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'विविधता प्राप्त वैश्विक, अमेरिका केंद्रित फंडों से निकासी ज्यादा'

पुनीत वाधवा /  04 12, 2020

बीएस बातचीत

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) मार्च में भारतीय शेयरों से करीब 62,000 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी के पास उपलब्ध 2002 तक के आंकड़ों के अनुसार किसी  बड़ी निकासी थी। ईपीएफआर ग्लोबल में निदेशक कैमरन ब्रांट ने पुनीत वाधवा से बातचीत में कहा कि कोविड-19 संकट से पहले ही भारत को लेकर विदेशी निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ता रहा है। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश:


विकसित और तेजी से उभरते बाजारों से कितनी रकम की निकासी हुई है?

फरवरी के अंत में कोरोनावायरस के डर से बिकवाली शुरू होने से पहले बॉन्ड फंडों, खासकर अमेरिकी बॉन्ड फंडों में रकम झोंकी जा रही थी। इक्विटी फंडों में निवेश कमतर रहा था, लेकिन वैश्विक स्तर पर धाक रखने वाले फंडों में नए निवेश जरूर हो रहा था। तेजी से उभरते बाजार (ईएम) फंड समूहों में चीन और ब्राजील के इक्विटी फंडों में औसत से अधिक निवेश हुआ था। मार्च में बड़े पैमाने पर हलचल दिखी। मेरी समझ से कम नुकसान वाली परिसंपत्तियों की बिकवाली इसकी मुख्य वजह थी। 


अगर भारत के संदर्भ में बात करें तो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में बिकवाली अब अपने अंतिम मुकाम तक पहुंच चुकी है या अभी और बुरा दौर आने वाला है?

मुझे नहीं ऐसा नहीं लगता। निवेश के महौल पर कोविड-19 का असर पडऩे से पहले ही भारत को लेकर निवेशकों का उत्साह कम हो गया था। पूंजीगत व्यय, महंगाई और भारत के बैंकिंग क्षेत्र की सेहत को लेकर निवेशक सोचने पर विवश हो गए थे।


क्या अगले कुछ महीनों में भारत में विदेशी निवेश में कुछ न कुछ तेजी आती रहेगी?

तेजी से उभरते बाजारों पर केंद्रित फंड समूह निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। जैसा कि मैंने पहले ही कहा है, भारत में कोविड-19 संकट से पहले ही मुश्किलें रही हैं। इन वजहों से निवेशकों की नजरों में भारत के प्रति आकर्षण घटता रहा है।


किन बाजारों से निवेशकों ने सबसे अधिक रकम निकाली है? रकम कहां लगाई गई है?

नकदी के लिहाज से बात करें तो विविधता वाले वैश्विक और अमेरिका एवं यूरोप पर केंद्रित फंडों से सबसे अधिक निकासी हुई है। जो रकम निकासी के बाद भी बाजार में दोबारा लगाई गई है, वह कई देशों के फंड समूहों में गई है। इनमें यूनाइटेड किंगडम, चीन, स्विटजरलैंड, जापान, ब्राजील और ताइवान इक्विटी फंड और जर्मनी बॉन्ड फंड शामिल हैं।


बाजार ने कोविड-19 को लेकर किस तरह प्रतिक्रिया दिखाई है? क्या बुरा दौर खत्म हो चुका है?

कई तरह की रणनीतियां अपनाई गई हैं और इन्हें विभिन्न स्तरों तक सफलता भी मिली है। इसके साथ ही विश्वसनीय जानकारियां भी सामने आई हैं। हालांकि अब भी बाजार में काफी अनिश्चितताएं हैं। कई प्रश्न अब भी अनुत्तरित हैं और यह खासकर पूछा जा रहा है कि क्या वायरस आगे भी पूरी दुनिया में कोलाहल मचाता रहेगा। इन वजहों से दूसरी बड़ी बिकवाली को नकारना जल्दबाजी होगी।


वैश्विक बाजारों और अर्थव्यवस्था को दोबारा सामान्य स्तर पर लौटने में कितना समय लग सकता है? कोविड-19 संकट से निवेशकों के उत्साह को कितना नुकसान पहुंचा है?

मुझे लगता है कि शेयर बाजार के मुकाबले बॉन्ड बाजार अधिक तेजी से वापसी करेंगे। दुनिया के केंद्रीय बैंकों और सरकारों से मदद के कई उपायों से बॉन्ड निर्गम और इन पर प्राप्तियों का समीकरण बिगड़ता है। दूसरी तरफ कोविड-19 को लेकर अलग-अलग कारोबारों की प्रतिक्रिया शेयर निवेशकों को अलग-अलग शेयरों के मूल्यांकन का मौका देती है।


क्या केंद्रीय बैंकों ने हालात संभालने के लिए पर्याप्त कदम उठाएं हैं? वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रुख पर आपकी क्या राय है? अगले कुछ महीनों में और क्या उम्मीद की जा सकती है?

इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। अगर मई के शुरू तक हालात संभल गए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था कमोबेश पटरी पर आनी शुरू हो जाएगी। हालांकि हालात जून तक ऐसे ही रहे तो समस्याओं से निपटना आसान नहीं होगा। अब ज्यादातर केंद्रीय बैंकों के पास बहुत उपाय शेष नहीं रह गए हैं।


डेट खंडों के लिए आगे की राह कैसी दिख रही है? क्या यह समय डेट में रकम लगाने का है?

कोविड-19 के बाद मची बिकवाली से पहले निवेशक बॉन्ड फंड में रकम डाल रहे थे। कुल मिलाकर मांग की वजह मजबूत है। प्राप्तियां हासिल करने की चाह भी चरम पर है। पिछले सप्ताह जंक बॉन्ड फंड में खासा निवेश आया था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय केंद्रीय बैंक मदद करने के लिए उपलब्ध हैं।

Keyword: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक, एफपीआई, शेयर, नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी, ईपीएफआर ग्लोबल, कैमरन ब्र,
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