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अगला कदम

संपादकीय /  April 12, 2020

अब यह लगभग निश्चित हो गया है कि देश के बड़े हिस्से में लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा। इसमें दो राय नहीं कि यह निर्णय समझदारी भरा है और जनस्वास्थ्य से जुड़े तमाम लोग इस बात से सहमत होंगे कि देश में कोविड-19 महामारी को सामुदायिक प्रसार के स्तर पर पहुंचने से रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक है। सरकार का कहना है कि अगर लॉकडाउन नहीं किया जाता तो 15 अप्रैल तक कोविड-19 के मामले 82,000 तक पहुंच सकते थे। यदि लॉकडाउन भी नहीं लगता और रोकथाम भी नहीं होती तो ये 1.20 लाख तक जा सकते थे। परंतु इस मामले पर केवल इसी पहलू से विचार नहीं किया जा सकता है। सरकार को इस बात का खाका तैयार करना होगा कि कैसे एक तरफ आर्थिक गतिविधियों को आंशिक रूप से शुरू किया जाए और दूसरी ओर इस वायरस के प्रसार को रोका जाए और इसे सफलतापूर्वक ट्रैक किया जाए।

इसमें दो राय नहीं है कि संक्रमण को नियंत्रित रखने में लॉकडाउन की अहम भूमिका रही है। परंतु ज्यादा से ज्यादा जांच और चुनिंदा ढंग से पृथकवास की व्यवस्था भी कारगर साबित हुई है। देश में जांच का दायरा बहुत अधिक सीमित है और ऐसे में इन आंकड़ों को बहुत अधिक विश्वसनीय मानते हुए इनके आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। पॉजिटिव मामलों की वृद्धि दर में अवश्य बदलाव आया है। मार्च के तीसरे सप्ताह तक संक्रमित लोगों की तादाद हर तीसरे दिन दोगुनी हो रही थी। अब इसमें ज्यादा समय लग रहा है। हालांकि इसे संक्रमण की वास्तविक स्थिति का अक्स नहीं माना जा सकता है क्योंकि इसके लिए जांच को अत्यधिक सघन और तेज करने की आवश्यकता होगी। सरकार को इस दिशा में प्राथमिकता के साथ आगे बढऩा चाहिए।

यह बात ध्यान देने वाली है कि व्यापक लॉकडाउन सरकार के तरकश का इकलौता तीर नहीं है। कुछ पूर्वी एशियाई देशों ने जांच का दायरा बढ़ाकर और पृथक्करण और संपर्कों की पड़ताल के माध्यम से महामारी केे प्रसार को प्रभावी तरीके से रोका है।

अलग-अलग देशों में नतीजों में काफी अंतर रहा है। एक ओर जहां सैन फ्रांसिस्को ने न्यूयॉर्क से पहले लॉकडाउन किया या आयरलैंड ने ब्रिटेन से पहले लॉकडाउन किया। इसका इन शहरों में बीमारी के प्रसार पर भी असर दिखा। दूसरी ओर, ऑस्ट्रिया या डेनमार्क जैसे देशों ने लॉकडाउन समाप्त करना शुरू कर दिया है। वायरस जर्मनी की तुलना में इटली में अधिक घातक साबित हुआ। यह स्पष्ट नहीं है कि विभिन्न भूभाग में यह अंतर क्यों आ रहा है। सरकार को नियंत्रण और प्रसार को लेकर अन्य तौर तरीकों पर भी विचार करना चाहिए।

यह तय है कि लॉकडाउन से चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने की योजना आवश्यक है। इसके साथ-साथ संक्रमण और एंटीबॉडीज (पुराने संक्रमण से संबंधित) का पता लगाने के लिए व्यापक जांच की भी आवश्यकता है। संक्रमित लोगों से संपर्क में आने वालों का पता लगाने की प्रक्रिया तेज करनी होगी। ऐसा करके हॉटस्पॉट का जल्द पता लगाया जा सकता है। यह पता लग जाने पर कि वायरस कहां तेजी से फैल रहा है, उसके अनुसार योजना बनाई जा सकती है जो उन इलाकों और वहां संक्रमितों से संपर्क में आने वालों का पृथक्करण करने या प्रतिबंधित करने से संबंधित हो। परंतु इसके लिए भी सघन जांच प्राथमिक शर्त है। उस स्थिति में शेष अर्थव्यवस्था को खोला जा सकता है। केवल लॉकडाउन बढ़ाना समझदारी नहीं होगी। यह स्पष्ट है कि अभी भी सरकार को काफी कुछ करना है। खासतौर पर जांच बढ़ाने के क्षेत्र में काफी अधिक सुधार करना होगा।

Keyword: Economic, Coronavirus, Lockdown, Covid-19, Pandemic, Virus, Flu, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, महामारी,
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