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किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत!

बीएस संवाददाता /  04 14, 2020

राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ शनिवार को एक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक आदेश के बाद लॉकडाउन के अगले चरण में कृषि क्षेत्र से लेकर रिटेल डीलरों तक की आपूर्ति शृंखला को सक्रिय करने के लिए देशभर के कृषि विपणन तंत्र को तैयार कर लिया गया है। लगभग हर राज्य के किसानों को अपनी फसल की कटाई और बिक्री में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ राज्यों ने सीधी खरीद शुरू कर दी है जबकि अन्य राज्यों ने इनमें से कुछ मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की है।

उत्तर भारत के अधिकांश प्रमुख रबी उत्पादक राज्यों मसलन मध्य प्रदेश और राजस्थान ने अपनी खरीद में थोड़ा अंतराल दिया है ताकि किसानों की भीड़ न हो। केंद्र ने कृषि जिंसों को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने के लिए तालमेल बिठाने के लिए एक कॉल सेंटर भी स्थापित किया है।


महाराष्ट्र में खुलेगी मंडी

महाराष्ट्र में वाशी मंडी बंद होने के चार दिन बाद बुधवार से फिर खुलेगी। इसी मंडी से मुंबई और उपनगरों को आवश्यक जिंसों की आपूर्ति होती है। बृहनमुंबई महानगरपालिका ने बांद्रा एवं सायन में एमएमआरडीए जैसे बड़े मैदानों में फल-सब्जियों की बिक्री की व्यवस्था की है।

कोरोना संक्रमण रोकने के एक उपाय के रूप में वाशी मंडी को 11 अप्रैल को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया था। राज्य में वाशी और अन्य मंडियों के बंद होने से आवश्यक जिंसों की भारी किल्लत पैदा हो गई थी। इससे सब्जियों की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हो गई। केंद्र और राज्य सरकारों ने उपभोक्ताओं को लॉकडाउन के दौरान आसानी से आवश्यक जिंसों की आपूर्ति का भरोसा दिया है।

महाराष्ट्र सरकार में खाद्य मंत्रालय के सचिव संजय खंडारे ने कहा, 'विभिन्न मंडियां बंद होने से आवश्यक जिंसों की आपूर्ति में अवरोध पैदा हुए हैं, लेकिन धीरे-धीरे मंडियों को खोलने से उनकी आपूर्ति सुधरेगी।

गुजरात में नियमों में ढील

गुजरात सरकार ने राज्य की मंडियों में फल-सब्जियों की नीलामी फिर से सामान्य बनाने के लिए एपीएमसी नियमों में ढील दी है। राज्य सरकार ने कहा है कि किसानों को अपनी उपज मंडियों में लाने की जरूरत नहीं है। उन्हें मंडी में केवल अपनी उपज की बानगी लेकर आनी होगी। वह नीलामी के बाद खरीदार के साथ मिलकर यह तय कर सकता है कि डिलिवरी खेत से होगी या किसी गोदाम से होगी


उत्तर प्रदेश: घर में डिलिवरी

अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी के अनुसार राज्य सरकार ने फल और सब्जियों की घर-घर डिलिवरी के लिए 40,000 से अधिक वैन और ठेला गाडिय़ां तैनात की हैं। इसने राज्य की करीब 250 अधिसूचित मंडियों में कटाई किए गए गेहूं, तिलहन और दालों की निर्बाध आपूर्ति के आदेश भी दिए थे। किसानों को सीधे उत्पादक संगठनों को बेचने की अनुमति दी गई है। बाजारों में भीड़ रोकने के लिए ऑनलाइन टोकन जारी किए गए हैं।


पंजाब: समय बढ़ाया गया

अनाज की खरीद और बिक्री की पूरी कार्रवाई सामान्यत: तीन हफ्ते तक होती है लेकिन इसके बजाय अब इसे 10 हफ्ते में निपटाया जाएगा। राज्य के मुताबिक, जब फसल मंडियों में आती थी तो इसमें दो-तीन सप्ताह का समय लगा करता था । यह दुनिया में कहीं भी शुरू किया गया सबसे बड़ा अनाज खरीद अभियान है। हालांकि इस साल खरीद-बिक्री प्रक्रिया को तीन हफ्तों में खत्म करने के बजाय हम भीड़ से बचने के लिए इस काम को ढाई महीने में पूरा करने जा रहे हैं।


मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद

मध्य प्रदेश फल-सब्जियों आदि की सीधी डिलिवरी की योजना बनाई जा रही है। प्रदेश में रबी सीजन के गेहूं की सरकारी खरीद बुधवार से शुरू हो रही है। भोपाल, उज्जैन और इंदौर में गेहूं खरीद की तिथि अलग से घोषित की जाएगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव शिवशंकर शुक्ला ने जिलाधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश के 21 लाख किसानों को एसएमएस के माध्यम से इस विषय में जानकारी भेजी जा रही है। प्रतिदिन छह किसानों को खरीद केंद्र जाने का एसएमएस जारी किया जाएगा।


दिल्ली में सम-विषम

एशिया के सबसे बड़े सब्जी बाजार में दिल्ली की आजादपुर मंडी शुमार है जहां सम-विषम योजना लागू करने के साथ अलग समय तय किया गया है। इसके अलावा ओखला मंडी में भी इसका अनुसरण किया जा रहा है। व्यापारियों को बताया गया है कि भीड़ से बचने के लिए रोजाना सिर्फ  एक ट्रक ही लाएं। अन्य बाजारों में भी सम-विषम नियम लागू हो सकता है।


बंगाल में ऐप की घोषणा

बंगाल में धान की फसल का मौसम नजदीक आने के साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार ने एक ऐसा ऐप बनाने की घोषणा की है  जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजारों में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और सरकार उनकी फसल को उनके घरों से खरीदेगी। राज्य के किसानों को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ रहा है। इस वक्त कई थोक बाजार बंद हैं।


दक्षिण भारत की तैयारी

तेलंगाना में आयुक्त (विपणन) लक्ष्मीबाई ने बताया कि सरकार राज्य में खाद्य तेल और दाल के प्रवेश स्थल कृष्णापत्तनम बंदरगाह से ट्रकों की पर्याप्त आवाजाही सुनिश्चित कर रही है। इसके अलावा सरकार करीब छह हजार खरीद केंद्रों के जरिये किसानों से सीधे चावल और मक्के की खरीद कर रही है। कृषि विपणन विभाग उपभोक्ताओं को सब्जियों की बिक्री के लिए मोबाइल वैन के अलावा करीब 345 रैयत बाजारों का संचालन कर रहा है।

 आंध्र प्रदेश सरकार ने सभी प्रमुख कृषि जिंसों की खुदरा मूल्य सीमा निर्धारित की है और अधिकारियों का कहना है कि आंध्र प्रदेश के पास अगले कुछ हफ्तों के लिए दालों और अन्य जिंसों का पर्याप्त स्टॉक है। राज्य स्थानीय बाजारों में आपूर्ति बनाए रखने के लिए महाराष्ट्र और हैदराबाद से दालों, गेहूं के आटे और अन्य जिंसो को ले जाने वाले ट्रकों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठा रहा है। तमिलनाडु में सरकार ने किसानों के घर से सीधे फसल खरीदने वाली खरीद एजेंसियों के लिए लोन की घोषणा की है। ओडिशा में सरकार ने कृषि से जुड़ी गतिविधियों को लॉकडाउन के दूसरे चरण में राहत दी है।

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