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कोविड के साये में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली April 14, 2020

हर साल इस समय तक रबी फसलों, खासकर गेहूं, की खरीदारी शुरू हो जाती है। इस बार हालात अलग हैं। कोविड-19 की मार से पहले से परेशान किसान अब सरकार से भी नाखुश नजर आ रहे हैं। पटियाल के नाभा क्षेत्र के किसान घूमन सिंह का कहना है कि सरकार पंजाब में प्रत्येक किसान से गेहूं खरीदारी रोजाना महज 50 क्विंटल तक कैसे सीमित रख सकती है।

सिंह ने कहा कि यह बात किसी से छुपी नहीं है कि जब खेतों में कटाई मशीन चलती है तो एक ही बार में 30-40 एकड़ क्षेत्र में लगी गेहूं फसल की कटाई हो जाती है। सिंह के अनुसार 30-40 एकड़ क्षेत्र से करीब 400-600 क्विंटल गेहूं मिलेगा, ऐसे में सरकार का निर्णय सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने निर्णय की समीक्षा करनी चाहिए।

सिंह भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू)-राजेवाल खेमे से भी जुड़े हैं। उनका मानना है कि गहूं खरीदारी की प्रक्रिय सरकार बनाने के लिए सरकार ने पिछले कुछ दिनों में जो निर्णय लिए हैं उन पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को अनावश्यक परेशानी में डालने से बचाने के लिए सरकार को तुरंत अपने निर्णयों पर विचार करना चाहिए। देश के उत्तरी राज्यों पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बड़े पैमाने पर गेहूं की सरकारी खरीद होती है।

हालांकि  यह हरेक वर्ष होने वाली सामान्य प्रक्रिया है औ इसे लेकर ज्यादा शोर-शराबा भी नहीं होता है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं। कोविड-19 संक्रमण के कारण देश में लॉकडाउन होने से रबी फसलों के विपणन का पूरा तंत्र संकट में दिख रहा है। देश में इस वायरस का संक्रमण तब उफान पर है जब देश में रबी फसलों की कटाई चल रही होती है। सिंह ने कहा कि कुछ दिनों पहले ऐसी खबरें आई थीं कि आढ़तिये (कमीशन एजेंट) पिछला बकाया नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं। सिंह ने कहा,'अगर ऐसा हुआ तो खरीद प्रक्रिया पर बुरा असर होगा।' पंजाब में मंडी कानून के तहत आढ़तिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का 2.5 प्रतिशत तक शुल्क लेते हैं। सिंह ने दूरभाष पर बताया कि अगर ऐसी हालत में बारिश हो गई तो रही-सही कसर भी पूरी हो जाएगी।

पंजाब के साथ ही मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी बुधवार से गेहूं खरीद प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हरियाणा में 20 अप्रैल से खरीदारी आरंभ होगी।

भारत ने 2020-21 विपणन सत्र में किसानों से करीब 4 करोड़ टन गेहूं खरीदने की योजना बनाई है। 2019-20 में 3.41 करोड़ टन गेहूं की खरीद हुई थी। 2020-21 में देश में करीब 10.6 करोड़ टन गेहूं की पैदावार होने का अनुमान है जो अब तक की सर्वाधिक उपज होगी। इस बार लगभ सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों खास तौर पर मध्य प्रदेश में गेहूं की बुआई रिकॉर्ड रकबे में हुई है।

पंजाब में करीब 1.4 करोड़ टन गेहूं खरीद की उम्मीद है, वहीं मध्य प्रदेश में 1 करोड़ टन और उत्तर प्रदेश में 55 लाख टन गेहूं खरीद की योजना है। हरियाणा में अगले कुछ दिनों में सरकारी खरीद शुरू होगी। उसने 75 लाख टन गेहूं खरीदने की योजना बनाई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कुल गेहूं खरीद में इन चारों राज्यों का योगदान 90 फीसदी से अधिक होता है। पंजाब ने पिछले कुछ दिनों में किसानों को 27 लाख पर्चियां जारी की हैं, जिसके आधार पर मंडियों में गेहूं की खरीद होगी, वहीं गेहूं खरीद केंद्रों की संख्या भी बढ़ाकर करीब 3,691 कर दी गई है और 1,824 चावल मिलों को गेहूं खरीद केंद्र में बदल दिया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य ने खरीद केंद्र बढ़ाए हैं और मंडियों में ट्रैक्टरों और कामगारों की आसानी से आवाजाही सुनिश्चित करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि हालांकि इस दौरान कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पूरा ख्याल रखा जाएगा।

रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने गेहूं की खरीद के लिए पूरे राज्य में 5,500 खरीद केंद्र बनाए हैं। इसने ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था भी शुरू की है ताकि बाजारों में भीड़ जमा न हो। जो किसान अपना गेहूं बेचना चाहते हैं, उन्हें खरीद केंद्र के प्रभारी से संपर्क करना होगा और अपनी किसान पंजीकरण संख्या देनी होगी। इसके बाद खरीद केंद्र का प्रभारी एक सप्ताह में ऑनलाइन टोकन सृजित करेगा, जो एसएमएस के जरिये किसान को भेजा जाएगा। अगर कोई किसान ऑनलाइन टोकन प्रणाली के जरिये पंजीकृत नहीं है और वह खरीद केंद्र पर आधार कार्ड लेकर आता है तो केंद्र प्रभारी फोटो पहचान-पत्र, बैंक पासबुक और भूूमि के कागजात देखकर उसे पंजीकृत कर सकता है।

मध्य प्रदेश में राज्य सरकार ने 'सौदा पत्रक' की व्यवस्था शुरू की है। यह कारोबारी और किसान के बीच सौदे का फॉर्म है, जो कृषि उपज विपणन समितियों (एमपीएमसी) द्वारा जारी किया जाता है। किसान को मंडी में अपनी पूरी उपज नहीं लानी पड़ती है। उसे केवल फसल की बानगी लेकर आनी होती है। इस बानगी के आधार पर खरीदार किसान के घर से या मंडी के बाहर किसी निर्धारित जगह से फसल खरीदता है। हालांकि इस बिक्री को मंडी के दस्तावेजों में दर्ज किया जाता है। एक कारोबारी सौदा पत्रक व्यवस्था के जरिये 25 से 30 फीसदी उपज खरीद सकता है। खरीदार को उपज तभी सौंपी जाती है, जब वह पूरा भुगतान कर देता है।

हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस व्यवस्था को राज्य में कुछ साल पहले बंद किया गया था। इसमें किसान को अपनी उपज की अच्छी कीमत नहीं मिलती है क्योंकि इसमें खुली बोली की कोई व्यवस्था नहीं है। राज्य सरकार ने गेहूं के लिए 4,305 खरीद केंद्र भी खोले हैं। हालांकि लॉकडाउन के कारण राज्य के इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग में गेहूं की खरीद शुरू नहीं होगी।

 
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