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आने वाले समय में और बढ़ेंगी राज्य की मुश्किलें

दिलाशा सेठ /  04 10, 2020

बीएस बातचीत

कोरोनावायरस महामारी के बीच दूसरे राज्यों से अलग बिहार सरकार की प्राथमिकता समय पर वेतन और पेंशन देने की होगी। इसी साल राज्य में विधानसभा चुनाव भी होना है। राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दिलाशा सेठ के साथ बातचीत में कहा कि राज्य सरकार देशबंदी लागू होने से राज्य के बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए राहत का भुगतान भी करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार  31 मार्च तक राजस्व को लेकर निश्चिंत थी लेकिन आगे मुश्किल दौर का सामना करना होगा। राज्य को उम्मीद है कि केंद्र  सरकार एफआरबीएम सीमा बढ़ाकर 4 फीसदी कर देगी। बातचीत के प्रमुख अंश..


राज्य पहले से ही वित्तीय दबाव में हैं, ऐसे में कोविड से समस्या गहराने के आसार हैं। आप बिहार पर इसका क्या असर देखते हैं?

राज्य पहले से आर्थिक सुस्ती के कारण वित्तीय दबाव में हैं और अब कोविड का असर राज्यों को अप्रैल के बाद से सताना शुरू कर देगा। .आने वाले दिन बहुत मुश्किल होंगे। 

राज्यों के लिए इस संकट से बाहर निकलने के लिए राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम सीमा में केंद्र से छूट मिलने को लेकर आप कितने आशान्वित हैं?

वर्ष 2009-10 में जब वित्तीय संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लिया था, तब एफआरबीएम सीमा में राहत देते हुए इसे 3 से 4 फीसदी किया गया था। 2010-11 में इसे घटकार 3.5 फीसदी किया गिया था। इस प्रकार तब राज्यों को दो वर्ष के लिए बढ़ी हुई सीमा की अनुमति मिली थी।

प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में भी बिहार ने मांग की थी कि राज्यों को जीडीपी के 1 फीसदी अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी जाए।

सच्चाई है कि पंद्रहवे वित्त आयोग ने राज्यों को बचाव खंड की अनुमति नहीं दी थी। 2019-20 में 3.5 फीसदी तक जाने की निश्चित शर्तों को पूरा करने वाले राज्यों को 0.25 फीसदी और 0.25 फीसदी की अतिरिक्त सीमा मिली थी। हालांकि, 2020-21 में उन शर्तों को पूरा करने पर भी इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। हमने मांग की है कि एफआरबीएम की सीमा को बढ़ाकर 4 फीसदी की जाए।

क्या इस पर केंद्र से आपको कोई प्रतिक्रिया मिली है?

केंद्र से अभी इस पर प्रतिक्रिया आना बाकी है लेकिन उन्होंने राज्यों की मांग सुनी है।


कोविड के कारण की गई बंदी से बिहार की अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले असर को लेकर आपका क्या अनुमान है?

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बिहार में राजस्व की वृद्धि 15 फीसदी रही थी। वस्तु एवं सेवा कर में बिहार ने 18 फीसदी की उच्चतम वृद्धि हासिल की थी। संयुक्त परिवहन ने 25 फीसदी वृद्धि हासिल की थी। लेकिन आने वाले दिन मुश्किल होंगे। 


कुछ राज्य वेतन टालने पर विचार कर रहे हैं। इसको लेकर बिहार का क्या रुख है? 

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, जो कर्मचारियों का वेतन आगे के लिए टाल रहे हैं, उनके उलट हमने तय किया है कि हम किसी तरह का वेतन नहीं टालेंगे। चूंकि कोविड से मुकाबला प्राथमिकता में है अत: समय पर वेतन और पेंशन दिया जाना चाहिए। हम इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे। हम भुगतानों में किसी तरह का विलंब या कटौती नहीं करेंगे।


उस स्थिति में क्या आप 2020-21 में अपनी बाजार उधारी बढ़ाएंगे?

सामान्य तौर पर हम पहली तिमाही में उधारी नहीं लेते हैं, लेकिन इस बार जरूरत पडऩे पर हम पहली तिमाही में भी उधारी लेंगे। यदि केंद्र अतिरिक्त उधारी की अनुमति दे तो अच्छा रहेगा।  

दूसरे राज्यों में फंसे बिहारी मजदूरों का खयाल  कैसे रख रहे हैं?

बिहार एकमात्र ऐसा राज्य है जो अपने प्रवासी मजदूरों का भी खयाल रख रहा है जिनमें राज्य से बाहर अटके श्रमिक भी शामिल हैं। दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों के भी खातों में 1,000 रुपये का भुगतान किया जा रहा है।

Keyword: कोरोनावायरस, महामारी, बिहार, प्राथमिकता, वेतन, पेंशन, सुशील कुमार, प्रवासी मजदूर,
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