बिजनेस स्टैंडर्ड - कृषि क्षेत्र को कोविड-19 के कहर से बचाने की मुहिम
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कृषि क्षेत्र को कोविड-19 के कहर से बचाने की मुहिम

खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  April 13, 2020

इस समय देश की अर्थव्यवस्था का हरेक क्षेत्र कोरोनावायरस की मार से कराह रहा है और कृषि क्षेत्र के लिए भी इससे अछूता रहना संभव नहीं है। हालांकि सरकार ने कृषि क्षेत्र के मोर्चे पर सराहनीय सक्रियता दिखाई और इस क्षेत्र से जुड़ीं सभी गतिविधियों को लॉकडाउन की जद से बाहर रखा। सरकार के इस कदम से देश की कृषि अर्थव्यवस्था को काफी हद तक क्षति कम करने में मदद मिली है।

हालांकि लॉकडाउन की घोषणा के बाद मजदूरों का पलायन कृषि क्षेत्र के लिए लगातार परेशानी का सबब बना हुआ है। मजदूरों के अचानक पलायन करने के बाद इस क्षेत्र में कई गतिविधियों पर व्यापक असर हुआ है। कोरोनावायरस संकट का प्रसार रोकने के लिए सभी राज्यों ने अपनी सीमाएं बंद कर दी हैं। सीमाएं बंद होने से देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में फसलों की कटाई और बुआई के लिए मजदूरों का पहुंचना संभव नहीं हो पाया। देश के उत्तर-पश्चिमी भाग को रबी क्षेत्र माना जाता है। यहां तक शहरी हिस्सों एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले मजदूर भी सुदूर क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाए। आम तौर पर इस इलाके में रहने वाले मजूदर अधिक मजदूरी मिलने की लालसा में फसल कटाई एवं बुआई के समय देश के उत्तर-पश्चिम हिस्से की ओर कू च करते हैं। देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक आवागमन बंद होने के बाद ये मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों में अपने घर चले गए हैं।

लॉकडाउन लागू होने के बाद शुरुआती दिनों में वाहनों की उपलब्धता अचानक कम हो गई थी और गैर-आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में जुटे परिवहन साधन अंतर-राज्यीय सीमाओं पर अटक गए। हालांकि अब सरकार ने माल ढुलाई से जुड़ी पाबंदी में ढील दी है और हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।

देश में कोरोनावायरस संकट उस समय आया है, जब अधिकतर रबी फसलें कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं या लगभग पकने की स्थिति में होती हैं। वास्तव में सरसों, मसूर दाल, मक्का और मिर्च आदि एकत्र करने की शुरुआत भी हो चुकी है। रबी सत्र की दो प्रमुख फसलें गेहूं और मटर लगभग पक चुकी हैं और कुछ ही दिन में इनकी कटाई शुरू होने वाली है। इस चरण में मानव श्रम और कृषि उपकरणों की आवाजाही में किसी तरह की बाधा नुकसान का बड़ा सबब बन सकती है।

मौजूदा हालात में समय पर फसलों की कटाई, इनका विपणन और भंडारण कार्य संपादित करना बेहद अहम है। मौके की नजाकत समझते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने किसानों, कृषि मजदूरों और इस क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन वृहद दिशानिर्देशों का मकसद कृषि मजदूरों को कोविड-19 संक्रमण से बचाना, इस महामारी का प्रसार रोकने और भारतीय कृषि पर इस महामारी का असर यथासंभव कम करना है। राष्ट्रीय एवं विभिन्न राज्यों के अनुरूप जारी किए गए परामर्श का 15 भाषाओं में अनुवाद हुआ है और ये एक ई-बुक के तौर पर जारी किए गए हैं।

गेहं रबी सत्र की प्रमुख फसल है। आईसीएआर ने श्रम एवं कृषि उपकरणों की कमी की समस्या से निपटने के लिए इस फसल की कटाई 20 अप्रैल तक टालने की सलाह दी है। आईसीएआर के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र के अनुसार इस वर्ष गेहूं फसल की कटाई में 10 से 15 दिनों की देरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अप्रैल के आरंभ तक ज्यादातर गेहूं उत्पादक राज्यों में तापमान इस वर्ष सामान्य से कम रहा है। लिहाजा फसल कटाई अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक टालने से उत्पादन पर कोई बड़ा असर पड़ता नहीं दिख रहा है। इतना नहीं नहीं, इससे भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य की एजेंसियों को अनाज की खरीदारी और इनके भंडारण के लिए पर्याप्त तैयारी करने का मौका भी मिल जाएगा।

कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षा के लिए एहतियात के तौर पर कई कदम उठाए जा सकते हैं। इनमें व्यक्तिगत स्वच्छता के उपाय जैसे सामाजिक संपर्क में कमी, नियमित अंतराल पर हाथ धोना और फेस मास्क एवं सुरक्षात्मक वस्त्रों का प्रयोग आदि शामिल हैं।

इनके अलावा कृषि उपकरणों जैसे कटाई मशीन, ट्रैक्टर और अन्य मशीनों की सफाई पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, अनाज की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले बोरे और अन्य सामान को नीम के घोल में डालकर संक्रमण रहित किया जा सकता है।

किसानों को खेतों में सीमित संख्या में ही मजदूरों को काम करने की इजाजत देने की सलाह दी गई है। अगर स्वास्थ्य संबंधी पूरी पड़ताल करने के बाद जान-पहचान के मजदूरों को खेतों में काम पर लगाया जाए तो यह और अच्छी बात होगी। मजदूरों को खेतों में काम करते वक्त, खाते या आराम करते समय एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बरतनी चाहिए। फसल कटाई से लेकर थोक एवं खुदरा बाजारों में इनकी बिक्री तक के सभी चरणों में ऐसी सावधानियां बरती जानी चाहिए। इन उपायों के अमल में नहीं लाने पर कोविड-19 से पार पाना आसान नहीं होगा।

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