिसी के गिने-चुने लाभ ही नई पॉलिसी में ले जाने की इजाजत मिलती है।

अगर आप 30 दिन और 90 दिन की उस अवधि में भी प्रीमियम चुकाने में नाकाम रहते हैं तो आपके पास नई पॉलिसी खरीदने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं रह जाता। उस सूरत में आपको पुरानी पॉलिसी में इक_ïा हुआ एक भी फायदा नई पॉलिसी में नहीं मिलेगा और शून्य से शुरुआत करनी होगी। इसमें सबसे बड़ा घाटा यह होगा कि पुरानी पॉलिसी में आपने साल-दर-साल जो नो-क्लेम बोनस जुटाया है, उससे आप एक झटके में हाथ धो बैठेंगे। बत्रा समझाते हैं, 'सामान्य स्थिति में अगर आपकी पॉलिसी 15 मार्च को एक्सपायर हो गई होती तो आपके पास प्रीमियम भरने को 15 अप्रैल तक का वक्त होता। यदि आप 25 मार्च को प्रीमियम भरते तो बीमा अधिनियम की धारा 64 वीबी के अनुसार बीमा कंपनी 15 मार्च से 25 मार्च के बीच के 10 दिनों में आपको बीमा की सुविधा नहीं देती। लेकिन लॉकडाउन की अवधि के लिए इसमें छूट दे दी गई है, इसलिए यदि 21 अप्रैल को या उससे पहले प्रीमियम जमा कर दिया जाता है तो 15 मार्च से 21 अप्रैल के बीच के बीमा दावे को भी कंपनी स्वीकार करेगी।'

जीवन बीमा में मामला कुछ ज्यादा ही आसान है। टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस के परिचालन प्रमुख यूसुफ पचमढ़ीवाला बताते हैं, 'आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों से कहा था कि जीवन बीमा पॉलिसियों के नवीकरण के लिए प्रीमियम भुगतान में 30 महीने का ग्रेस पीरियड और दिया जाए। ग्रेस पीरियड को अब बढ़ाकर 60 दिन कर दिया गया है।' इसका मतलब है कि प्रीमियम जमा करने के लिए रकम जुटाने के वास्ते आपके पास अभी अच्छा खासा वक्त बचा है।

मगर केनरा एचएसबीसी ओबीसी लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्य अधिकारी अनुज माथुर इस मामले में ग्राहकों को आगाह करते हैं। उनकी सलाह है, 'ऐसे वक्त में ग्राहकों को अपनी पॉलिसी किसी भी सूरत में लैप्स नहीं होने देनी चाहिए।  यदि 60 दिन गुजर जाने पर भी आपके पास प्रीमियम के लायक रकम जमा नहीं हो पाती है तो क्रेडिट कार्ड के जरिये भुगतान की कोशिश करें। आप किसी तरह रकम जुटाने की कोशिश भी कर सकते हैं और यदि रकम जुट जाए तो बीमा कंपनी से दोबारा ईसीएस के जरिये रकम काटने की गुजारिश की जा सकती है। यदि आपको इंटरनेट की धीमी कनेक्टिविटी से उलझना पड़ रहा है तो आपके लिए आईवीआर के जरिये भुगतान का सुरक्षित विकल्प भी रखा गया है।'

Keyword: Insurance, Policy, IRDAI, Investment, बीमा, कोविड-19, लॉकडाउन, जीवन बीमा, पॉलिसी, प्रीमियम, निवेश,
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