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आर्थिक पैकेज व धीरे-धीरे बाजार खोलने की जरूरत

शुभायन चक्रवर्ती और अभिषेक रक्षित / नई दिल्ली/कोलकाता April 12, 2020

 

 

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने आज कहा है कि सरकार को आर्थिक पैकेज की घोषणा करने और मौजूदा देशबंदी खत्म करने के पहले जानकारी देने की जरूरत है। संगठन ने यह भी कहा है कि धीरे धीरे लॉकडाउन खत्म करने व सुरक्षित तरीके से इससे निकलने की मांग बढ़ रही है।

सीआईआई ने सरकार का समर्थन देते हुए कहा है कि प्रभावित लोगों को नकदी देने के बजाय सीधे राशन देने की जरूरत है। इससे महंगाई बढऩे को रोका जा सकता है और यह भी सुनिश्चित हो सकेगा कि सरकार का धन बुनियादी जरूरतों पर खर्च किया गया है। उद्योग संगठन ने कहा है कि इस समय लोगों के लिए आश्रय और भोजन दोनों ही मुहैया कराने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'यह व्यवस्था सही नहीं है क्योंकि गलत लोग हमेशा इसका लाभ उठाते हैं। लेकिन यह असाधारण समय है और इसे ध्यान में रखते हुए पूर्ण रूप से सही व्यवस्था न होने के बावजूद ऐसा करना होगा।'

सीआईआईने कहा है कि कर्ज वितरण में साल के अंत तक कम से कम 14 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी चाहिए। सीआईआई ने सभी बैंकों को यह भी सुझाव दिया है कि सभी कंपनियों को उनके 3 महीने के कर्मचारियों के वेतन के बराबर कार्यशील पूंजी 4 से 5 प्रतिशत ब्याज पर दी जानी चाहिए।

चैंबर ने इस बात पर जोर दिया है कि निर्माण, उड्डयन या पर्यटन को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत होगी।

सीआईआई ने खनन और धातु क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन पैकेज की मांग की है, जो देशबंदी से प्रभावित हुए हैं। मांग में वित्तीय समर्थन से लेकर नकदी का मसला, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी नीति का समर्थन शामिल है।

सीआईआई के एक अधिकारी ने कहा, 'नकदी का मसला हमेशा रहा है, लेकिन इस समय संकट ज्यादा है। लॉकडाउन में कंपनियां कुछ भी नहीं कमा पा रही हैं, जबकि वेतन सहित पहले से नियत खर्चे जारी हैं, जिस पर कोई नियंत्रण नहीं किया जा सकता है।'

सीआईआई ने यह भी कहा है कि धीरे-धीरे उद्योग को प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उद्योग संगठन के मुताबिक जो क्षेत्र आवश्यक वस्तुओं व सेवाओं वाले हैं, श्रम केंद्रित क्षेत्र हैं और जो भारत के निर्यात बाजार को जिंदा रखने वाले हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। चैंबर ने यह भी कहा है कि सरकार उन क्षेत्रों को लॉकडाउन से छूट दे, जिससे जरूरी सामान के आयात कम हो सकें और उनका उत्पादन व निर्यात किया जा सके।

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