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लॉकडाउन फैसला केंद्र पर

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली April 10, 2020

अधिकतर बड़े राज्यों ने आज देर शाम सुझाव दिया कि लॉकडाउन को 14 अप्रैल के बाद आगे बढ़ाया जाना चहिए और संभव हो तो इसे माह के अंत तक जारी रखना चाहिए। राज्यों ने लॉकडाउन पर अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी अब केंद्र के पाले में डाल दी है, जो इसे हटाने, बढ़ाने या कुछ आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के बारे में निर्णय लेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को इस मसले पर चर्चा के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे और माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में वह राष्टï्र को एक बार फिर संबोधित कर सकते हैं और आगे की जानकारी दे सकते हैं।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठï नीति निर्माता ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ 'ग्रीन जोन'  चिह्निïत करने के लिए काम कर रही है, जहां औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं। सरकार का विचार है कि लॉकडाउन को व्यापक तौर पर आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

केंद्र ने गृह सचिव और उपभोक्ता मामलों के सचिव के माध्यम से राज्यों को संदेश भेजा है कि आवश्यक वस्तुओं के घटते स्टॉक को बढ़ाने के लिए सीमित दायरे में औद्योगिक गतिविधियां, कारखाने और वेयरहाउस को चालू करने की जरूरत है और इसके लिए श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करानी होगी।

हालांकि अधिकांश राज्यों ने अपने सुझाव संबंधित समितियों को दे दिए हैं, वहीं केरल सरकार के कार्यबल ने लॉकडाउन से निकलने के लिए 36 पृष्ठ का तीन स्तरीय योजना लेकर आई है। आने वालों हफ्तों में राज्य इसका पालन कर सकता है।

केंद्र के साथ ही उद्योग संगठन भी सीमित दायरे में आर्थिक गतिविधियां शुरू करना चाहते हैं। हालांकि कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए मोदी सरकार की ओर से आवंटित कम धनराशि को लेकर राज्य निराश हैं।

इस बीच पंजाब मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री की घोषणा का इंतजार किए बिना लॉकडाउन को 1 मई तक बढ़ा दिया है। ओडिशा के बाद ऐसा करने वाला पंजाब दूसरा राज्य है। इससे पहले गुरुवार को ओडिशा ने लॉकडाउन को 30 अप्रैल तक बढ़ानेे की घोषणा की थी। हालांकि पंजाब सरकार ने जरूरत पडऩे पर फसलों की कटाई और गेहूं की खरीद के लिए लॉकडाउन में कुछ ढील देने के संकेत दिए हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि रेल और हवाई सेवा बहाल करना केंद्र का विशेषाधिकार है लेकिन वह अभी अपने राज्य में अंतरराज्यीय सड़क परिवहन की अनुमति नहीं दे सकते हैं। भाजपा शासित कर्नाटक ने भी लॉकडाउन हटाने का विरोध किया है जबकि महाराष्ट्र भी अभी लॉकडाउन हटाने के पक्ष में नहीं है क्योंकि ऐसा करने से उसके शहरी इलाकों में मरीजों की संख्या में भारी तेजी आ सकती है।

माना जा रहा है कि शनिवार को होने वाली बैठक में गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री फंड की कमी का मामला उठा सकते हैं। शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि कोविड-19 से लडऩे के लिए राज्यों को दिया गया 15,000 करोड़ रुपये का फंड पर्याप्त नहीं है। 

उन्होंने कहा कि कई मुख्यमंत्रियों ने 2 अप्रैल को पहली बैठक में प्रधानमंत्री से कहा था कि वायरस से लडऩे के लिए कम से कम 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। शनिवार की बैठक में केंद्र राज्यों को कुछ आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति देने के लिए कह सकता है जबकि राज्य केंद्र से ज्यादा फंड की मांग कर सकते हैं।

वायरस के प्रसार के आकलन और अनुमानों के बारे में भी केंद्र और राज्यों के बीच सहमति नहीं है। सिंह ने कहा कि राज्य में इसका सामुदायिक प्रसार शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने उनसे कहा है कि वायरस का संक्रमण अगस्त में चरम पर पहुंचेगा और इससे पंजाब की 87 फीसदी और देश की 58 फ ीसदी आबादी संक्रमित होगी। बाद में स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने इस बात पर असहमति जताई कि देश में कोविड-19 का संक्रमण सामुदायिक प्रसार के दौर में पहुंच गया है। साथ ही वह सिंह के अनुमानों से भी सहमत नहीं थे।

केंद्र कुछ आर्थिक गतिविधियों को शुरू करना चाहता है लेकिन इसके लिए उसे राज्यों को भी मनाना होगा। राज्य सरकारों के सूत्रों का कहना है कि अगर केंद्र राज्यों के वित्तीय बोझ को साझा करे तो ऐसा हो सकता है। माकपा के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि केरल केंद्र से राज्यों को मिलने वाली अपर्याप्त फंडिंग का मामला उठाएगा।

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