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20 फीसदी तक घट सकते हैं प्रॉपर्टी के दाम

राघवेंद्र कामत / मुंबई April 14, 2020

एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने आज कहा कि प्रॉपर्टी डेवलपरों को आवासीय संपत्तियों की कीमतों में 20 फीसदी गिरावट के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी कीमत मिल रही है उस पर प्रॉपर्टी बेचकर नकदी जुटानी चाहिए। पारेख ने प्रॉपर्टी डेवलपरों के साथ एक वीडियो कॉल में यह सलाह दी। रियल एस्टेट से जुड़ी संस्थाओं नरेडको और क्रेडाई ने संयुक्त रूप से इस वीडियो कॉल का आयोजन किया था और इसमें 5,500 डेवलपरों ने हिस्सा लिया।

पारेख ने कहा, 'अगले छह महीने बेहद कठिन होने जा रहे हैं। आपको नकदी की जरूरत है। प्रॉपर्टी की जो कीमत मिल रही है उस पर बेच दीजिए और नकदी का प्रवाह सुनिश्चित कीजिए। पूरी तरह तैयार हो चुकी प्रॉपर्टी को रोककर रखने की जरूरत नहीं है।' उन्होंने साथ ही कहा कि जिन लोगों के पास सुरक्षित नौकरी और बचत पूंजी है, उनके लिए यह घर खरीदने का अच्छा मौका है। वे संभावित खरीदार हो सकते हैं।

एचडीएफ सी के चेयरमैन ने कहा कि डेवलपरों को अपने मुनाफे के बारे में सावधान रहना चाहिए। जब मांग बढ़ती है तो मुनाफा बढ़ता है और जब बुरा समय आता है तो मुनाफ ा प्रभावित होता है। उन्हें अंतिम उपाय के तौर पर सरकार द्वारा घोषित मोहलत पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस नाजुक मौके पर डेवलपरों को कई मोर्चों पर समझौता करना पड़ेगा। पारेख ने कहा कि इस साल कम पैसा घर ले जाइए और ज्यादा पैसा कारोबार के लिए छोड़ दीजिए। खर्च में कटौती करें और कंजूसी दिखाइए। डेवलपरों को नई परियोजना शुरू करने के बजाय पुरानी परियोजनाओं को पूरा करने में ध्यान देना चाहिए। डेवलपरों को नकदी बोझ कम करने के उपाय करने चाहिए। उन्होंनेे कहा कि कई डेवलपरों ने अपने भूखंड गोदरेज, टाटा जैसे बड़े डेवलपरों को दिए हैं और उनके साथ साझेदारी में काम कर रहे हैं।

पारेख ने कहा कि डेवलपरों को अपनी इक्विटी पीई फंडों, वैश्विक पेंशन फंडों और सॉवरिन फंडों को बेचनी चाहिए जिससे उन्हें दीर्घकाल तक मदद मिलेगी। उन्हें बैंकरों से साथ दीर्घकालिक संबंध बनाने चाहिए और महज 50 आधार अंक या 70 आधार अंक की कमी के लिए बैंक नहीं बदलने चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक को रियल्टी उद्योग को इस संकट से उबारने के लिए डेवलपरों के ऋण का एकबारगी पुनर्गठन करने पर विचार करना चाहिए। एनपीए के 90 दिन के नियम को बढ़ाकर 180 दिन करना चाहिए। साथ ही केंद्रीय बैंक को आर्थिक गतिविधि के वित्त पोषण के लिए सीधे डेवलपरों के बॉन्ड और वाणिज्यिक प्रतिभूतियां खरीदने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनपीए और फंसे कर्ज के अपने पुराने अनुभवों को देखते हुए बैंक जोखिम लेने से कतरा रहे हैं। हमें उनकी सोच बदलने की जरूरत है।

उन्होंने राज्य सरकारों को भी सुझाव दिया कि उन्हें सितंबर और अक्टूबर के त्योहारी मौसम में स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट देनी चाहिए। राज्यों को रेडी रेकनर शुल्कों की बार.बार समीक्षा करनी चाहिए और विभिन्न शुल्कों पर स्थगित भुगतान शुल्क की अनुमति देनी चाहिए।

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