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एनबीएफसी पर दोहरी मार, नकदी दबाव व ग्राहकों को मिली मोहलत

अभिजित लेले / मुंबई 04 10, 2020

 

भारतीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को जून 2020 तक 1.75 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान करना है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक, अगर उनके देनदारों से मिलने वाली रकम में तब तक तेजी नहीं आती है तो उन्हें नकदी के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

आईएलऐंडएफएस के घटनाक्रम के बाद कई वित्तीय कंपनियां पहले ही नकदी की चुनौतियों का सामना कर रही है। अब कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन ने वित्तीय कंपनियों का फील्ड ऑपरेशन प्रभावित किया है, लिहाजा संग्रह पर भी असर पड़ा है।

क्रिसिल ने एक बयान में कहा, हमारी रेटिंग वाली एनबीएफसी के लिए नकदी का कवर तेजी से घटेगा अगर वे अपनी बैंक उधारी पर मोहलत पाने में कामयाब नहीं होती। भारतीय रिजर्व बैंक ने कोविड-19 नियामकीय पैकेज के तहत कर्ज के भुगतान पर तीन महीने की मोहलत का ऐलान किया है। यह मोहलत उन देनदारों के लिए है जो अस्थायी तौर पर नकदी का दबाव झेल रहे हैं।

एनबीएफसी दोहरी मार का सामना कर रही है क्योंकि लेनदार बैंकों की तरफ से मोहलत न मिलने के बावजूद अपने ग्राहकों को मोहलत की पेशकश कर रही हैं। यह कई एनबीएफसी के नकदी प्रोफाइल पर खासा असर डालेगा।

क्रिसिल ने कहा, नई रकम जुटाना मुश्किल होगा क्योंकि बैंकों की तरह एनबीएफसी की पहुंच नकदी के व्यवस्थित स्रोत तक नहीं है और वह थोक फंडिंग पर ज्यादा निर्भर करती है।

आरबीआई ने अपने लक्षित एलटीआरओ के तहत एक लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराया है। हालांकि उसका आधा ही प्राथमिक इश्यू के लिए है। साथ ही फंडों के लिए संभावित छीना-झपटी होगी जब कॉरपोरेट और सरकारी स्वामित्व वाली वित्तीय कंपनियां इस जरिये में दिलचस्पी दिखाएंगी। इसके परिणामस्वरूप उच्च रेटिंग वाली एनबीएफसी को फायदा हो सकता है।

उच्च रेटिंग वाली एनबीएफसी लिए बड़ा निवेशक आधार म्युचुअल फंड भी निवेश निकासी का सामना कर रही है, इसलिए वह पुनर्वित्त के लिए शायद ही एक स्रोत बना रह पाएगा।

साथ ही सिक्योरिटाइजेशन पर भरोसा करने वाले कई एनबीएफसी को भी निकट भविष्य में शायद ही बहुत ज्यादा लेनदेन देखने को मिल सकता है क्योंकि अभी मोहलत मिली हुई है।

क्रिसिल ने कहा कि बड़ी और बेहतर रेटिंग वाली वित्तीय फर्में अभी भी स्थिति के प्रबंधन में सक्षम है। छोटी या कम रेटिंग वाली एनबीएफसी के लिए वास्तव में मुश्किल होगी, जो बैंकों की फंडिंग पर ज्यादा निर्भर है।

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